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उत्तर प्रदेश: वाराणसी में एटीएस की बड़ी कार्रवाई, टेरर फंडिंग की आशंका में डॉक्टर के घर छापा, 6 घंटे तक चली पूछताछ

वाराणसी में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की टीम ने टेरर फंडिंग की आशंका के चलते आदमपुर थाना क्षेत्र के पठानी टोला इलाके में एक डॉक्टर के घर पर छापेमारी की। इस कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और जांच के दायरे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई करीब 6 घंटे तक चली, जिसमें संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े डिजिटल उपकरणों की गहन जांच की गई। छापेमारी के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और क्षेत्रीय पुलिस के अधिकारी भी मौजूद रहे, जिससे इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बताया जा रहा है कि इस मामले की शुरुआत डॉक्टर के 18 वर्षीय बेटे से जुड़े एक संदिग्ध व्हाट्सएप चैट से हुई। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि छात्र की बातचीत कथित तौर पर कश्मीर से जुड़े एक संदिग्ध हैंडल से हो रही थी। इसी सूचना के आधार पर मुंबई एटीएस ने वाराणसी एटीएस यूनिट के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की।

छात्र, जो फिलहाल नीट (NEET) परीक्षा की तैयारी कर रहा है, से भी पूछताछ की गई। जांच एजेंसियों ने उससे बातचीत के दौरान कई अहम सवाल किए और उसके डिजिटल कम्युनिकेशन का विश्लेषण किया। अधिकारियों ने उसके मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को खंगाला, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी प्रकार की संदिग्ध फंडिंग या आतंकी गतिविधियों से जुड़ा कोई लिंक तो नहीं है।

छापेमारी के दौरान डॉक्टर के घर से लैपटॉप, मोबाइल फोन और प्रिंटर सहित कई उपकरणों की जांच की गई। साथ ही घर के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ की गई और उनके फोन की डिटेल्स भी खंगाली गईं। हालांकि, अभी तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में अचानक भारी पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी से अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। हालांकि, अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित रखते हुए पूरे ऑपरेशन को शांतिपूर्वक अंजाम दिया।

सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह मामला केवल संदिग्ध ऑनलाइन बातचीत तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। टेरर फंडिंग जैसे मामलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ने के कारण एजेंसियां अब ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से ले रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए युवाओं को किस तरह से प्रभावित किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को भी इस दिशा में सतर्क रहने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

फिलहाल, एटीएस और अन्य एजेंसियां इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस जांच से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

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