नई दिल्ली: NEET पेपर लीक मामले को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य छात्र संगठनों का आंदोलन अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले कुछ दिनों में केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त होने के बजाय और अधिक राजनीतिक एवं कानूनी रूप लेता दिखाई दे रहा है। इस बीच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) जैसी गंभीर धारा शामिल किए जाने से पूरे मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। वहीं दूसरी ओर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल दीपके के टाइफाइड से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई है, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अडिग बने हुए हैं।
बीते 48 घंटों में केंद्र सरकार ने आंदोलन को शांत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। शिक्षा सचिव को पद से हटाया गया, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया तथा पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई। सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया, लेकिन CJP और अन्य छात्र संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होती और शिक्षा मंत्री अपना पद नहीं छोड़ते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर की जानकारी सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। कर्तव्य पथ थाना पुलिस ने इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई हैं, जिनमें धारा 109(1) यानी हत्या के प्रयास का प्रावधान भी शामिल है। पुलिस का दावा है कि संसद और रेल भवन के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र के निकट प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे और उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला किया।
एफआईआर के अनुसार संबंधित इंस्पेक्टर की ड्यूटी सुबह पांच बजे से सी-हेक्सागन क्षेत्र में लगाई गई थी। वायरलेस संदेश मिलने के बाद पुलिस बल रेल भवन राउंडअबाउट पहुंचा, जहां हजारों प्रदर्शनकारी पहले से मौजूद थे। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने और प्रदर्शन की अनुमति न होने की घोषणा की। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी वहां से नहीं हटे और लगातार नारेबाजी करते रहे।
पुलिस का आरोप है कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने के लिए उकसाया। एफआईआर में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को घेर लिया, उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की, पत्थर तथा चप्पलें फेंकीं और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई। पुलिस का यह भी आरोप है कि हमले का उद्देश्य पुलिस बल को गंभीर नुकसान पहुंचाना था, जिसके चलते हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा लगाई गई।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की कुल 13 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें सरकारी कर्मचारी पर हमला, ड्यूटी में बाधा डालना, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, सार्वजनिक एवं सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना तथा आम लोगों के जीवन को खतरे में डालने जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस के अनुसार 20 जुलाई को हुई झड़पों में 129 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि 60 से अधिक प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आईं।
उधर प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप एकतरफा हैं और आंदोलन को दबाने के लिए गंभीर धाराओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका दावा है कि आंदोलन पूरी तरह छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार पहले ही समय रहते प्रभावी कार्रवाई करती तो स्थिति इतनी तनावपूर्ण नहीं होती।
इधर सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी के संवेदनशील क्षेत्रों में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है। संसद मार्ग, जयसिंह मार्ग और जंतर-मंतर की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर लोहे के मजबूत बैरिकेड लगाए गए हैं। कई स्थानों पर बैरिकेड्स को लोहे की सरियों और वेल्डिंग के जरिए स्थायी रूप से जमीन में फिक्स कर दिया गया है, ताकि उन्हें आसानी से हटाया या तोड़ा न जा सके। जंतर-मंतर के आसपास लगभग छह परतों वाली बैरिकेडिंग तैयार की गई है, जिससे प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को एक सीमित क्षेत्र तक नियंत्रित रखा जा सके।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि संसद भवन, रेल भवन और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया गया है। अधिकारियों के अनुसार किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, अर्धसैनिक बल और त्वरित कार्रवाई दल (QRT) को भी तैनात किया गया है।
इस बीच बिहार में भी आंदोलन का असर देखने को मिल रहा है। छात्र संगठन AISA ने बिहार बंद का आह्वान किया है, जबकि माले विधायक संदीप सौरभ की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। विपक्षी दल सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन हिंसा और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
देशभर में चल रहे इस आंदोलन ने अब केवल NEET पेपर लीक तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि यह परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की व्यापक मांग का रूप ले चुका है। सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच तीसरे दौर की बातचीत पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि वार्ता सफल होती है तो लंबे समय से जारी गतिरोध समाप्त हो सकता है, लेकिन यदि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम रहते हैं, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक कड़ी कर दी गई है, जबकि कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और प्रदर्शनकारी बातचीत के माध्यम से समाधान निकाल पाते हैं या फिर यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप लेता है।
