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मेरठ में जेई ने 25 लाख के भुगतान के बदले मांगी घूस, एंटी करप्शन टीम ने जूनियर इंजीनियर और ड्राइवर को 1 लाख लेते रंगे हाथ दबोचा

मेरठ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के दावों के बीच भ्रष्टाचार का एक और बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मेरठ में उत्तर प्रदेश पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक संगठन (ACO) की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के एक जूनियर इंजीनियर (जेई) और सरकारी गाड़ी के ड्राइवर को एक लाख रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

आरोपियों ने एक ठेकेदार का पिछले तीन साल से अटका हुआ करीब 25 लाख रुपये का भुगतान जारी करने के एवज में इस मोटी रकम की मांग की थी। एंटी करप्शन टीम की इस अचानक हुई छापेमारी से राजकीय निर्माण निगम के दफ्तर में हड़कंप मच गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

भुगतान के लिए लगातार चक्कर काट रहा था ठेकेदार

मेरठ में जेई रिश्वत कांड की यह पूरी कहानी बागपत जिले के रहने वाले एक ठेकेदार सत्येंद्र सिंह तोमर की शिकायत से शुरू होती है। सत्येंद्र सिंह तोमर ने राजकीय निर्माण निगम के तहत एक निर्माण कार्य का ठेका लिया था। उन्होंने साल 2023 में ही पूरी ईमानदारी और तय मानकों के साथ अपना निर्माण कार्य पूरा कर विभाग को सौंप दिया था।

कार्य पूरा होने के बाद नियमानुसार उनका करीब 25 लाख रुपये का अंतिम भुगतान किया जाना बाकी था। लेकिन, राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी और बाबू उन्हें लगातार दौड़ा रहे थे। ठेकेदार सत्येंद्र सिंह पिछले कई महीनों से अपने ही कमाए हुए पैसों के भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके थे, लेकिन उनकी फाइल को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा था।

1.70 लाख से सौदा शुरू होकर 1 लाख पर हुआ तय

ठेकेदार का आरोप है कि भुगतान की फाइल को दबाकर बैठे राजकीय निर्माण निगम के जूनियर इंजीनियर (जेई) योगेंद्र सिंह ने खुलकर रिश्वत की मांग की। जेई ने साफ कह दिया कि जब तक उनका ‘कमीशन’ नहीं मिलेगा, तब तक 25 लाख रुपये का भुगतान पास नहीं होगा।

शुरुआत में घूसखोर जूनियर इंजीनियर ने ठेकेदार से 1.70 लाख रुपये की मोटी रकम मांगी थी। ठेकेदार सत्येंद्र सिंह तोमर इतनी बड़ी रकम देने के पक्ष में नहीं थे और वे इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना चाहते थे। उन्होंने जेई से मिन्नतें कीं, जिसके बाद काफी मोलभाव हुआ और आखिर में यह सौदा एक लाख रुपये पर तय हुआ। रिश्वत की रकम तय होने के बाद ठेकेदार ने सीधे भ्रष्टाचार निरोधक संगठन (ACO) के मेरठ प्रकोष्ठ से संपर्क किया और लिखित शिकायत दर्ज करा दी।

केमिकल लगे नोटों के जाल में फंसे घूसखोर

शिकायत मिलते ही ACO के मेरठ प्रकोष्ठ के प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया। योजना के मुताबिक, मंगलवार सुबह एंटी करप्शन की टीम ने ठेकेदार सत्येंद्र सिंह को केमिकल (फिनोलफ्थलीन पाउडर) लगे हुए एक लाख रुपये के नोट दिए। ठेकेदार को निर्देश दिया गया कि वह तय योजना के तहत मेडिकल थाना क्षेत्र के राजीवपुरम स्थित राजकीय निर्माण निगम के कार्यालय पहुंचे।

एसीओ की टीम सादे कपड़ों में दफ्तर के आसपास और परिसर के भीतर मुस्तैद हो गई। जैसे ही ठेकेदार दफ्तर पहुंचा, भ्रष्टाचार के खेल में माहिर जूनियर इंजीनियर योगेंद्र सिंह ने खुद सीधे पैसे लेने से परहेज किया। चालाकी दिखाते हुए जेई ने प्रोजेक्ट मैनेजर की सरकारी गाड़ी के ड्राइवर नीरज पाल को इशारा किया और उसे ठेकेदार से रकम कलेक्ट करने के लिए भेज दिया।

ड्राइवर ने जैसे ही थामी गड्डी, दबोच लिया ACO की टीम ने

प्रोजेक्ट मैनेजर के ड्राइवर नीरज पाल ने जैसे ही ठेकेदार सत्येंद्र सिंह से एक लाख रुपये की वो केमिकल लगी गड्डी अपने हाथ में ली, वैसे ही आसपास मुस्तैद एंटी करप्शन की टीम ने झपट्टा मारकर उसे मौके पर ही रंगे हाथों दबोच लिया। ड्राइवर के पकड़े जाने की खबर मिलते ही दफ्तर के अंदर बैठे जेई योगेंद्र सिंह के होश उड़ गए।

दफ्तर से भागने की फिराक में था घूसखोर जेई: > चश्मदीदों के मुताबिक, जैसे ही ड्राइवर नीरज पाल को टीम ने पकड़ा, कार्यालय के अंदर मौजूद जूनियर इंजीनियर योगेंद्र सिंह ने पिछले दरवाजे से बाहर निकलने और भागने की कोशिश की। लेकिन सतर्क ACO की टीम ने घेराबंदी कर रखी थी और टीम के सदस्यों ने जेई योगेंद्र सिंह को भी दौड़कर हिरासत में ले लिया।

इसके बाद जब एसीओ की टीम ने आरोपी ड्राइवर के हाथ पानी और सोडियम कार्बोनेट के घोल से धुलवाए, तो उसके हाथ तुरंत गुलाबी हो गए, जो इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण है कि उसने रिश्वत के नोटों को छुआ था।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज, जांच शुरू

ACO के मेरठ प्रकोष्ठ के प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र कुमार ने बताया कि दोनों आरोपियों—जेई योगेंद्र सिंह और ड्राइवर नीरज पाल को गिरफ्तार कर मेडिकल थाने लाया गया है। आरोपियों से बंद कमरे में गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस मेरठ में जेई रिश्वत कांड के तार क्या विभाग के कुछ अन्य बड़े अधिकारियों से भी जुड़े हैं? क्या इस 25 लाख के भुगतान को अटकाने और रिश्वत की रकम में किसी और का भी हिस्सा था?

पुलिस के मुताबिक, दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही है।

मेरठ में जेई रिश्वत कांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शासन स्तर पर लाख कड़े दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर सरकारी विभागों में बिना रिश्वत के काम होना आज भी बेहद मुश्किल है। एक ठेकेदार जिसने 2023 में ही काम पूरा कर दिया था, उसे अपना भुगतान पाने के लिए साल 2026 तक तड़पाया गया। हालांकि, इस मामले में ठेकेदार की हिम्मत और एंटी करप्शन टीम की त्वरित और सटीक कार्रवाई की सराहना की जानी चाहिए। इस तरह की गिरफ्तारियां समाज में एक कड़ा संदेश देती हैं कि यदि आम जनता जागरूक होकर आवाज उठाए, तो भ्रष्टाचारियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है।

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