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भोपाल ट्विशा सुसाइड केस: CBI ने संभाली कमान, पति और सास के खिलाफ दहेज हत्या की FIR दर्ज, री-क्रिएट हुआ क्राइम सीन

The Hill India News
Last updated: May 26, 2026 3:21 am
The Hill India News
Published: May 26, 2026
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फ़ाइल फ़ोटो
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भोपाल/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित और संवेदनशील ट्विशा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने औपचारिक रूप से कमान संभाल ली है। घटना की गंभीरता और निष्पक्ष जांच की मांग को देखते हुए सीबीआई ने भोपाल के कटारा हिल्स थाने में दर्ज मूल मुकदमे को री-रजिस्टर (रिरजिस्टर्ड) कर अपनी एफआईआर दर्ज कर ली है। सोमवार, 25 मई 2026 को दर्ज की गई इस एफआईआर (नंबर: RC0522026S0004) के साथ ही देश की प्रीमियर जांच एजेंसी ने इस संदिग्ध आत्महत्या और कथित दहेज हत्या के मामले की परतें खंगालना शुरू कर दिया है।

Contents
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्जशादी के महज 5 महीने बाद ही संदिग्ध मौत: क्या है पूरा मामला?पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे: शरीर पर चोटों के निशानकेंद्र का नोटिफिकेशन और सीबीआई को मध्य प्रदेश में असीमित अधिकाररी-क्रिएट हुआ क्राइम सीन, गवाहों और डिजिटल साक्ष्यों पर टिकी जांच

इस हाई-प्रोफाइल भोपाल ट्विशा सुसाइड केस की कमान सीबीआई मुख्यालय दिल्ली में तैनात पुलिस अधीक्षक (SP) राजबीर सिंह के हाथों में सौंपी गई है, जबकि मामले की मुख्य जांच अधिकारी (IO) के रूप में पुलिस उपअधीक्षक (DSP) निशु कुशवाहा को नियुक्त किया गया है। सीबीआई की विशेष टीम ने भोपाल पहुंचते ही स्थानीय पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) के साथ मिलकर मुख्य आरोपी समर्थ सिंह के कटारा हिल्स स्थित आवास पर क्राइम सीन को री-क्रिएट किया है, ताकि 12 मई की रात हुए घटनाक्रम का वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाया जा सके।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज

सीबीआई ने इस मामले में नए आपराधिक कानूनों और पारंपरिक दहेज विरोधी अधिनियम के तहत बेहद सख्त रुख अपनाया है। एजेंसी द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं को शामिल किया गया है:

  • धारा 80(2): दहेज मृत्यु (Dowry Death) से संबंधित।

  • धारा 85: किसी महिला के पति या पति के रिश्तेदार द्वारा उसके साथ क्रूरता करना।

  • धारा 3(5): संयुक्त जवाबदेही या सामान्य इरादे (Common Intention) के तहत किए गए अपराध।

  • दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4: दहेज लेने, देने या उसकी मांग करने के खिलाफ कानूनी दंडात्मक प्रावधान।

सीबीआई अब इस मामले में न केवल आत्महत्या के उकसावे, बल्कि सुनियोजित दहेज हत्या, शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना, आपराधिक साजिश और जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य संभावित संगीन अपराधों की विस्तृत पड़ताल करेगी।

शादी के महज 5 महीने बाद ही संदिग्ध मौत: क्या है पूरा मामला?

