देहरादून/टिहरी गढ़वाल/पिथौरागढ़/बागेश्वर। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता दिखाई दे रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 10 सितंबर तक राज्य में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। अगले कई दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है। लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी जिलों में जनजीवन प्रभावित होने लगा है। कई जगहों पर भूस्खलन, मलबा और सड़कें बंद होने से लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। पिथौरागढ़ और बागेश्वर में बड़ी संख्या में मोटर मार्ग बंद हैं, जबकि टिहरी में निर्माणाधीन जाख–डोबरा रिंग रोड का पुश्ता क्षतिग्रस्त होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बारिश के कारण सबसे ज्यादा परेशानी पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रही है। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों और तहसील मुख्यालयों से प्रभावित हुआ है। सड़कें बंद होने के कारण लोगों को जरूरी काम के लिए भी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। वहीं, मरीजों को अस्पताल ले जाने वाले वाहनों और सार्वजनिक परिवहन पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें बंद मार्गों को खोलने के लिए लगातार काम कर रही हैं, लेकिन बारिश के जारी रहने से राहत और सड़क खोलने के काम में मुश्किलें बनी हुई हैं।
टिहरी में निर्माणाधीन रिंग रोड का पुश्ता क्षतिग्रस्त
टिहरी गढ़वाल जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच जाख–डोबरा रिंग रोड के तहत बनाया गया निर्माणाधीन पुश्ता क्षतिग्रस्त हो गया। बारिश के शुरुआती दौर में ही पुश्ते का एक हिस्सा टूटने और धंसने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रिंग रोड क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है। ऐसे में निर्माण कार्य मजबूत और निर्धारित मानकों के अनुसार होना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य में पर्याप्त गुणवत्ता और मजबूती का ध्यान रखा गया होता तो शुरुआती बारिश में ही पुश्ते के क्षतिग्रस्त होने जैसी स्थिति सामने नहीं आती।
हालांकि, पुश्ता क्षतिग्रस्त होने के वास्तविक कारणों की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी। बारिश, मिट्टी की स्थिति, जल निकासी, निर्माण सामग्री और निर्माण की तकनीक जैसे कई पहलुओं की जांच जरूरी होगी। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और निर्माण कार्यदायी संस्था से मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की मांग की है।
लोगों की मांग है कि क्षतिग्रस्त हिस्से को केवल ऊपर से मरम्मत करके मामले को खत्म न किया जाए, बल्कि तकनीकी मानकों के अनुसार इसकी दोबारा मजबूती से मरम्मत या निर्माण किया जाए। उनका कहना है कि सड़क परियोजना लंबे समय तक सुरक्षित रहे, इसके लिए निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
पिथौरागढ़ में बारिश और भूस्खलन से 18 सड़कें बंद
सीमांत पिथौरागढ़ जिले में लगातार बारिश के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बारिश के साथ कई स्थानों पर भूस्खलन और सड़क पर मलबा आने से 18 मोटर मार्ग बंद हो गए हैं। सड़कें बंद होने के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क जिला मुख्यालय और तहसील मुख्यालयों से प्रभावित हुआ है।
सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जिन्हें रोजमर्रा के काम, इलाज, पढ़ाई या जरूरी सामान के लिए दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ता है। सड़क बंद होने के कारण कई जगह लोगों को पैदल रास्तों या वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।
चीन सीमा से जुड़े इलाकों की ओर जाने वाले मार्गों पर भी बारिश का असर पड़ा है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के चलते जगह-जगह मलबा आने से यातायात बाधित हुआ है। कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही घंटों प्रभावित रही।
प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें मशीनों की मदद से मलबा हटाने और बंद सड़कों को खोलने में जुटी हैं। लेकिन बारिश लगातार जारी रहने की स्थिति में एक स्थान से मलबा हटाने के बाद दूसरे स्थान पर भूस्खलन होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में सड़क खोलने वाली टीमों के सामने भी चुनौती बनी हुई है।
