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उत्तर प्रदेशक्राइमफीचर्ड

उत्तर प्रदेश: 100 रुपये के पाइप विवाद ने ली जान, पिता-पुत्र समेत तीन को उम्रकैद की सजा

The Hill India News
Last updated: April 15, 2026 4:23 am
The Hill India News
Published: April 15, 2026
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आगरा से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां महज 100 रुपये के एक पानी के पाइप को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद एक व्यक्ति की जान का कारण बन गया। इस सनसनीखेज हत्याकांड में अब करीब चार साल बाद अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों—पिता, पुत्र और उनके सहयोगी—को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने तीनों पर कुल 3 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

Contents
कैसे हुआ विवाद और हत्याअदालत में सुनवाई और गवाहों की भूमिकान्यायाधीश की महत्वपूर्ण टिप्पणीपरिवार को मिला न्यायसमाज के लिए सबक

यह मामला आगरा के खंदौली थाना क्षेत्र का है, जहां 12 जनवरी 2020 को एक साधारण-सी घटना ने हिंसक रूप ले लिया था। उस दिन गढ़ी राठौर गांव के निवासी अमन कुमार और उनके भाई अंकित कार से सादाबाद जा रहे थे। रास्ते में गढ़ी महाराजा गांव के पास उनकी कार का पहिया सड़क पर पड़े पानी के पाइप के ऊपर से गुजर गया, जिससे पाइप फट गया। यही घटना आगे चलकर एक बड़े विवाद और फिर हत्या में बदल गई।

कैसे हुआ विवाद और हत्या

पाइप फटने के बाद अमन और अंकित कार रोककर स्थिति देखने लगे। तभी मौके पर गढ़ी महाराजा गांव के निवासी प्रवीण परमार, उसके पिता राकेश और नरहरा निवासी लवकुश समेत अन्य लोग पहुंच गए। पाइप फटने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो जल्द ही गाली-गलौज में बदल गई।

मामला तब और बिगड़ गया जब आरोपियों ने अमन और अंकित को घेर लिया। आरोप है कि राकेश और लवकुश ने अंकित को पकड़ लिया, जबकि प्रवीण परमार ने बेहद नजदीक से उसके सीने में गोली मार दी। गोली लगते ही अंकित जमीन पर गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया।

घटना के बाद अमन कुमार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।

अदालत में सुनवाई और गवाहों की भूमिका

इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में हुई, जहां नितिन कुमार ठाकुर (एडीजे-17) ने पूरे मामले की सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी सत्यप्रकाश धाकड़ ने मजबूत पैरवी की।

सुनवाई के दौरान वादी अमन कुमार, विवेचक, डॉक्टर सहित कुल 10 गवाहों को अदालत में पेश किया गया। इनमें सबसे अहम गवाही अमन कुमार की रही, जो इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी थे। उन्होंने अदालत के सामने पूरी घटना का विस्तार से वर्णन किया और बताया कि किस तरह उनके सामने उनके भाई की गोली मारकर हत्या की गई।

हालांकि मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य (एफएसएल रिपोर्ट) भी पेश की गई, लेकिन उसमें कुछ अस्पष्टताएं थीं। इसके बावजूद अदालत ने प्रत्यक्षदर्शी की गवाही को अधिक विश्वसनीय माना।

न्यायाधीश की महत्वपूर्ण टिप्पणी

फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जो इस मामले की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हुई। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रत्यक्षदर्शी का बयान स्पष्ट, सुसंगत और विश्वसनीय है, तो वैज्ञानिक साक्ष्यों में मौजूद तकनीकी कमियां उस गवाही को कमजोर नहीं कर सकतीं।

यह टिप्पणी न्याय व्यवस्था में प्रत्यक्षदर्शी गवाही की अहमियत को दर्शाती है। अदालत ने माना कि अमन कुमार की गवाही पूरी तरह विश्वसनीय है और उसी के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई गई।

परिवार को मिला न्याय

फैसले के बाद मृतक अंकित के परिवार ने राहत की सांस ली। वादी देवकी नंदन ने कहा कि उन्हें पहले आशंका थी कि वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमजोरी के कारण दोषियों को सजा मिलना मुश्किल हो सकता है। लेकिन अदालत ने गवाहों की गवाही को प्राथमिकता देकर न्याय सुनिश्चित किया।

यह मामला समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी देता है कि छोटे-छोटे विवाद किस तरह बड़ी त्रासदी में बदल सकते हैं। एक मामूली पाइप के फटने को लेकर शुरू हुआ विवाद एक परिवार के लिए जीवनभर का दुख बन गया।

समाज के लिए सबक

यह घटना दर्शाती है कि गुस्से और आवेश में लिया गया एक गलत फैसला न केवल किसी की जान ले सकता है, बल्कि कई जिंदगियों को बर्बाद कर सकता है। साथ ही यह मामला यह भी सिखाता है कि न्याय व्यवस्था में सच्चाई और ठोस गवाही की कितनी अहम भूमिका होती है।

आगरा की यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि सामाजिक व्यवहार पर भी सवाल खड़े करती है। जरूरत है कि लोग छोटी-छोटी बातों पर हिंसा का सहारा लेने के बजाय समझदारी और संयम से काम लें, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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