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उत्तराखंडफीचर्ड

विकसित भारत-2047 के संकल्प में सबका सहयोग जरूरी, टालमटोल करने वाले अफसरों पर होगी सख्त कार्रवाई: सीएम धामी

The Hill India News
Last updated: June 8, 2026 2:05 pm
The Hill India News
Published: June 8, 2026
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देहरादून। उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करने और बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कमर कस ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में साफ कर दिया कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की सुस्ती या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ‘प्रगति पोर्टल’ के माध्यम से राज्य की विभिन्न महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 संकल्प उत्तराखंड और देश के संदर्भ में तभी सिद्ध होगा, जब शासन से लेकर फील्ड में तैनात आखिरी अधिकारी तक पूरी निष्ठा से अपना सहयोग देगा।

Contents
15 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा तय, सुस्ती पर लगेगा ब्रेकफाइलें दबाने का दौर खत्म: भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृति पर त्वरित निर्णय के निर्देशइन 12 प्रमुख सामरिक और जनोपयोगी परियोजनाओं पर रहा विशेष ध्यानकम प्रगति वाली परियोजनाओं के लिए बनेगी ‘विशेष कार्ययोजना’बैठक में शासन के आला अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) तथा अन्य प्रमुख विभागों की कुल ₹6,940 करोड़ की 12 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की बारीकी से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम पूरा न होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

15 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा तय, सुस्ती पर लगेगा ब्रेक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास कार्यों को गति देने के लिए एक कड़ा फ्रेमवर्क तैयार किया है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का कार्य 50 प्रतिशत या उससे अधिक पूरा हो चुका है, उन्हें आगामी 15 अक्टूबर 2026 तक अनिवार्य रूप से शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने दो-टूक शब्दों में कहा कि परियोजनाओं में बेवजह की देरी न केवल राज्य के विकास को रोकती है, बल्कि इससे आम जनता के हितों और राज्य की आर्थिक गतिविधियों पर भी बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

परियोजनाओं की मॉनिटरिंग को लेकर मुख्यमंत्री ने एक त्रिस्तरीय चाक-चौबंद व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं:

  • मुख्यमंत्री स्तर पर: हर महीने (मासिक) सभी बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की सीधी समीक्षा खुद मुख्यमंत्री करेंगे।

  • मुख्य सचिव स्तर पर: प्रत्येक 10 दिनों में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नियमित समीक्षा बैठकें होंगी ताकि ग्राउंड लेवल की अड़चनों को तुरंत दूर किया जा सके।

  • जिलाधिकारी स्तर पर: जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जनपद स्तर पर लंबित मामलों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें।

फाइलें दबाने का दौर खत्म: भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृति पर त्वरित निर्णय के निर्देश

अक्सर देखा जाता है कि बड़ी योजनाएं प्रशासनिक लालफीताशाही, भूमि हस्तांतरण (Land Transfer) और वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों (Forest Clearances) के कारण फाइलों में दबी रह जाती हैं। मुख्यमंत्री ने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए अंतर्विभागीय समन्वय (Inter-departmental Coordination) पर विशेष जोर दिया।

“जिन परियोजनाओं में भूमि हस्तांतरण, वन स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण, या क्षतिपूर्ति भुगतान जैसे प्रशासनिक कारण आड़े आ रहे हैं, वहां संबंधित विभाग आपसी समन्वय बनाकर त्वरित और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें। हमें ‘प्रगति पोर्टल’ को महज एक डेटा एंट्री टूल नहीं, बल्कि एक प्रभावी और जीवंत निगरानी तंत्र (Monitoring System) के रूप में इस्तेमाल करना होगा।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

इन 12 प्रमुख सामरिक और जनोपयोगी परियोजनाओं पर रहा विशेष ध्यान

बैठक के दौरान राज्य की कनेक्टिविटी और पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी 12 बड़ी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का कच्चा-चिट्ठा देखा गया। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित योजनाएं शामिल रहीं:

  1. परिवहन अवसंरचना: रामनगर अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT), रानीखेत बस टर्मिनल, तथा ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला का निर्माण कार्य।

  2. ऊर्जा क्षेत्र: बनबसा और रुद्रप्रयाग में बन रहे नए विद्युत उपकेंद्र (Power Substations), जो राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए गेमचेंजर साबित होंगे।

  3. सामरिक और पर्यटन मार्ग: उत्तराखंड की लाइफलाइन मानी जाने वाली ‘चारधाम सड़क परियोजनाएं’, भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला अस्कोट-लिपुलेख मार्ग और माणा पास सड़क परियोजना।

  4. राष्ट्रीय राजमार्ग: औद्योगिक और पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हरिद्वार एवं काशीपुर क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं।

सीएम धामी ने रेखांकित किया कि चारधाम यात्रा और सीमांत क्षेत्रों की ये सामरिक मार्ग परियोजनाएं न केवल देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं, बल्कि उत्तराखंड के समग्र विकास, पर्यटन, स्थानीय व्यापार और रोजगार सृजन के स्तंभ हैं।

कम प्रगति वाली परियोजनाओं के लिए बनेगी ‘विशेष कार्ययोजना’

मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान पाया कि कुछ परियोजनाओं की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं है। उन्होंने इस पर असंतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन प्रोजेक्ट्स की प्रगति अपेक्षित स्तर से कम है, उनके लिए तुरंत एक ‘विशेष कार्ययोजना’ (Special Action Plan) तैयार की जाए। इसके तहत जनशक्ति (Manpower) और संसाधनों को बढ़ाकर काम को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल बजट आवंटित करना नहीं, बल्कि समय पर जनता को उसका लाभ पहुंचाना है।

बैठक में शासन के आला अधिकारी रहे मौजूद

इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उत्तराखंड शासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री को धरातलीय स्थिति से अवगत कराया। बैठक में मुख्य रूप से प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव बृजेश कुमार संत, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट और बंशीधर तिवारी उपस्थित थे। इसके अलावा, राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी (DM) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल माध्यम) के जरिए इस बैठक से जुड़े रहे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर स्थानीय विवादों और भूमि अधिग्रहण के मामलों को हफ्ते भर के भीतर सुलझाने के कड़े निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री धामी का यह सख्त रुख साफ संकेत देता है कि उत्तराखंड सरकार अब ‘परफॉर्मेंस ओरिएंटेड’ मोड में आ चुकी है। 2047 के बड़े लक्ष्य को साधने के लिए साल 2026 की समय-सीमाएं तय करना यह दर्शाता है कि राज्य अब नीतिगत सुस्ती को पीछे छोड़ चुका है। देखना होगा कि मुख्यमंत्री के इस हंटर के बाद नौकरशाही धरातल पर कितनी तेजी से नतीजे लाकर देती है।

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