उत्तर प्रदेश: बागपत के मलकपुर चीनी मिल में जहरीली गैस रिसाव से हड़कंप, गार्ड की मौत, कई कर्मचारी अस्पताल में भर्ती

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित मलकपुर चीनी मिल में मंगलवार को हुए गैस रिसाव की घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। मिल के वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) में अचानक जहरीली गैस फैलने से वहां मौजूद कर्मचारियों की हालत बिगड़ गई। इस दर्दनाक हादसे में एक सिक्योरिटी गार्ड की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार हो गए, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना के बाद मिल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आसपास के लोगों में भी भय का माहौल देखने को मिला।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मलकपुर चीनी मिल का पेराई सत्र 2 अप्रैल को समाप्त हो चुका था, जिसके बाद अधिकांश कर्मचारी अपने-अपने घर लौट चुके थे। मिल में केवल कुछ कर्मचारी और सिक्योरिटी स्टाफ ही मौजूद थे। मंगलवार शाम को सिक्योरिटी गार्ड सुरेश शर्मा रोजमर्रा की तरह ईटीपी प्लांट के अंदर लाइट जलाने गए थे। जैसे ही उन्होंने लाइट ऑन की, उन्हें अंदर पहले से फैली गैस का असर महसूस हुआ और उन्होंने जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया।
सुरेश शर्मा की आवाज सुनकर पास में मौजूद अन्य कर्मचारी, जिनमें दूसरा सिक्योरिटी गार्ड प्रदीप और लेबर ठेकेदार का बेटा हामिद भी शामिल थे, उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़े। लेकिन दुर्भाग्यवश वे भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। देखते ही देखते वहां चीख-पुकार मच गई और स्थिति बेहद भयावह हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही मिल के अन्य कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया। करीब आधा दर्जन प्रभावित कर्मचारियों को किसी तरह प्लांट से बाहर निकालकर नजदीकी निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। बड़ौत स्थित मेडिसिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 50 वर्षीय सुरेश शर्मा की मौत हो गई। वहीं, एक अन्य कर्मचारी की हालत गंभीर होने के कारण उसे मेरठ रेफर किया गया है। दो अन्य कर्मचारियों—प्रदीप और हामिद—का इलाज स्थानीय अस्पताल में जारी है।
इस घटना के बाद मृतक के परिजनों में भारी आक्रोश देखने को मिला। परिजन और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंच गए और वहां हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब तक इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे। परिजनों ने मिल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस भी तुरंत सक्रिय हो गए। बागपत के पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार रॉय ने बताया कि जैसे ही गैस रिसाव की सूचना मिली, पुलिस टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि ईटीपी प्लांट में किसी प्रकार की जहरीली गैस पहले से ही जमा थी, जो लाइट जलाते ही सक्रिय हो गई। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गैस का रिसाव किस कारण से हुआ। विशेषज्ञों की टीम को बुलाकर पूरे प्लांट की जांच कराई जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते उचित सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो शायद इस घटना को टाला जा सकता था। स्थानीय प्रशासन ने मिल प्रबंधन को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
फिलहाल, प्रशासन की निगरानी में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मृतक के परिवार को न्याय दिलाने और घायलों के बेहतर इलाज के लिए प्रशासन द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।



