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पीएम मोदी का केदार प्रेम: सोशल मीडिया पर साझा कीं बाबा केदार की भावुक तस्वीरें; ‘डिजिटल उपवास’ के साथ दिया 5 संकल्पों का मंत्र

देहरादून/केदारनाथ: हिमालय की गोद में बसे बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर शिव भक्ति के रंग में रंगे नजर आए। प्रधानमंत्री ने बुधवार देर शाम अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर केदारनाथ धाम की अपनी पुरानी यात्राओं की कुछ अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों के माध्यम से उन्होंने न केवल बाबा केदार के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट की, बल्कि करोड़ों शिव भक्तों के मानस पटल पर केदारपुरी की दिव्य स्मृतियों को भी जीवंत कर दिया।

तप और आस्था का संगम: पीएम की स्मृतियां

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा की गई तस्वीरों में वे कभी केदारनाथ की गुफा में ध्यानलीन मुद्रा में नजर आ रहे हैं, तो कभी मंदिर प्रांगण में बाबा केदार की शरण में शीश नवाते हुए। ये तस्वीरें उस कालखंड की गवाही देती हैं जब उन्होंने केदारनाथ की पुनर्निर्माण यात्रा का संकल्प लिया था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री की इन पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, प्रधानमंत्री मोदी और बाबा केदार के बीच का संबंध केवल एक श्रद्धालु और आराध्य का नहीं, बल्कि एक गहरे आध्यात्मिक लगाव का है। ये तस्वीरें उस तपोभूमि और ज्योतिर्लिंग के प्रति उनके समर्पण की अभिव्यक्ति हैं, जो आज केदारपुरी के भव्य और दिव्य स्वरूप के निर्माण का आधार बनी हैं।

मुख्यमंत्री धामी का संदेश: ‘आत्मिक जागरण की यात्रा’

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह संवाद करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में चारधाम यात्रा अब केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक ‘आत्मिक जागरण यात्रा’ के रूप में स्थापित हो चुकी है। बाबा केदार के धाम में गूंजता “हर हर महादेव” का उद्घोष और प्रधानमंत्री की यह श्रद्धाभिव्यक्ति देशभर के श्रद्धालुओं में भक्ति का एक नया उत्साह भर रही है।

प्रधानमंत्री के ‘पांच संकल्प’ और डिजिटल उपवास

अपनी पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री ने इस वर्ष चारधाम आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक नई नियमावली और जीवन दर्शन भी प्रस्तुत किया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान ‘डिजिटल उपवास’ रखने का अनूठा आग्रह किया। उनका मानना है कि मोबाइल और गैजेट्स से दूरी बनाकर ही भक्त हिमालय की शांति और बाबा केदार की ऊर्जा को आत्मसात कर सकते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने पांच विशेष संकल्पों का पालन करने का आह्वान किया:

  1. स्वच्छता: हिमालयी क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए कूड़ा न फैलाना।

  2. पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर यात्रा करना।

  3. सेवा: साथी यात्रियों और स्थानीय लोगों की सहायता करना।

  4. वोकल फॉर लोकल: स्थानीय उत्पादों को खरीदकर पहाड़ी अर्थव्यवस्था को मजबूती देना।

  5. अनुशासन: यात्रा नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना।

सांस्कृतिक एकात्मता का आधार: चारधाम

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में चारधाम यात्रा को भारत की सांस्कृतिक एकात्मता का सबसे मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक के लोगों को एक सूत्र में पिरोने वाली यह यात्रा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार करती है। केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण, आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा की स्थापना और अब श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या यह सिद्ध करती है कि भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर तेजी से लौट रहा है।

भक्तों में उत्साह की नई लहर

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही प्रधानमंत्री की इस भावपूर्ण पोस्ट ने सोशल मीडिया पर ‘ट्रेंड’ करना शुरू कर दिया है। लाखों यूजर्स इन तस्वीरों को साझा कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रधानमंत्री का स्वयं एक तपस्वी के रूप में केदारनाथ से जुड़ा होना उन्हें भी इस कठिन यात्रा को पूर्ण करने का संबल प्रदान करता है।

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