देहरादून, 10 जुलाई 2026। उत्तराखंड की राजधानी और पहाड़ों का द्वार कहे जाने वाले देहरादून शहर में दिन-प्रतिदिन बढ़ता वाहनों का दबाव और ट्रैफिक जाम अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। वीकेंड हो या वर्किंग डे, शहर के प्रमुख चौराहों पर रेंगते वाहन न सिर्फ लोगों का समय बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि हवा को भी जहरीली बना रहे हैं। इस गंभीर होती समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है।
देहरादून यातायात व्यवस्था को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ शहर की सबसे बड़ी पार्किंग समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस बैठक में मोबिलिटी प्लान के तहत तैयार की जा रही व्यापक कार्ययोजना पर गहन मंथन हुआ। बैठक में जिलाधिकारी का रुख बेहद कड़ा रहा और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब फाइलों से निकलकर योजनाओं को धरातल पर दिखने का समय आ गया है।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं: जंक्शनों और चौराहों के लिए बनेगा ‘माइक्रो लेवल प्लान’
बैठक के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने लोक निर्माण विभाग (PWD), नगर निगम और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी कि शहर के हर उस पॉइंट को चिन्हित किया जाए जहाँ सबसे ज्यादा जाम लगता है। उन्होंने निर्देश दिए कि देहरादून शहर में बढ़ते यातायात के दबाव को नियंत्रित करने के लिए हर एक चौराहे और जंक्शन के सुधारीकरण हेतु ‘माइक्रो लेवल प्लान’ (Micro Level Plan) तैयार किया जाए।
“यातायात प्रबंधन कोई एक विभाग का काम नहीं है। जब तक पुलिस, नगर निगम, एमडीडीए और लोनिवि आपस में बेहतर समन्वय (Coordination) के साथ काम नहीं करेंगे, तब तक शहर को जाम से मुक्ति नहीं मिल सकती। सभी विभाग आपसी तालमेल बिठाएं और योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करें।”
— डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी, देहरादून
लोनिवि के अधिकारियों को विशेष निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि प्रमुख चौराहों के सुधारीकरण के साथ-साथ उनके सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जाए। जंक्शन इम्प्रूवमेंट के तहत सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने, बॉटलनेक खत्म करने और यू-टर्न को वैज्ञानिक तरीके से डिजाइन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि देहरादून यातायात व्यवस्था को आधुनिक और जनसुविधा केंद्रित बनाया जा सके।
इंदिरा मार्केट पार्किंग की धीमी प्रगति पर भड़के डीएम, मांगी विस्तृत रिपोर्ट
देहरादून शहर की सबसे बड़ी कमजोरी यहां की पार्किंग समस्या है। लोग सड़कों के किनारे वाहन पार्क करने को मजबूर हैं, जिससे बची-कुची सड़कें भी संकरी हो जाती हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए इंदिरा मार्केट में लगभग 1050 वाहनों की क्षमता वाली एक विशाल मल्टीलेवल कार पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है।
जब बैठक में इस परियोजना की समीक्षा की गई, तो इसकी बेहद धीमी रफ्तार देखकर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी और असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में इस तरह की ढिलाई कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने एमडीडीए को निर्देश दिए कि वे तत्काल निर्माणकर्ता संस्था/फर्म के साथ एक आपातकालीन बैठक करें और कार्य की धीमी गति के कारणों के साथ एक विस्तृत प्रगति आख्या (Report) जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करें। उन्होंने साफ किया कि इस परियोजना में तेजी लाई जाए ताकि जनता को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
आढ़त बाजार का कायाकल्प और मंडी शिफ्टिंग पर विशेष फोकस
बैठक में शहर के सबसे व्यस्त और व्यापारिक केंद्र ‘आढ़त बाजार’ क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई। आढ़त बाजार में हर दिन लगने वाले जाम से व्यापारी और आम राहगीर दोनों त्रस्त हैं। जिलाधिकारी ने इस क्षेत्र में यातायात सुधार और सड़क सुधारीकरण के कार्यों को ‘टॉप प्रायोरिटी’ पर रखने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही, शहर के बीचों-बीच स्थित मंडी को बाहर शिफ्ट करने की प्रक्रिया (Mandi Shifting) की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि जब तक मंडी को पूरी तरह से शिफ्ट नहीं किया जाता और आढ़त बाजार की सड़कों को चौड़ा नहीं किया जाता, तब तक कोर सिटी एरिया को जाम से मुक्त करना मुश्किल होगा। इसके अलावा, परेड ग्राउंड पार्किंग और ऐतिहासिक श्री गुरु रामराय दरबार साहिब पार्किंग के बेहतर उपयोग और उनकी नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक फुलप्रूफ मैकेनिज्म विकसित करने के निर्देश दिए गए।
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP): प्रदूषण मुक्त यातायात पर जोर
इस बैठक का एक बेहद महत्वपूर्ण मानवीय और पर्यावरणीय पहलू ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ (NCAP) से जुड़ा रहा। जिलाधिकारी ने कहा कि यातायात का सीधा संबंध पर्यावरण और जनता की सेहत से है। गाड़ियों के घंटों जाम में फंसे रहने से निकलने वाला धुआं देहरादून की आबोहवा को खराब कर रहा है।
इस संबंध में उन्होंने पुलिस अधीक्षक (यातायात) और नगर निगम के अधिकारियों को संयुक्त रूप से एक ऐसी प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए, जिसमें ट्रैफिक मैनेजमेंट के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण और सार्वजनिक सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा गया हो। ई-व्हीकल्स को बढ़ावा देने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सुदृढ़ करने और नो-पार्किंग जोन में सख्त कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में मौजूद रहा प्रशासनिक अमला
शहर की सूरत और सीरत बदलने वाली इस महा-समीक्षा बैठक की संवेदनशीलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें जिले के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में पुलिस अधीक्षक (यातायात) जितेंद्र कुमार, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी (RTO) संदीप सैनी, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार सहित एमडीडीए, नगर निगम और लोनिवि के वरिष्ठ अभियंता व अधिकारी उपस्थित थे।
जिलाधिकारी की इस कड़क समीक्षा के बाद अब उम्मीद जगी है कि देहरादून की सड़कों पर रेंगने वाले ट्रैफिक से जल्द ही दूनवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी। अगर सभी विभागों ने समय रहते इस ‘माइक्रो लेवल प्लान’ को धरातल पर उतारा, तो देहरादून आने वाले समय में देश के सबसे व्यवस्थित और सुगम यातायात वाले शहरों में शुमार हो सकता है।
