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मदरसों के आधुनिकीकरण की ओर उत्तराखंड: अब राज्य शिक्षा बोर्ड से जुड़ेंगे मदरसे, मुफ्ती शमून कासमी ने बताया ‘नई शिक्षा’ का रोडमैप

मसूरी/देहरादून: उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा के ढांचे को पूरी तरह बदलने और मुस्लिम समाज के गरीब बच्चों को आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने मसूरी दौरे के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य के मदरसों को अब उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड के साथ एकीकृत करने की पहल की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मदरसों में पढ़ने वाले छात्र भी समान रूप से प्रतिस्पर्धा कर सकें और उन्हें मान्यता प्राप्त डिग्री प्राप्त हो।

मसूरी में भव्य स्वागत और अल्पसंख्यक संवाद

मसूरी पहुंचने पर अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों ने मुफ्ती शमून कासमी का जोरदार स्वागत किया। अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जगजीत कुकरेजा और सिकंदर ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर कासमी ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ संवाद किया और केंद्र व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य मुस्लिम समाज को केवल नारों तक सीमित न रखकर उन्हें विकास और शिक्षा के जरिए मुख्यधारा में लाना है।

मदरसा शिक्षा में ‘कुरान और कंप्यूटर’ का संगम

मुफ्ती शमून कासमी ने प्रेस वार्ता के दौरान शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों का समावेश आज की अनिवार्य जरूरत है। कासमी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराते हुए कहा:

“जब तक मदरसों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को आधुनिक शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे रहेंगे। हमारा प्रयास है कि उन्हें समान अवसर मिलें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि मुस्लिम युवाओं के ‘एक हाथ में कुरान और दूसरे में कंप्यूटर’ होना चाहिए, और उत्तराखंड सरकार इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।”

उन्होंने बताया कि मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से जोड़ने से वहां पढ़ने वाले बच्चों को मिलने वाले प्रमाण पत्रों की स्वीकार्यता बढ़ेगी, जिससे उन्हें सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों में समान अवसर प्राप्त होंगे।

सीएम धामी के साहसिक फैसलों की सराहना

मुफ्ती कासमी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि धामी सरकार ने मुस्लिम समाज के हितों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े फैसले लिए हैं। उन्होंने उन अफवाहों को भी खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि सरकार धार्मिक शिक्षा पर रोक लगा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक शिक्षा पर कोई प्रतिबंध नहीं है, बल्कि सरकार का जोर इस बात पर है कि धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों का भविष्य विज्ञान, गणित और तकनीक के जरिए सुरक्षित किया जाए।

कांग्रेस पर प्रहार: ‘वोट बैंक’ की राजनीति का अंत

राजनीतिक चर्चा के दौरान मुफ्ती शमून कासमी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक कांग्रेस ने मुस्लिम समुदाय का इस्तेमाल केवल अपनी सत्ता बचाने के लिए ‘वोट बैंक’ के रूप में किया। कासमी ने कहा:

“कांग्रेस ने वर्षों तक मुस्लिम समाज को केवल डराकर रखा और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कभी कोई ठोस प्रयास नहीं किए। इसके विपरीत, भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र पर काम कर रही है, जहां धर्म के आधार पर नहीं बल्कि विकास के आधार पर नीतियां बनाई जा रही हैं।”

2027 चुनाव और राजनीतिक भविष्य

आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कासमी ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह केंद्र में मोदी सरकार और प्रदेश में धामी सरकार ने पारदर्शी विकास कार्य किए हैं, उससे मुस्लिम समुदाय का झुकाव भाजपा की ओर तेजी से बढ़ा है। उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय से अपील की कि वे अब केवल उन योग्य उम्मीदवारों और दलों का समर्थन करें जो वास्तव में विकास की बात करते हैं। कासमी के अनुसार, जनता अब तुष्टिकरण की राजनीति को नकार चुकी है और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए तैयार है।

महिला आरक्षण और परिसीमन: राष्ट्रहित सर्वोपरि

महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बात करते हुए कासमी ने कांग्रेस के विरोध को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि ये कदम देशहित में आवश्यक हैं और इनसे भविष्य में समाज के हर वर्ग को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण किसी भी विकसित समाज की पहली शर्त है और सरकार इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा रही है।

मुस्लिम समाज के लिए नया सवेरा

उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड का उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड के साथ तालमेल बिठाना राज्य की शिक्षा नीति में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। मुफ्ती शमून कासमी के नेतृत्व में जिस तरह से सुधारों की रूपरेखा तैयार की गई है, उससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में राज्य के हजारों मदरसा छात्र डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनने की राह पर अग्रसर होंगे। यह न केवल उनके व्यक्तिगत भविष्य के लिए अच्छा है, बल्कि प्रदेश की प्रगति में भी एक बड़ा योगदान होगा।

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