देहरादून। आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के छात्रों के समर्थन में कांग्रेस द्वारा किए गए मुख्यमंत्री आवास घेराव के बाद अब मामला राजनीतिक रूप से और गरमा गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आंदोलन में शामिल कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें पुलिस कार्रवाई के जरिए परेशान किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि आंदोलन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के वाहनों को भी चिन्हित कर जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर परवादून कांग्रेस ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने की चेतावनी दी है।
परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आवास घेराव के बाद से कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लगातार पुलिस कार्रवाई की जा रही है। उनके मुताबिक, कैंट कोतवाली और डोईवाला कोतवाली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के दबाव में पुलिस आंदोलन में शामिल लोगों को निशाना बना रही है और विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
मोहित उनियाल ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता मुकदमों और पुलिस कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर कांग्रेस पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर कांग्रेस ने लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाई थी और मुख्यमंत्री आवास का घेराव भी इसी आंदोलन का हिस्सा था।
इसी बीच कांग्रेस की ओर से एक और गंभीर आरोप लगाया गया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, मुख्यमंत्री आवास घेराव में शामिल वाहनों को भी पुलिस द्वारा चिन्हित किया जा रहा है। मोहित उनियाल ने आरोप लगाया कि डालनवाला पुलिस ने परवादून अनुसूचित जाति विभाग के जिलाध्यक्ष मुकेश प्रसाद के वाहन को खत्ता, डोईवाला से रोककर जब्त कर लिया। कांग्रेस का दावा है कि वाहन जब्त किए जाने से पहले मुकेश प्रसाद को किसी तरह का नोटिस नहीं दिया गया था।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, पुलिस अधिकारियों को रोककर वाहन को लेकर उन्हें परवादून कांग्रेस कार्यालय लाया गया, जहां मुकेश प्रसाद को नोटिस दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति या वाहन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आवश्यक थी तो संबंधित व्यक्ति को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले सूचना या नोटिस दिया जाना चाहिए था।
मोहित उनियाल ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई का कारण पूछा और नोटिस दिए जाने के संबंध में जानकारी मांगी, तो अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर “ऊपर से दबाव” होने की बात कही गई। इस बयान के बाद कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई को लेकर और गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने सवाल उठाया कि अगर पूरी कार्रवाई कानून के तहत की जा रही है तो निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल या संगठन को अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने का अधिकार है। यदि आंदोलन के दौरान किसी प्रकार का कानून का उल्लंघन हुआ है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर परेशान करना और वाहनों को जब्त करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता डरने और दबने वाले नहीं हैं। पार्टी छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दे पर मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है। मोहित उनियाल ने कहा कि मुकदमों और पुलिस कार्रवाई के माध्यम से कांग्रेस की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया तो पार्टी इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद परवादून कांग्रेस कार्यालय, डोईवाला में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी देखने को मिली। डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव सिंह, डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष करतार नेगी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज नौटियाल, डोईवाला गुरुद्वारा सिंह सभा अध्यक्ष गुरदीप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि ताजिंदर सिंह ताज, बीडीसी सदस्य इंद्रजीत सिंह, मंडलम अध्यक्ष तेजपाल सिंह मोंटी, बलबीर सिंह, राहुल सैनी, शार्दूल नेगी, राहुल आर्य, विवेक सैनी और स्वतंत्र बिष्ट सहित कई नेता कांग्रेस कार्यालय पहुंचे। नेताओं ने कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर रोष जताया और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आंदोलन के बाद जिस तरह से मुकदमे और वाहनों की जब्ती की कार्रवाई सामने आ रही है, उससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि कार्रवाई का सिलसिला नहीं रुका तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
मोहित उनियाल ने शासन-प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कथित रूप से परेशान करने, वाहनों की जब्ती और पुलिस कार्रवाई का सिलसिला बंद नहीं हुआ तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो परवादून कांग्रेस की ओर से बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए शासन-प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार होगा।
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक दबाव में छोड़ने वाली नहीं है। पार्टी का कहना है कि छात्रों के भविष्य और न्याय की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगी। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, सरकार को आंदोलनकारियों की आवाज सुननी चाहिए और यदि किसी मामले में शिकायत या कानूनी उल्लंघन है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
फिलहाल मुख्यमंत्री आवास घेराव के बाद सामने आए मुकदमों और वाहन जब्ती के आरोपों ने उत्तराखंड की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने इसे कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने का प्रयास बताया है, जबकि पुलिस की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक पक्ष का इंतजार है। आने वाले दिनों में यदि कांग्रेस अपने ऐलान के मुताबिक बड़ा आंदोलन करती है, तो यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।
मोहित उनियाल ने दोहराया कि कांग्रेस अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी और मुकदमों या दबाव की राजनीति से कार्यकर्ताओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस मामले पर क्या कदम उठाता है और कांग्रेस की चेतावनी के बाद आने वाले दिनों में आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
