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राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव 2026: बीजेपी ने चली बड़ी सियासी चाल; उम्मीदवारों के ऐलान से मध्य प्रदेश और कर्नाटक में हलचल, कांग्रेस की बढ़ी धड़कनें

नई दिल्ली: देश के सियासी गलियारों में एक बार फिर उच्च सदन की जंग को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी राज्यसभा और कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के लिए अपने चार अहम उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इन नामों पर अपनी अंतिम मुहर लगाई है, जिसके बाद राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह ने सूची जारी की।

इस सूची के बाहर आते ही खासकर मध्य प्रदेश और कर्नाटक की राजनीति का पारा अचानक बढ़ गया है। बीजेपी ने न सिर्फ सेफ सीटों पर अपने मोहरे सेट किए हैं, बल्कि मध्य प्रदेश में एक अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी है। ऐसे में राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव 2026 की यह लड़ाई बेहद दिलचस्प और रणनीतिक मोड़ पर पहुंच गई है।

बीजेपी का टिकट किसे कहाँ से मिला? जानिए पूरा समीकरण

भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के मुताबिक, इन चार नामों में से दो उम्मीदवार राज्यसभा के लिए देश की संसद में जाने के दावेदार हैं, जबकि दो अन्य को कर्नाटक विधान परिषद (MLC) के द्विवार्षिक चुनाव में उतारा गया है।

पार्टी ने मध्य प्रदेश से महेश केवट को अपना उम्मीदवार बनाया है। महेश केवट के नाम का चयन करके भाजपा ने एक बार फिर अपने जमीनी और संगठनात्मक चेहरों को तवज्जो देने की परंपरा को बरकरार रखा है। वहीं, दक्षिण भारत के सबसे अहम राज्य कर्नाटक से बीजेपी ने प्रो. डॉ. एम नागराजन को राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया है।

दूसरी तरफ, कर्नाटक विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव के लिए भी दो कद्दावर नामों की घोषणा की गई है, जिनमें लिंगराज पाटील और रघु कौटिल्य शामिल हैं। बीजेपी की इस सूची में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को साधने की पूरी कोशिश साफ दिखाई दे रही है।

मध्य प्रदेश में दिलचस्प मुकाबला: आमने-सामने होंगे महेश केवट और मीनाक्षी नटराजन

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे रोमांचक केंद्र मध्य प्रदेश बनता हुआ दिख रहा है। मध्य प्रदेश से राज्यसभा की कुल तीन सीटों पर चुनाव होना है। सूबे के सियासी और विधायी गणित के हिसाब से तीन में से दो सीटों पर बीजेपी की जीत पहले से ही पूरी तरह तय मानी जा रही थी। बीजेपी की तरफ से तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल पहले ही राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर चुके हैं और उनकी राह निष्कंटक है।

तीसरी सीट पर फंसा पेंच:

असली ट्विस्ट तब आया जब बीजेपी ने तीसरी सीट के लिए महेश केवट के नाम का पासा फेंक दिया। इसके जवाब में विपक्षी दल कांग्रेस ने भी पीछे न हटते हुए अपनी दिग्गज नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतार दिया है। अब इस तीसरी सीट के लिए बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी और कांटे की टक्कर होना तय है।

मध्य प्रदेश विधानसभा का अंकगणित: कहाँ खड़ी हैं दोनों पार्टियां?

मध्य प्रदेश की कुल 230 सदस्यीय विधानसभा में इस समय प्रभावी वोटों की संख्या 228 है। इस संख्या बल के आधार पर किसी भी एक उम्मीदवार को राज्यसभा सांसद बनने के लिए 58 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है।

आइए एक नजर डालते हैं वर्तमान दलीय स्थिति पर:

राजनीतिक दल विधायकों की संख्या राज्यसभा के लिए सुरक्षित सीटें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) 164 2 सीटें (पूर्ण बहुमत के साथ सुरक्षित)
कांग्रेस (Congress) 62-64 1 सीट (संख्या बल के अनुसार)

आंकड़ों के खेल को देखें तो बीजेपी के पास 164 विधायक हैं। दो उम्मीदवारों (तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल) को जिताने के लिए उसे $58 \times 2 = 116$ वोटों की जरूरत होगी। इसके बाद भी बीजेपी के पास 48 अतिरिक्त वोट बच जाते हैं।

दूसरी तरफ, कांग्रेस के पास कागजों पर 64 विधायक हैं, जो एक उम्मीदवार को जिताने के लिए आवश्यक 58 वोटों से 6 अधिक हैं। लेकिन हकीकत के धरातल पर कांग्रेस की यह राह इतनी आसान नहीं है, क्योंकि पार्टी के विधायकों की प्रभावी संख्या घटकर 62 पर ही सिमटती दिख रही है।

विधायकों पर सस्पेंस: कांग्रेस के लिए क्यों बढ़ी चिंता की लकीरें?

कांग्रेस खेमे में मीनाक्षी नटराजन जैसी मजबूत उम्मीदवार होने के बावजूद अंदरूनी चिंताएं गहरी हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह दो विधायकों को लेकर असमंजस की स्थिति है:

  1. विधायक मुकेश मल्होत्रा: इनके मतदान करने पर फिलहाल कानूनी या तकनीकी कारणों से रोक लगी हुई है।

  2. विधायक निर्मला सप्रे: बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के मतदान को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि उनका झुकाव पूरी तरह भाजपा की तरफ है।

यदि ये दो वोट कांग्रेस के पाले से खिसकते हैं, तो कांग्रेस का आंकड़ा 62 पर आ जाएगा। ऐसे में बीजेपी को अपने तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को जिताने के लिए मात्र 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। राजनीति के जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने जानबूझकर तीसरा उम्मीदवार उतारा है ताकि कांग्रेस के असंतुष्ट धड़े को साधा जा सके। ऐसे त्रिकोणीय और करीबी मुकाबलों में हमेशा क्रॉस वोटिंग (Cross-Voting) होने की प्रबल संभावना बनी रहती है, जो अक्सर कांग्रेस का खेल बिगाड़ती आई है।

18 जून को होगा महामुकाबला, 10 राज्यों की 24 सीटों पर नजर

इस महामुकाबले की तारीख भी अब बेहद करीब है। आगामी 18 जून को मध्य प्रदेश, कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और मणिपुर सहित देश के 10 राज्यों की कुल 24 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होना है। इसी दिन (18 जून) कर्नाटक विधान परिषद की सीटों के लिए भी वोट डाले जाएंगे और शाम तक परिणाम भी सामने आ जाएंगे।

बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों के चयन और खासकर मध्य प्रदेश में तीसरा उम्मीदवार उतारकर यह साफ कर दिया है कि वह चुनाव चाहे कोई भी हो, उसे वॉकओवर देने के मूड में बिल्कुल नहीं रहती। अब देखना यह होगा कि 18 जून को होने वाले राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव 2026 के इस रण में कांग्रेस अपनी इस इकलौती सीट को बचा पाती है या बीजेपी की ‘चाणक्य नीति’ एक बार फिर विपक्षी खेमे में सेंध लगाने में कामयाब होती है। राजनीति के प्रेमियों के लिए 18 जून का दिन बेहद सस्पेंस भरा रहने वाला है।

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