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हरिद्वार में गंगा दशहरा के मौके पर उमड़ा आस्था का महासैलाब, ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष से गुंजायमान हुईं सभी दिशाएं

The Hill India News
Last updated: May 25, 2026 2:50 am
The Hill India News
Published: May 25, 2026
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हरिद्वार / देहरादून: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पावन दशमी तिथि यानी ‘गंगा दशहरा’ के पावन अवसर पर आज तीर्थनगरी हरिद्वार में श्रद्धा, भक्ति और अध्यात्म का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है। देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं के जनसैलाब ने पूरी धर्मनगरी को मां गंगा के जयकारों से सराबोर कर दिया है। ब्रह्ममुहूर्त (तड़के सुबह) से ही विश्व प्रसिद्ध हर की पौड़ी, मालवीय घाट, सुभाष घाट सहित हरिद्वार के तमाम छोटे-बड़े घाटों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची है।

Contents
ब्रह्ममुहूर्त से ही घाटों पर कतारें: अलौकिक रहा सुबह का नजाराधार्मिक महत्व: 10 प्रकार के पापों से मुक्ति देता है यह महास्नानसुरक्षा के कड़े इंतजाम: 11 जोन और 27 सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्रयातायात व्यवस्था दुरुस्त: हाईवे पर भारी वाहनों की नो-एंट्री, रूट डायवर्जन लागूव्यापारियों के चेहरे खिले, धर्मनगरी की आर्थिकी को मिला बल

इस वर्ष हरिद्वार में गंगा दशहरा पर श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड तोड़ आमद दर्ज की जा रही है। चारों ओर केवल रंग-बिरंगे परिधानों में सजे भक्त, हाथ में पूजा की थाली और हवा में गूंजता “हर-हर गंगे, जय मां गंगे” का महाघोष सुनाई दे रहा है। कड़कती धूप और उमस पर भक्तों की आस्था पूरी तरह भारी नजर आ रही है।

ब्रह्ममुहूर्त से ही घाटों पर कतारें: अलौकिक रहा सुबह का नजारा

गंगा दशहरा पर्व के चलते रविवार मध्यरात्रि से ही हरिद्वार के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। सुबह करीब 3:00 बजे से ही हर की पौड़ी के ब्रह्मकुंड पर मुख्य स्नान प्रारंभ हो गया। शीतल और निर्मल गंगा जल में डुबकी लगाते ही श्रद्धालुओं के चेहरे की थकान मानो कपूर की तरह उड़ गई।

मां गंगा के पावन जल में स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने घाटों पर ही पंडित-पुरोहितों के सानिध्य में विधि-विधान से मां गंगा का पूजन किया, दीपदान किया और अपने परिवार की सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना की। न केवल बुजुर्ग और युवा, बल्कि छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं भी इस पावन स्नान का पुण्य लाभ उठाने के लिए भारी उत्साह के साथ घाटों पर डटे रहे।

धार्मिक महत्व: 10 प्रकार के पापों से मुक्ति देता है यह महास्नान

सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति में गंगा दशहरा पर्व का एक अत्यंत विशिष्ट और पौराणिक महत्व है। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • भगीरथ की तपस्या का फल: आज ही के दिन सूर्यवंश के राजा भगीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा, स्वर्गलोक से शिव जी की जटाओं में समाते हुए पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। पृथ्वी वासियों के उद्धार के लिए आज के दिन को ‘मां गंगा का अवतरण दिवस’ भी कहा जाता है।

  • दशविध पापों का नाश: संस्कृत में ‘दशहरा’ का अर्थ होता है दस पापों को हरने वाला। मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर गंगा नदी में स्नान, ध्यान और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करने से मनुष्य के कायिक (शारीरिक), वाचिक (वाणी द्वारा) और मानसिक, ऐसे कुल 10 प्रकार के पापों का स्वतः ही शमन हो जाता है। यही कारण है कि इस मोक्षदायिनी तिथि पर हरिद्वार में गंगा दशहरा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: 11 जोन और 27 सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्र

श्रद्धालुओं की इस अभूतपूर्व और विशाल भीड़ को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। किसी भी अप्रिय घटना या भगदड़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को एक किले में तब्दील कर दिया गया है।

प्रशासनिक व्यवस्थाओं के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. सुरक्षा वर्गीकरण: संपूर्ण मेला क्षेत्र को सुरक्षा के लिहाज से 11 सुपर जोन और 27 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। हर एक जोन और सेक्टर में मजिस्ट्रेट रैंक के अधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

  2. सीसीटीवी और ड्रोन से नजर: चप्पे-चप्पे पर खुफिया तंत्र सक्रिय है। हर की पौड़ी और उसके आस-पास के संवेदनशील घाटों की निगरानी आधुनिक सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम से की जा रही है।

  3. जल पुलिस की मुस्तैदी: गंगा की तेज धाराओं के बीच किसी भी अप्रिय हादसे को रोकने के लिए ‘जल पुलिस’ और गोताखोरों की टीमें मोटर बोट के साथ लगातार घाटों के समानांतर गश्त कर रही हैं।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर स्वयं सुबह से ही हर की पौड़ी, कांगड़ा घाट और रोड़ी बेलवाला जैसे प्रमुख स्थलों पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए हैं कि वे देश भर से आए श्रद्धालुओं के साथ अत्यंत विनम्रता और संवेदनशीलता से पेश आएं।

यातायात व्यवस्था दुरुस्त: हाईवे पर भारी वाहनों की नो-एंट्री, रूट डायवर्जन लागू

लाखों वाहनों के हरिद्वार में प्रवेश के कारण शहर की आंतरिक यातायात व्यवस्था ध्वस्त न हो, इसके लिए यातायात पुलिस (Traffic Police) ने एक व्यापक ‘रूट डायवर्जन प्लान’ लागू किया है। दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर और पंजाब-हरियाणा की तरफ से आने वाले वाहनों के लिए शहर के बाहरी इलाकों में ही विशाल पार्किंग स्थल (जैसे बैरागी कैंप और अलकनंदा पार्किंग) बनाए गए हैं, जहां से श्रद्धालु पैदल या शटल सेवा के जरिए घाटों तक पहुंच रहे हैं।

इसके साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए भारी कमर्शियल वाहनों (जैसे ट्रक और डंपर) के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने जगह-जगह पेयजल, मोबाइल टॉयलेट और चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था की है ताकि भीषण गर्मी के इस मौसम में यात्रियों को किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या का सामना न करना पड़े।

व्यापारियों के चेहरे खिले, धर्मनगरी की आर्थिकी को मिला बल

हरिद्वार में गंगा दशहरा पर उमड़े इस जनसैलाब से स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों, धर्मशाला प्रबंधकों और रेहड़ी-पटरी वालों के चेहरे खिल उठे हैं। पिछले कुछ दिनों से सुस्त पड़े बाजार में अचानक आई इस तेजी से धर्मनगरी की आर्थिकी को एक बड़ा उछाल मिला है। हर की पौड़ी के आसपास के सभी होटल और लॉज शत-प्रतिशत बुक हैं। पूजा सामग्री, गंगाजली (कैन), पीतल के बर्तन और हस्तशिल्प की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ देखी जा रही है।

गंगा दशहरा का यह पावन स्नान पर्व देश की अखंडता और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण पेश कर रहा है, जहां भाषा और प्रांत की सीमाओं को भुलाकर पूरा देश मां गंगा की लहरों के बीच एक सूत्र में बंधा नजर आ रहा है।

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