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उत्तराखंड: डाट काली मंदिर के नीचे सुरंग से गुजरेगा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, आस्था और आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम

The Hill India News
Last updated: April 14, 2026 7:51 am
The Hill India News
Published: April 14, 2026
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दिल्ली से देहरादून के बीच सफर को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाने वाला दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा रहा है। करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे में एक अनोखी और चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धि भी शामिल है—देहरादून के पास स्थित प्रसिद्ध डाट काली मंदिर के नीचे बनाई गई 370 मीटर लंबी सुरंग।

Contents
आस्था के साथ समझौता किए बिना आधुनिक विकासट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत213 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड कॉरिडोरवन्यजीव संरक्षण का भी विशेष ध्यानपर्यटन और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावापीएम मोदी का रोड शो और पूजा

आस्था के साथ समझौता किए बिना आधुनिक विकास

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि सुरंग का निर्माण मंदिर की संरचना को बिना किसी नुकसान पहुंचाए किया गया है। डाट काली मंदिर क्षेत्र धार्मिक आस्था का केंद्र है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में मंदिर के नीचे सुरंग बनाना इंजीनियरों के लिए एक बड़ी चुनौती थी। विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक और अत्यधिक सावधानी के साथ इस कार्य को अंजाम दिया, ताकि मंदिर की नींव और आसपास के क्षेत्र पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

यह सुरंग न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत में विकास और आस्था के संतुलन का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।

ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

डाट काली मंदिर के पास पहले सड़क काफी संकरी थी, जिससे अक्सर लंबा जाम लग जाता था। खासकर पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान लोगों को घंटों तक यातायात में फंसे रहना पड़ता था। अब इस सुरंग के बन जाने से यह समस्या लगभग खत्म हो जाएगी।

सुरंग के भीतर अत्याधुनिक सुविधाएं जैसे सीसीटीवी कैमरे, फायर फाइटिंग सिस्टम और एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं। इससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

213 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड कॉरिडोर

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे कुल 213 किलोमीटर लंबा, छह लेन का आधुनिक हाईवे है। इस एक्सप्रेसवे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रियों को बिना किसी रुकावट के तेज गति से यात्रा का अनुभव मिले।

इस परियोजना में कुल:

  • 10 इंटरचेंज
  • 3 रेलवे ओवरब्रिज (ROB)
  • 4 बड़े पुल
  • 12 जन सुविधाएं (वे-साइड अमेनिटीज)

का निर्माण किया गया है। इन सभी सुविधाओं का उद्देश्य यात्रा को अधिक आरामदायक और सुरक्षित बनाना है।

वन्यजीव संरक्षण का भी विशेष ध्यान

यह एक्सप्रेसवे केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इस क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता को देखते हुए कई अनूठे कदम उठाए गए हैं।

परियोजना के तहत:

  • 12 किलोमीटर लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है
  • 8 पशु मार्ग (Animal Passages)
  • 200 मीटर लंबे 2 हाथी अंडरपास

जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं। ये सभी उपाय जंगली जानवरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेंगे और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करेंगे।

पर्यटन और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के चालू होने से यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। जहां पहले दिल्ली से देहरादून पहुंचने में 5-6 घंटे लगते थे, वहीं अब यह दूरी लगभग 2.5 से 3 घंटे में पूरी की जा सकेगी।

इससे:

  • उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी
  • स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा
  • औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी

देहरादून, मसूरी और आसपास के क्षेत्रों में होटल, ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं में भी वृद्धि देखने को मिलेगी।

पीएम मोदी का रोड शो और पूजा

उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे। इसके बाद वे मंदिर से देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित जसवंत ग्राउंड तक लगभग 12 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे। यह कार्यक्रम न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

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