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उत्तराखंड में बाल देखरेख संस्थाओं का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट, आंगनबाड़ियों में FRS से ही बंटेगा टेक होम राशन; मुख्य सचिव के कड़े निर्देश

उत्तराखंड सरकार ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रदेश के भीतर संचालित होने वाली सभी सरकारी और गैर-सरकारी (स्वैच्छिक) बाल देखरेख संस्थाओं (CCIs) का अब ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ कराया जाएगा। इसके साथ ही, राशन वितरण प्रणाली में होने वाली वित्तीय अनियमितताओं और धांधली को रोकने के लिए सरकार ने ‘टेक होम राशन’ (THR) के शत-प्रतिशत वितरण को फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के दायरे में लाने का फैसला किया है।

यह महत्वपूर्ण निर्णय मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। सचिवालय में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित केंद्रीय योजनाओं—मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण, मिशन वात्सल्य और मिशन शक्ति—की राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति की समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में मुख्य सचिव ने विभाग के कामकाज की गहन समीक्षा की और धरातल पर सुधार के लिए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।

थर्ड पार्टी ऑडिट से सुधरेगी बाल देखरेख संस्थाओं की स्थिति

बैठक में बच्चों के संरक्षण और उनकी देखभाल को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता साफ तौर पर दिखाई दी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निर्देश दिया कि राज्य में जितने भी राजकीय और स्वैच्छिक बाल देखरेख संस्थान चल रहे हैं, उनका निष्पक्ष बाहरी एजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट करवाया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से इन संस्थाओं में रह रहे बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं, सुरक्षा मानकों और फंड के सही इस्तेमाल का सटीक आकलन हो सकेगा। लंबे समय से सामाजिक संगठनों द्वारा इन केंद्रों की निगरानी और सुधार की मांग की जा रही थी, जिस पर अब सरकार ने अपनी मुहर लगा दी है।

मुख्य सचिव का स्पष्ट संदेश:

“बच्चों के भविष्य और उनके संरक्षण के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। थर्ड पार्टी ऑडिट के माध्यम से संस्थाओं की कमियों को उजागर कर उन्हें तुरंत दुरुस्त किया जाएगा।”

धांधली पर लगेगा लगाम: FRS से ही बंटेगा ‘टेक होम राशन’

उत्तराखंड में ‘टेक होम राशन’ के वितरण में पूर्व में सामने आईं गड़बड़ियों और धांधली की शिकायतों को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। वर्तमान में राज्य के सभी हिस्सों में राशन का वितरण पूरी तरह से फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के माध्यम से नहीं हो पा रहा है, जिससे लूपहोल्स बने हुए थे।

इस तकनीकी कमी को दूर करने के लिए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दोटूक शब्दों में निर्देश दिया कि भविष्य में टेक होम राशन का शत-प्रतिशत वितरण केवल FRS के तहत ही सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे और जरूरी उपकरणों की व्यवस्था को युद्ध स्तर पर जल्द से जल्द पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। डिजिटल सत्यापन अनिवार्य होने से अपात्रों के नाम कटेंगे और वास्तविक लाभार्थियों तक पोषण सामग्री पहुंच सकेगी।

आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली और पानी संकट होगा दूर, अलग से मिलेगा बजट

समीक्षा बैठक के दौरान एक चिंताजनक स्थिति यह भी सामने आई कि उत्तराखंड के कई उत्तराखंड आंगनबाड़ी केंद्र सुधार की राह में बुनियादी सुविधाओं का अभाव एक बड़ा रोड़ा बना हुआ है। राज्य में आज भी कई आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं, जहां न तो बिजली की कनेक्टिविटी है और न ही पीने के साफ पानी (पेजल) की सुचारू व्यवस्था। बुनियादी सुविधाओं की इस कमी के कारण आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को रोजमर्रा के कामकाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था और वे लगातार इन व्यवस्थाओं को मुकम्मल करने की मांग कर रही थीं।

मुख्य सचिव ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए विभागीय अधिकारियों को आदेश दिया कि:

  • बिजली और पानी से वंचित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की एक ब्लॉकवार और जिलावार सूची तैयार की जाए।

  • यह सूची तत्काल संबंधित ऊर्जा और पेयजल विभागों को उपलब्ध कराई जाए ताकि वहां तुरंत कनेक्शन दिए जा सकें।

  • यदि इन सुविधाओं को बहाल करने में कोई वित्तीय बाधा आती है, तो सरकार इसके लिए अलग से अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराएगी।

भवन विहीन केंद्रों के लिए पुराने पंचायत भवनों का होगा जीर्णोद्धार

उत्तराखंड के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में कई आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं, जिनके पास अपना कोई निजी सरकारी भवन नहीं है और वे किराए के कमरों या असुरक्षित स्थानों पर चल रहे हैं। इस समस्या के व्यावहारिक समाधान के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने एक नया मॉडल पेश किया है।

उन्होंने कहा कि जिन गांवों में नए और आधुनिक पंचायत भवनों का निर्माण हो चुका है और वहां पुराने पंचायत भवन खाली या अनुपयोगी पड़े हैं, उन्हें तुरंत आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थानांतरित कर दिया जाए। महिला एवं बाल विकास विभाग इन पुराने पंचायत भवनों की मरम्मत और जीर्णोद्धार कराकर इन्हें बच्चों के बैठने योग्य बनाएगा।

इसके अतिरिक्त, जो पंचायत भवन पूरी तरह से जर्जर और असुरक्षित हो चुके हैं, उन्हें तत्काल ध्वस्त (Demolish) करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उनकी जगह पर नए सिरे से सुरक्षित आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कराया जा सके। इससे बच्चों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और सरकारी संपत्तियों का सही पुनरुपयोग भी हो सकेगा।

बेहतर समन्वय के लिए नियमित होंगी जिला स्तरीय बैठकें

विभागीय योजनाओं की सुस्त रफ्तार और अंतर्विभागीय तालमेल की कमी पर चिंता जताते हुए मुख्य सचिव ने प्रशासनिक तंत्र को कसने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समितियों (District Level Inter-Departmental Coordination Committees) की बैठकें केवल कागजों पर या औपचारिकता के लिए न हों।

इन बैठकों को तय समय सीमा के भीतर और नियमित रूप से आयोजित किया जाना अनिवार्य है। मुख्य सचिव के अनुसार, जब तक स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिजली और बाल विकास विभाग एक साथ बैठकर जिला स्तर पर समन्वय स्थापित नहीं करेंगे, तब तक जमीनी समस्याओं का त्वरित निस्तारण संभव नहीं है।

एक नजर में बैठक के मुख्य फैसले (Table Summary)

क्र.सं. प्रमुख समस्या / क्षेत्र मुख्य सचिव द्वारा लिया गया निर्णय / निर्देश
1. बाल देखरेख संस्थाएं (CCIs) पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी ऑडिट
2. टेक होम राशन (THR) धांधली रोकने के लिए 100% फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) अनिवार्य।
3. बिजली और पेयजल संकट सभी केंद्रों की सूची बनाकर संबंधित विभागों को भेजने और विशेष बजट देने के निर्देश।
4. भवन विहीन केंद्र खाली पड़े पुराने पंचायत भवनों का जीर्णोद्धार कर उपयोग में लाना।
5. अंतर्विभागीय समन्वय समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु जिला स्तरीय नियमित बैठकें अनिवार्य।

निष्कर्ष: धरातल पर दिखेगा व्यापक बदलाव

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक से यह साफ है कि उत्तराखंड सरकार अब महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं की मॉनिटरिंग को लेकर बेहद सख्त है। उत्तराखंड आंगनबाड़ी केंद्र सुधार के तहत उठाए जा रहे ये कदम न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएंगे, बल्कि नौनिहालों और महिलाओं के पोषण व सुरक्षा स्तर को भी मजबूत करेंगे। अब दारोमदार विभाग के जमीनी अधिकारियों पर है कि वे मुख्य सचिव के इन कड़े निर्देशों को कितनी समयबद्धता के साथ धरातल पर लागू कर पाते हैं।

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