
डोईवाला/देहरादून: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने के दौरान डोईवाला में उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं। यह पूरा घटनाक्रम उस समय हुआ जब देशभर में अंबेडकर जयंती मनाई जा रही थी।
परवादून जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता डोईवाला में एकत्र हुए थे। उनका उद्देश्य क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं और विकास संबंधी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपना था। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने बताया कि क्षेत्र के लोग कई गंभीर मुद्दों से जूझ रहे हैं। इनमें रानीपोखरी में प्रस्तावित विधि विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य बंद होना प्रमुख है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया गया था, लेकिन अब उस भूमि का अन्य कार्यों में उपयोग किया जा रहा है, जो स्थानीय लोगों की भावनाओं के साथ अन्याय है। इस मुद्दे को लेकर पिछले कई दिनों से क्षेत्र में आंदोलन चल रहा है।
इसके अलावा बापूनगर (ऋषिकेश) में वन भूमि विवाद भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। स्थानीय निवासी लंबे समय से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि इस क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित किया जाए ताकि उन्हें राहत मिल सके। वहीं, डोईवाला टोल प्लाजा को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि टोल टैक्स का आर्थिक बोझ आम जनता पर पड़ रहा है, इसलिए या तो टोल प्लाजा को हटाया जाए या स्थानीय निवासियों को पूरी छूट दी जाए।
स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर भी कांग्रेस ने चिंता जताई। कार्यकर्ताओं ने डोईवाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उपजिला चिकित्सालय में अपग्रेड करने की मांग की, ताकि क्षेत्रवासियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। साथ ही महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर भी सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की गई।
प्रदर्शन के दौरान अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में न्याय की मांग करते हुए कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके अलावा सुसवा नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। आरोप लगाया गया कि देहरादून का सीवरेज और प्लास्टिक कचरा सीधे नदी में डाला जा रहा है, जिससे गंगा नदी भी प्रदूषित हो रही है। आगामी कुंभ को देखते हुए यह स्थिति और भी चिंताजनक बताई गई।
मोहित उनियाल ने कहा कि अंबेडकर जयंती जैसे पावन अवसर पर लोकतांत्रिक मूल्यों का खुलेआम उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने जा रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा रोका गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस दिन देश डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद करता है, उसी दिन जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया।
डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष करतार नेगी ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना जनता का अधिकार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी और शीघ्र समाधान निकालेगी। उनका कहना था कि इन समस्याओं का समाधान न केवल क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है, बल्कि इससे जनता का सरकार पर विश्वास भी मजबूत होगा।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें अश्विनी बहुगुणा, प्रमोद कप्रवान शास्त्री, राहुल सैनी, स्वतंत्र बिष्ट, गौरव मल्होत्रा, अमित सैनी, शार्दूल नेगी, उमेद बोरा, जितेंद्र कुमार, अफसाना अंसारी, रेखा कांडपाल सती, रीता क्षेत्री, सुनील बर्मन, राजेंद्र सेमवाल सहित कई अन्य शामिल थे।
इस घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है, जबकि प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों को आवश्यक बताया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर राजनीति और तेज होने की संभावना है।


