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इबोला का वैश्विक खतरा: भारत सरकार हाई अलर्ट पर, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संभाली कमान, सीमाओं पर सख्त स्क्रीनिंग के निर्देश

नई दिल्ली। दुनिया भर में पैर पसार रहे घातक इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह सतर्क मोड में आ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक (High-Level Meeting) कर देश की तैयारियों का व्यापक स्तर पर आकलन किया। केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर राहत की खबर देते हुए स्पष्ट किया है कि भारत में अब तक इबोला वायरस संक्रमण का कोई भी संदिग्ध या पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद, सरकार किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है और देश की सीमाओं से लेकर चिकित्सा अनुसंधान केंद्रों तक निगरानी प्रणाली को चाक-चौबंद कर दिया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला के मौजूदा प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद से ही वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। इसी गंभीरता को भांपते हुए भारत ने अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा दीवार को मजबूत करना शुरू कर दिया है ताकि देश के भीतर इस वायरस के प्रवेश को हर हाल में रोका जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री की हाई लेवल मीटिंग: तैयारियों का जमीनी आकलन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंत्रालय के शीर्ष नीति निर्माताओं, संक्रामक रोग विशेषज्ञों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इबोला वायरस को लेकर देश के भीतर बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे, जांच किट्स की उपलब्धता और आपातकालीन सुरक्षात्मक उपायों की समीक्षा करना था।

स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को दोटूक शब्दों में निर्देश दिया कि वैश्विक स्तर पर मंडरा रहे इस खतरे के बीच देश की बचाव और रोकथाम रणनीति (Containment Strategy) शत-प्रतिशत प्रभावी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संक्रामक रोगों के प्रबंधन में थोड़ी सी भी चूक भारी पड़ सकती है, इसलिए विभाग को कागजी दावों से इतर जमीनी स्तर पर अपनी मुस्तैदी दिखानी होगी। मंत्री के कड़े रुख के बाद, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने भी विभिन्न संबंधित मंत्रालयों, नागरिक उड्डयन विभाग, आव्रजन (Immigration) और सीमा सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के साथ एक संयुक्त समन्वय बैठक की अध्यक्षता की, ताकि अंतर-विभागीय तालमेल को और सुदृढ़ किया जा सके।

हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर ‘थ्री-लेयर’ स्क्रीनिंग का चक्रव्यूह

भारत को इबोला से सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने देश के सभी प्रवेश द्वारों (Points of Entry) पर सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि देश भर के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, प्रमुख और लघु बंदरगाहों (Seaports) तथा भूमि सीमा चौकियों (Land Borders) पर इबोला स्क्रीनिंग व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से अति-सतर्क और मजबूत किया जाए।

विशेष रूप से उन देशों से आने वाले यात्रियों पर पैनी नजर रखी जा रही है, जहां इबोला का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। संदिग्ध लक्षण वाले यात्रियों को हवाई अड्डे पर ही आइसोलेट करने और उन्हें विशेष एम्बुलेंस के जरिए नोडल अस्पतालों में स्थानांतरित करने के लिए ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) जारी कर दिया गया है।

ICMR और NCDC को मिले कड़े निर्देश: जांच प्रणाली हो अपग्रेड

इबोला वायरस की शुरुआती दौर में ही पहचान करने और इसके प्रसार को रोकने के लिए देश की दो सबसे बड़ी चिकित्सा अनुसंधान संस्थाओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) को निर्देश दिया है कि वायरस का पता लगाने, जीनोम सीक्वेंसिंग करने और संदिग्धों की निगरानी रखने के लिए आवश्यक सभी प्रयोगशाला व्यवस्थाएं हाई अलर्ट पर रहें।

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इबोला के लक्षण काफी हद तक सामान्य बुखार या अन्य वायरल बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे शुरुआती स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में इबोला वायरस संक्रमण की त्वरित और सटीक जांच (Rapid Diagnostic Testing) ही सबसे बड़ा हथियार है। ICMR को देश की प्रमुख प्रयोगशालाओं (जैसे पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी – NIV) में पर्याप्त मात्रा में टेस्टिंग किट्स, पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) और नैदानिक संसाधन आरक्षित रखने के लिए कहा गया है।

वैश्विक आपातकाल: WHO और अफ्रीका महाद्वीप में मची खलबली

इबोला को लेकर भारत की यह अभूतपूर्व सक्रियता अकारण नहीं है। दरअसल, ‘अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (Africa CDC) ने महाद्वीप के कई देशों में इबोला के अनियंत्रित होते मामलों को देखते हुए इसे ‘महाद्वीपीय सुरक्षा के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया है। इसके तुरंत बाद वैश्विक स्वास्थ्य प्रहरी ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) ने भी इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया।

इबोला वायरस एक बेहद जानलेवा संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित पशुओं (जैसे चमगादड़ या बंदर) के जरिए इंसानों में फैलती है और फिर इंसानों से इंसानों के बीच शारीरिक तरल पदार्थों (Blood, Saliva, Sweat) के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। इस बीमारी में मृत्यु दर (Mortality Rate) बेहद उच्च होती है, जो 50% से लेकर 90% तक जा सकती है। यही कारण है कि दुनिया का कोई भी देश इस वायरस को लेकर जरा सी भी लापरवाही बरतने का जोखिम नहीं उठा सकता।

भारत की रणनीति: त्वरित पहचान, त्वरित अलगाव और कड़ा समन्वय

स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में पूरा ध्यान ‘अर्ली डिटेक्शन एंड रैपिड रिस्पांस’ (जल्दी पहचान और त्वरित कार्रवाई) पर है। खुफिया और निगरानी एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग की व्यवस्था की गई है। यदि किसी भी प्रवेश बिंदु पर कोई संदिग्ध यात्री पाया जाता है, तो उसकी ट्रैवल हिस्ट्री और सह-यात्रियों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के लिए डिजिटल सिस्टम को सक्रिय कर दिया जाएगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी जिला स्तर पर अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने और स्वास्थ्य कर्मियों को इबोला सुरक्षा प्रोटोकॉल के प्रति संवेदनशील बनाने की सलाह दी है। हालांकि, सरकार ने देश के नागरिकों से पैनिक न होने की अपील की है और साफ किया है कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।

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