यह पूरा दर्दनाक मामला भोपाल के वीआईपी और सुरक्षित माने जाने वाले कटारा हिल्स इलाके का है। मूल शिकायतों और एफआईआर के विवरण के अनुसार, मृतका ट्विशा का विवाह 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह के साथ बेहद अरमानों के साथ हुआ था। लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ही खुशियां प्रताड़ना में बदल गईं। आरोप है कि शादी के तुरंत बाद से ही ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर ट्विशा को प्रताड़ित किया जाने लगा।

मृतका के मायके पक्ष का आरोप है कि समर्थ और उसकी मां गिरीबाला सिंह द्वारा ट्विशा पर लगातार ₹2 लाख की अतिरिक्त नगद राशि मायके से लाने का दबाव बनाया जा रहा था। इस मांग को पूरा न करने पर उसे गंभीर मानसिक अवसाद और शारीरिक यातनाओं से गुजरना पड़ रहा था। अंततः 12 मई 2026 की रात करीब 10:20 बजे पुलिस को सूचना मिली कि ट्विशा ने अपने घर में संदिग्ध परिस्थितियों में दम तोड़ दिया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे: शरीर पर चोटों के निशान

स्थानीय पुलिस और शुरुआती फॉरेंसिक व मेडिकल जांच ने इस मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। ट्विशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण “एंटेमॉर्टम हैंगिंग” यानी जीवित अवस्था में फांसी लगने की बात सामने आई है। हालांकि, चौकाने वाली बात यह है कि डॉक्टरों को मृतका के शरीर के अन्य हिस्सों पर भी गहरे जख्म और चोटों के निशान मिले हैं।

फॉरेंसिक विशेषज्ञों का प्रारंभिक मत है कि ये चोटें किसी भारी वस्तु के प्रहार या मौत से ठीक पहले की गई बर्बर मारपीट के कारण आई हो सकती हैं। इसी बिंदु ने आत्महत्या के दावों को संदिग्ध बना दिया है और मायके पक्ष के उन दावों को मजबूती दी है जिसमें वे इसे सीधे तौर पर हत्या का मामला बता रहे हैं। सीबीआई अब डॉक्टरों के पैनल से इस शॉर्ट और डिटेल्ड पीएम रिपोर्ट पर दोबारा राय (Second Opinion) लेने की तैयारी में है।

केंद्र का नोटिफिकेशन और सीबीआई को मध्य प्रदेश में असीमित अधिकार

मामले की संवेदनशीलता, स्थानीय स्तर पर रसूख के प्रभाव की आशंका और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक उपजे जनाक्रोश को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इस केस को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की सिफारिश की थी। राज्य सरकार ने ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम’ (DSPE Act) की धारा 6 के तहत अपनी वैधानिक सहमति दी।

इसके तुरंत बाद, केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 25 मई 2026 को एक विशेष नोटिफिकेशन जारी किया। इस अधिसूचना के तहत सीबीआई को इस भोपाल ट्विशा सुसाइड केस के सिलसिले में पूरे मध्य प्रदेश राज्य के भीतर कहीं भी छापेमारी करने, दस्तावेज जब्त करने और किसी भी संदिग्ध को गिरफ्तार करने का पूर्ण व अबाधित अधिकार दे दिया गया है।

री-क्रिएट हुआ क्राइम सीन, गवाहों और डिजिटल साक्ष्यों पर टिकी जांच

भोपाल पहुंचते ही सीबीआई की विशेष टीम ने कटारा हिल्स स्थित HIG-311, बाग मुगलिया एक्सटेंशन वाले फ्लैट को अपने कब्जे में ले लिया, जहां आरोपी समर्थ सिंह और उसकी मां गिरीबाला सिंह रहते हैं। सूत्रों के अनुसार, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के विशेषज्ञों और डमी (पुतले) की मदद से उस रात के पूरे घटनाक्रम को दोबारा दोहराया गया ताकि पंखे से लटकने की ऊंचाई, चोटों के कोण (Angle of Injuries) और भौतिक संभावनाओं की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

सीबीआई की टीम अब मृतका और आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), व्हाट्सएप चैट्स और सोशल मीडिया एक्टिविटी को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना वाली रात या उससे पहले दोनों पक्षों के बीच क्या बातचीत हुई थी। राष्ट्रीय स्तर के कानूनी जानकारों का मानना है कि इस मामले में डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक रिपोर्ट ही आरोपियों को सजा दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे।

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