नई दिल्ली | विशेष संवाददाता देश की राजधानी दिल्ली समेत समूचे उत्तर और मध्य भारत पर सूरज की तपिश भारी पड़ने वाली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भीषण गर्मी और ‘वार्म नाइट’ (गर्म रात) को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। हीटवेव अलर्ट 2026 के तहत जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, आने वाले दो सप्ताह तक मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस ऊपर बना हुआ है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
दिल्ली-NCR और यूपी में हीटवेव का ‘सर्किल’
मौसम विभाग के अनुसार, इस भीषण गर्मी का सिलसिला 18 अप्रैल को हरियाणा से शुरू हुआ था, जो अब एक विशाल ‘हीट पॉकेट’ का रूप ले चुका है। आईएमडी के महानिदेशक के अनुसार, हीटवेव की स्थिति धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और दिल्ली तक फैल गई है।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में ‘लू’ के थपेड़ों के साथ-साथ अब ‘गर्म रातों’ (Warm Night Conditions) का भी अलर्ट है। इसका अर्थ है कि न केवल दिन का अधिकतम तापमान बल्कि न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी अधिक रहेगा, जिससे रात के समय भी सुकून नहीं मिलेगा। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और विदर्भ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही बनी रहेगी।
अगले दो सप्ताह: गर्मी का ‘महा-स्पेल’
आईएमडी की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 15 दिनों तक उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में तापमान कम होने की कोई गुंजाइश नहीं है।
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राजस्थान और गुजरात: यहाँ पारा 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर सकता है।
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उत्तर भारत: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शुष्क पछुआ हवाएं (Westerly Winds) आग में घी डालने का काम करेंगी।
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न्यूनतम तापमान: अगले सप्ताह दिल्ली और यूपी में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है, जिससे उमस और बेचैनी बढ़ेगी।
पहाड़ी राज्यों में ‘पश्चिमी विक्षोभ’ से कुछ उम्मीद
जहाँ मैदानी इलाके तप रहे हैं, वहीं 30 अप्रैल से 6 मई के बीच एक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह विक्षोभ इतना शक्तिशाली नहीं होगा कि मैदानी इलाकों के तापमान में कोई बड़ी गिरावट ला सके।
पूर्वोत्तर में भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी
एक ओर उत्तर भारत में हीटवेव अलर्ट 2026 लागू है, तो दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण के कुछ राज्यों में कुदरत का दूसरा रूप देखने को मिलेगा।
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असम और मेघालय: 25 से 27 अप्रैल के बीच यहाँ 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने यहाँ ‘अत्यंत भारी वर्षा’ की चेतावनी जारी की है।
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सिक्किम और पश्चिम बंगाल: इन राज्यों में भी 27 अप्रैल तक भारी बारिश की संभावना है।
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ओलावृष्टि (Hailstorm): झारखंड (26-27 अप्रैल), मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा (23-24 अप्रैल) में ओलावृष्टि होने के आसार हैं, जिससे फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
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दक्षिण भारत: केरल, लक्षद्वीप और तटीय कर्नाटक में भी मानसून पूर्व की हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की जा सकती है।
पिछले सप्ताह का रिपोर्ट कार्ड: कैसा रहा मौसम?
पिछले सात दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो गर्मी ने समय से पहले ही अपने तीखे तेवर दिखा दिए थे। 18 अप्रैल से ही हरियाणा और ओडिशा में ‘वार्म नाइट’ की स्थिति दर्ज की गई। वहीं, 21 अप्रैल को असम और मेघालय में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई, जिसने वहां के तापमान को सामान्य से काफी नीचे ला दिया। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में लगभग सभी स्टेशनों पर अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है।
प्रशासन की सलाह: दोपहर में निकलने से बचें
बढ़ते तापमान और हीटवेव अलर्ट 2026 को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी की है।
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दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।
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डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पर्याप्त पानी, ओआरएस और तरल पदार्थों का सेवन करें।
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बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि गर्मी का सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर होता है।
मई महीने की शुरुआत से पहले ही भारत का एक बड़ा हिस्सा भीषण गर्मी की चपेट में है। पूर्वोत्तर में बारिश जरूर राहत लाएगी, लेकिन दिल्ली-यूपी समेत हिंदी भाषी राज्यों के लिए आने वाले 14 दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे। प्रशासन को अब बिजली की मांग में बढ़ोतरी और पेयजल संकट जैसी चुनौतियों के लिए भी कमर कसनी होगी।



