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Uttarakhand: विधि-विधान से खुले बद्रीविशाल के द्वार: 25 क्विंटल फूलों से महका धाम, चारधाम यात्रा 2026 विधिवत शुरू

The Hill India News
Last updated: April 23, 2026 1:42 am
The Hill India News
Published: April 23, 2026
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चमोली (उत्तराखंड): हिमालय की गोद में बसे भू-वैकुंठ कहे जाने वाले भगवान बद्रीविशाल के धाम में आज सुबह एक नया इतिहास रचा गया। चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ मंदिर के कपाट आज गुरुवार सुबह सवा छह बजे (6:15 AM) पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। 149 दिनों के शीतकालीन अवकाश के बाद जब मंदिर के विशाल कपाट खुले, तो समूचा नीलकंठ पर्वत शिखर भगवान बद्रीनाथ के जयकारों से गूंज उठा।

Contents
दिव्य श्रृंगार: 25 क्विंटल फूलों से सजा ‘ओम लक्ष्मीपति नमो’मुख्यमंत्री की उपस्थिति और आस्था का सैलाबक्यों बंद किए जाते हैं कपाट? शीतकाल का रहस्यउत्तराखंड की आर्थिकी की ‘रीढ़’ है यह यात्रायात्रा का पूरा रोडमैप: चारों धामों का हुआ आगाजश्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी: स्वास्थ्य का रखें ध्यान

इस पावन अवसर के साक्षी बनने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं उपस्थित रहे। सेना के बैंड की मधुर धुनों और हजारों भक्तों की उपस्थिति ने इस पल को अलौकिक बना दिया।

दिव्य श्रृंगार: 25 क्विंटल फूलों से सजा ‘ओम लक्ष्मीपति नमो’

बद्रीनाथ मंदिर को इस वर्ष अभूतपूर्व तरीके से सजाया गया है। मंदिर प्रशासन ने लगभग 25 क्विंटल ताजे फूलों से पूरे परिसर को भव्य रूप दिया है। इस बार की सजावट की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि मंदिर के मुख्य द्वार पर फूलों के माध्यम से ‘ओम लक्ष्मीपति नमो’ उकेरा गया है। इसके अलावा परिसर में ‘जय श्री बद्री नारायण’ और ‘बैकुंठाय नमो’ के शिलालेख भी फूलों की कलाकारी से बनाए गए हैं, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

मुख्यमंत्री की उपस्थिति और आस्था का सैलाब

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कपाट खुलने के शुभ अवसर पर प्रथम पूजा में भाग लिया। उन्होंने प्रदेश की खुशहाली और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। सीएम धामी ने इस दौरान कहा कि उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2026 राज्य के लिए केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और आर्थिकी का मुख्य आधार है। सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सुबह से ही कड़कड़ाती ठंड के बावजूद भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। जैसे ही मुख्य पुजारी (रावल) ने कपाट खोले, भक्तों की आंखों से श्रद्धा के आंसू छलक पड़े। 149 दिनों तक जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में विराजमान रहने के बाद भगवान अब अगले छह महीनों तक भक्तों को बद्रीनाथ धाम में ही दर्शन देंगे।

क्यों बंद किए जाते हैं कपाट? शीतकाल का रहस्य

अक्सर नए श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इन मंदिरों के कपाट क्यों बंद कर दिए जाते हैं। दरअसल, चारधाम—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ—उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित हैं। समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण सर्दियों में यहां का तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है और क्षेत्र 10 से 15 फीट तक बर्फ की मोटी चादर से ढक जाता है।

इन विषम परिस्थितियों में जनजीवन और यात्रा संभव नहीं होती। इसीलिए, हर साल अक्टूबर-नवंबर के आसपास कपाट बंद कर दिए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शीतकाल में जब कपाट बंद होते हैं, तब वहां ‘देवता’ भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। अप्रैल-मई में बर्फ पिघलने के बाद इन्हें दोबारा खोला जाता है।

उत्तराखंड की आर्थिकी की ‘रीढ़’ है यह यात्रा

छह महीने तक चलने वाली यह यात्रा उत्तराखंड के लिए आर्थिक जीवनरेखा (Lifeline) मानी जाती है। होटल व्यवसाय, परिवहन, गाइड, घोड़े-खच्चर और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े लाखों परिवार इस यात्रा पर निर्भर हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, उससे स्थानीय व्यापार को नई ऊर्जा मिली है। उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2026 में भी रिकॉर्ड तोड़ भीड़ जुटने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसके लिए प्रशासन ने पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित किया है।

यात्रा का पूरा रोडमैप: चारों धामों का हुआ आगाज

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही अब चारों धामों की यात्रा सुचारू हो गई है। इस वर्ष यात्रा की समय-सारणी कुछ इस प्रकार रही:

  1. यमुनोत्री और गंगोत्री धाम: 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर इन दोनों धामों के कपाट खोले गए।

  2. केदारनाथ धाम: 22 अप्रैल को भगवान शिव के धाम के कपाट खुले।

  3. बद्रीनाथ धाम: आज यानी 23 अप्रैल को कपाट खुलने के साथ ही ‘चतुर्थ धाम’ का स्वागत हुआ।

अब तीर्थयात्री बिना किसी बाधा के चारों धामों के दर्शन कर सकते हैं। ऋषिकेश और हरिद्वार से भक्तों के जत्थे लगातार पहाड़ों की ओर कूच कर रहे हैं।

श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी: स्वास्थ्य का रखें ध्यान

प्रशासन ने यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ विशेष निर्देश जारी किए हैं। चूंकि यह क्षेत्र उच्च ऊंचाई (High Altitude) पर हैं, इसलिए हृदय रोगियों और सांस की समस्या वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ें और अपने साथ गर्म कपड़े और जरूरी दवाइयां जरूर रखें।

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलना भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। बद्री-केदार की यह पावन धरती एक बार फिर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बद्रीविशाल’ के नारों से जीवंत हो उठी है। यदि आप भी इस वर्ष उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2026 का हिस्सा बनने की योजना बना रहे हैं, तो यह समय सबसे उपयुक्त है। प्रकृति की सुंदरता और ईश्वर की निकटता का यह संगम वाकई जीवन में एक बार अनुभव करने योग्य है।

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