पिथौरागढ़ में स्कूल बंद रखने का फैसला
मौसम की खराब स्थिति को देखते हुए पिथौरागढ़ में सुरक्षा के मद्देनजर स्कूलों को बंद रखने की सूचना भी जारी की गई थी। प्रशासन ने अभिभावकों और आम लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को अनावश्यक रूप से ऐसे इलाकों में जाने से बचने को कहा गया है जहां भूस्खलन या सड़क बंद होने का खतरा हो।
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। इसके अलावा सड़क के किनारे पहाड़ी से पत्थर और मलबा गिरने का खतरा भी बना रहता है। इसलिए प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।
पिथौरागढ़ में इन 18 सड़कों पर आवाजाही प्रभावित
बारिश और भूस्खलन के कारण पिथौरागढ़ जिले में जिन प्रमुख मोटर मार्गों के बंद होने की जानकारी सामने आई है, उनमें घारचूला–तवाघाट मोटर मार्ग, तवाघाट–गुंजी मोटर मार्ग, ड्योरा–बारमू मोटर मार्ग, जौलजीबी–झूलाघाट मोटर मार्ग, सोबला–उमचिया मोटर मार्ग, होकरा–नामिक मोटर मार्ग, एलागाड़–जुम्मा मोटर मार्ग और घापाबैण्ड–बुई पातों मोटर मार्ग शामिल हैं।
इसके अलावा बांसबगड़–कोटा मोटर मार्ग, मदकोट–दारमा मोटर मार्ग, जैती–घोरपट्टा मोटर मार्ग, घट्टा बगड़–तांकुल मोटर मार्ग, देविसौना–गराली कूटा मोटर मार्ग, मालाकोट–लोघ मोटर मार्ग, मदकोट–बोना मोटर मार्ग, कनालीछीना–पीपली मोटर मार्ग, जाखपन्त–मनकोट चौड़ी मोटर मार्ग और गिनीबैण्ड–समकोट मोटर मार्ग भी प्रभावित बताए गए हैं।
इन मार्गों के बंद होने से सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई इलाकों में सड़क संपर्क बहाल करना प्रशासन के लिए प्राथमिक चुनौती बना हुआ है।
बागेश्वर में भी बारिश का असर, 16 मोटर मार्ग बंद
पिथौरागढ़ के बाद बागेश्वर जिले में भी लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। बारिश और भूस्खलन के कारण एनएच-109 समेत 16 मोटर मार्गों के बंद होने की जानकारी सामने आई है। सड़क पर मलबा आने से कई क्षेत्रों में यातायात पूरी तरह बाधित हुआ।
रवाईखाल क्षेत्र में सड़क बंद होने से एंबुलेंस, बस और टैक्सी समेत बड़ी संख्या में वाहन घंटों तक फंसे रहे। सबसे गंभीर स्थिति उस समय देखने को मिली जब मरीज को लेकर बैजनाथ जा रही एंबुलेंस भी करीब डेढ़ घंटे तक जाम में फंसी रही। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सड़क बंद होने से आम लोगों के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं पर भी कितना असर पड़ रहा है।
सड़क पर मलबा हटाने के लिए विभागीय कर्मचारियों और मशीनों को लगाया गया है। प्रशासन की कोशिश है कि जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके। हालांकि, लगातार बारिश के कारण सड़क खोलने के काम में बार-बार बाधा आने की आशंका बनी हुई है।
10 सितंबर तक जारी रह सकता है बारिश का दौर
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के पूर्वानुमान के मुताबिक 10 सितंबर तक प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में अगले कुछ दिन पहाड़ी जिलों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। बारिश के कारण पहले से कमजोर पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बढ़ सकता है।
प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सड़क संपर्क बनाए रखने की है। बंद सड़कों को जल्द खोलने के साथ-साथ संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखना भी जरूरी है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से भूस्खलन की घटनाएं होती रही हैं, वहां अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है।
लगातार बारिश के बीच लोगों से अपील की जा रही है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें। पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय अनावश्यक यात्रा से बचें और यदि किसी मार्ग पर मलबा या भूस्खलन हुआ हो तो वहां से गुजरने का जोखिम न उठाएं।
फिलहाल उत्तराखंड के कई पहाड़ी जिलों में बारिश ने एक बार फिर प्रशासन की तैयारियों की परीक्षा शुरू कर दी है। टिहरी में निर्माणाधीन रिंग रोड के पुश्ते का क्षतिग्रस्त होना जहां निर्माण गुणवत्ता को लेकर जांच की मांग को सामने ला रहा है, वहीं पिथौरागढ़ और बागेश्वर में बंद सड़कों ने पहाड़ी क्षेत्रों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और बारिश की तीव्रता पर सभी की नजर बनी हुई है।
