नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में हफ्तों से जारी मूसलाधार बारिश के बीच मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। हाल के दिनों में भारत में मॉनसून की स्थिति में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। जून के महीने में सूखे और भीषण गर्मी से जूझ रहे देश के लिए जुलाई की शुरुआत राहत बनकर आई, जिससे मौसमी बारिश का कुल अंतर (डिपार्चर) सुधरकर -14.3% पर पहुंच गया है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मानकों के अनुसार, भारी सुधार के बाद अब भारतीय मॉनसून एक बार फिर से ‘सामान्य’ श्रेणी में लौट आया है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राहत की यह लहर बहुत लंबी नहीं चलने वाली है और आने वाले दिनों में देश के कई राज्यों में सूखे जैसे हालात तो कहीं भारी आफत देखने को मिल सकती है।
लगातार 9 दिनों की झमाझम ने सुधारे हालात
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में पिछले लगातार नौ दिनों से रोजाना होने वाली बारिश का स्तर अपने दीर्घकालिक औसत (LPA) से काफी ज्यादा दर्ज किया गया है। जुलाई के शुरुआती हफ्ते में मध्य भारत और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Zone) ने मॉनसून की चाल में नई जान फूंक दी थी।
जून के महीने में केरल के तट पर दस्तक देने के बाद मॉनसून करीब तीन सप्ताह तक एक ही जगह अटका रहा था, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और जल संचयन को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। लेकिन जुलाई की इस ताजा सक्रियता ने पश्चिमी, मध्य और उत्तरी भारत को पानी से सराबोर कर दिया। इससे न केवल जलाशयों का जलस्तर सुधरा है, बल्कि मिट्टी में नमी लौटने से किसानों ने खेतों में धान और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई तेज कर दी है।
बदलने वाला है रुख: उत्तर और मध्य भारत में थमेगी बारिश
मौसम विभाग की ताजा चेतावनी के मुताबिक, भारत में मॉनसून की स्थिति अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। उत्तर और मध्य भारत के आसमान में लगातार सक्रिय रहने के बाद अब मॉनसून की ‘ट्रफ लाइन’ (Monsoon Trough) उत्तर की ओर यानी हिमालय की तलहटी की तरफ खिसक रही है। इस भौगोलिक बदलाव के कारण देश के एक बड़े हिस्से में बारिश की गतिविधियां बेहद कमजोर पड़ जाएंगी।
इन राज्यों में कमजोर पड़ेगा मॉनसून: पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र का बड़ा हिस्सा और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक धूप और उमस का सामना करना पड़ सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 10 जुलाई से 15 जुलाई के बीच इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधि में भारी कमी आएगी। वर्तमान में बना हुआ कम दबाव का क्षेत्र अब धीरे-धीरे कमजोर होकर भारतीय भूभाग से दूर जा रहा है, जिसकी पुष्टि सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से भी होती है। सैटेलाइट इमेज साफ दिखा रही हैं कि देश के मुख्य मॉनसून बेल्ट वाले इलाकों में बादलों का घनत्व काफी घट गया है।
हिमाचल-उत्तराखंड समेत इन राज्यों में मंडराया आफत का साया
एक तरफ जहां देश के मैदानी और पश्चिमी हिस्सों में मानसून सुस्त पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ ट्रफ लाइन के उत्तर की ओर जाने से पहाड़ी और पूर्वी राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक निम्नलिखित राज्यों में मौसम का मिजाज बेहद आक्रामक हो सकता है:
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हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: पहाड़ी ढलानों पर ट्रफ लाइन के टिकने से बादल फटने और भूस्खलन (Landslide) का खतरा बढ़ गया है।
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पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार: इन इलाकों में मानसूनी हवाओं के टकराने से बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
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झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल: इन राज्यों में गरज-चमक के साथ झमाझम बारिश का दौर जारी रहेगा।
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पूर्वोत्तर राज्य (North-East India): असम और मेघालय समेत पूरे पूर्वोत्तर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
अल नीनो का साया: क्यों अनिश्चित बना हुआ है मौसम?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मॉनसून की ट्रफ लाइन दोबारा दक्षिण की ओर नहीं लौटती, तब तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के सूखे खेतों को पानी नसीब नहीं होगा। इस प्रक्रिया में कम से कम चार से पांच दिन या उससे अधिक का समय लग सकता है। बारिश में आने वाले इस लंबे गैप को मौसम वैज्ञानिक ‘अल नीनो’ (El Niño) के प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं।
सामान्य मॉनसून के विपरीत, जब प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियां सक्रिय होती हैं, तो मानसूनी हवाओं का पैटर्न टूट जाता है। इसके चलते पूरे सीजन में एक समान बारिश होने के बजाय मौसम में तीव्र उतार-चढ़ाव आते हैं। यानी कुछ दिन रिकॉर्ड तोड़ बारिश होती है, तो उसके तुरंत बाद एक लंबा सूखा स्पेल (Dry Spell) आ जाता है।
जुलाई के मध्य तक फिर बढ़ सकती है चिंता
कुल मिलाकर, भले ही हालिया मानसूनी बारिश ने देश के जलाशयों और भूमिगत जल को तात्कालिक जीवनदान दिया हो, लेकिन भविष्य की राह अब भी अनिश्चितताओं से भरी है। विशेषज्ञों की मानें तो जुलाई के मध्य तक बारिश की इस कमी के कारण कुल मौसमी बारिश का आंकड़ा एक बार फिर सामान्य से नीचे खिसक सकता है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम के इस बदलते मिजाज और कृषि विज्ञान केंद्र की चेतावनियों को ध्यान में रखकर ही सिंचाई और कीटनाशकों का प्रबंधन करें, क्योंकि आने वाले दिनों में भारत में मॉनसून की स्थिति देश के अलग-अलग हिस्सों में दो विपरीत रंग दिखाने वाली है।
