सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन की कार्रवाई के बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। मस्जिद के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, वहीं किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और आरआरएफ की तैनाती की गई है। प्रशासन की ओर से लोगों की आवाजाही पर भी निगरानी रखी जा रही है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब कैराना लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर पहुंचकर मौके का जायजा लेने के लिए रवाना होने वाली थीं। बताया गया कि पुलिस ने उन्हें उनके आवास से बाहर निकलने से रोक दिया। इसके बाद उनके आवास के बाहर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। इकरा हसन का कहना था कि वह सहारनपुर जाकर पूरे मामले की जानकारी लेना चाहती थीं और मौके की स्थिति को समझना चाहती थीं। हालांकि, कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने से रोक दिया गया।
कलेक्ट्रेट परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रशासनिक कार्रवाई को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। एहतियात के तौर पर कलेक्ट्रेट परिसर के गेट बंद कर दिए गए और आम लोगों की आवाजाही को सीमित कर दिया गया। परिसर के आसपास भी पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
मौके पर वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पीएसी और आरआरएफ के जवानों को भी तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। जिला मुख्यालय की ओर आने वाले रास्तों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
क्या है कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद का विवाद?
कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन की ओर से मस्जिद को अवैध निर्माण बताते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से पिछले महीने मस्जिद को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश दिया गया था। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इस आदेश को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी।
मामले में न्यायालय की कार्यवाही के दौरान अलग-अलग स्तर पर आदेश जारी हुए। मुस्लिम पक्ष की ओर से प्रशासनिक आदेश के खिलाफ राहत की मांग की गई थी। शुरुआती स्तर पर न्यायालय से आदेश पर रोक मिलने की बात सामने आई थी। हालांकि, बाद की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष की ओर से किए गए दावे को खारिज किए जाने के बाद प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।
इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने पुलिस बल के साथ कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर मस्जिद को लेकर कार्रवाई की। परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया और मस्जिद के गेट पर ताला लगाए जाने की जानकारी सामने आई। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में एहतियाती व्यवस्था लागू कर दी।
इकरा हसन के पहुंचने से पहले ही बढ़ी हलचल
मामले की जानकारी सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं की सक्रियता भी बढ़ गई। कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर जाकर स्थिति का जायजा लेने की तैयारी की। लेकिन उनके रवाना होने से पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उनके आवास के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए।
इस घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने की संभावना बढ़ गई है। इससे पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद भी कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद से जुड़े मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं।
प्रशासन का फोकस कानून-व्यवस्था पर
प्रशासन की ओर से लगातार यह स्पष्ट किया जा रहा है कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकना और क्षेत्र में शांति बनाए रखना है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।
कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास पुलिस की मौजूदगी बढ़ने के साथ ही संवेदनशील इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार हालात की समीक्षा की जा रही है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फैलने वाली सूचनाओं पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी अफवाह के कारण माहौल खराब न हो।
पश्चिमी यूपी में सियासत गरमाने के आसार
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद से जुड़ी कार्रवाई ने प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक बहस को भी जन्म दे दिया है। एक तरफ प्रशासन न्यायालय और अपने आदेशों के आधार पर कार्रवाई की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्षी नेता इस मामले को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल सहारनपुर में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। कलेक्ट्रेट परिसर में आम आवाजाही प्रतिबंधित है और भारी पुलिस बल की मौजूदगी बनी हुई है। अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। आने वाले समय में इस मामले पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं और न्यायिक स्तर पर होने वाली आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल प्रशासन का पूरा जोर शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है। सहारनपुर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल को अलर्ट रखा गया है, ताकि किसी भी स्थिति से तत्काल निपटा जा सके। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी बढ़ने के साथ अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
