
तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: दक्षिण भारतीय राज्य केरल के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता पिनराई विजयन के तिरुवनंतपुरम स्थित आवास पर छापेमारी की है। केंद्रीय जांच एजेंसी की यह कार्रवाई केवल पूर्व मुख्यमंत्री के घर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी तिरुवनंतपुरम और कोच्चि समेत राज्य के कुल 13 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान जारी है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी वीणा विजयन की कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की जा रही है। हाल ही में केरल हाई कोर्ट द्वारा इस मामले में ईडी की जांच को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज किए जाने के ठीक बाद जांच एजेंसी ने यह आक्रामक रुख अपनाया है।
क्या है पूरा CMRL घोटाला और वीणा विजयन पर आरोप?
इस पूरे विवाद की जड़ कोच्चि की एक निजी खनिज कंपनी ‘कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड’ (CMRL) से जुड़ी हुई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस कंपनी ने साल 2012-13 से लेकर 2018-19 के बीच अपने बही-खातों में भारी हेरफेर किया। कंपनी पर आरोप है कि उसने ट्रांसपोर्टेशन और स्लज हैंडलिंग (कचरा प्रबंधन) के नाम पर करीब 133.82 करोड़ रुपये का फर्जी खर्च दिखाया।
कैश का सियासी कनेक्शन:
केंद्रीय जांच एजेंसियों का दावा है कि इस ₹133.82 करोड़ की भारी-भरकम राशि को कंपनी के खातों से फर्जी खर्चों के जरिए नकद (कैश) निकाला गया। इसके बाद इस काली कमाई को विभिन्न राजनीतिक दलों, प्रमुख नेताओं, मीडिया घरानों और कुछ उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारियों तक अवैध रूप से पहुंचाया गया, ताकि कंपनी के व्यावसायिक हितों को संरक्षण मिल सके।
इसी व्यापक घोटाले के भीतर सबसे विवादास्पद हिस्सा पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी वीणा विजयन की आईटी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़ा हुआ है। आरोपों के अनुसार, साल 2017 और 2018 के बीच CMRL ने वीणा विजयन की फर्म को ₹1.72 करोड़ का भुगतान किया था। दस्तावेजों में इस भुगतान को ‘सॉफ्टवेयर और मार्केटिंग सर्विसेज’ के बदले दी गई फीस बताया गया, लेकिन जांच में यह बात सामने आई कि वीणा की कंपनी द्वारा CMRL को ऐसी कोई सेवा या सॉफ्टवेयर प्रदान ही नहीं किया गया था। इसे सीधे तौर पर एक राजनीतिक रसूख के बदले दिया गया अवैध ‘भुगतान’ माना जा रहा है।
इनकम टैक्स की रेड से खुला था भ्रष्टाचार का यह खेल
इस हाई-प्रोफाइल मामले की शुरुआत साल 2019 में हुई थी, जब आयकर विभाग (Income Tax) ने CMRL के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों से इस संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पर्दाफाश हुआ। बाद में, आयकर निपटान बोर्ड (Interim Board for Settlement) ने भी अपनी जांच में माना कि खनिज कंपनी द्वारा खर्चों को कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था और पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी की कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को किया गया ₹1.72 करोड़ का भुगतान पूरी तरह संदेहास्पद था।
इस खुलासे के बाद मामला तेजी से बढ़ा और जनवरी 2024 में केंद्र सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को जांच सौंप दी। SFIO ने मामले में कंपनी अधिनियम की धारा 447 के तहत कॉर्पोरेट धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा दर्ज किया। चूंकि कंपनी अधिनियम की धारा 447 के तहत आने वाले अपराध धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (अनुसूचित अपराध) की श्रेणी में आते हैं, इसलिए इसी को आधार बनाकर ईडी ने अपनी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच को आगे बढ़ाया और केरल पूर्व सीएम पिनराई विजयन ईडी रेड की इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।
केरल हाई कोर्ट के फैसले के बाद कड़ा हुआ ED का रुख
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की इस त्वरित कार्रवाई की पृष्ठभूमि हाल ही में केरल हाई कोर्ट द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले से तैयार हुई। दरअसल, खनिज कंपनी CMRL और उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ईडी द्वारा जारी किए गए समन और मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी जांच को ही रद्द करने की मांग की थी।
हालांकि, अदालत ने उनकी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। केरल हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि:
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच करने और किसी को भी समन जारी करने का पूर्ण कानूनी अधिकार है।
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आयकर निपटान बोर्ड के समक्ष हुए किसी समझौते या राहत से PMLA के तहत चल रहे आपराधिक मामले को बंद नहीं किया जा सकता, क्योंकि दोनों कानून अलग-अलग न्यायाधिकार क्षेत्र में काम करते हैं।
अदालत से हरी झंडी मिलते ही ईडी ने बिना वक्त गंवाए अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया, जिसका नतीजा बुधवार सुबह पूर्व मुख्यमंत्री के घर पर पड़े इस छापे के रूप में सामने आया।
सियासी पारा चढ़ा, कई बड़े चेहरों पर गिरफ्तारी की तलवार
पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आवास पर हुई इस छापेमारी के बाद केरल की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों (कांग्रेस और भाजपा) ने वामपंथी मोर्चे (LDF) को घेरना शुरू कर दिया है और पूर्व मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग की है। वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक द्वेष के तहत किया जा रहा है।
बहरहाल, जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बुधवार को चल रही इस छापेमारी में कई डिजिटल उपकरण, बैंक खाते के विवरण और गुप्त डायरियों को खंगाला जा रहा है। माना जा रहा है कि इस रेड के बाद आने वाले दिनों में न केवल वीणा विजयन, बल्कि राज्य के कई अन्य कद्दावर नेताओं, नौकरशाहों और कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि ईडी को इस छापेमारी में पुख्ता वित्तीय सबूत मिलते हैं, तो केरल की राजनीति में कुछ बड़े चेहरों की गिरफ्तारी भी संभव है।



