
वॉशिंगटन/तेहरान | अंतर्राष्ट्रीय डेस्क मध्य पूर्व (Middle East) के रणक्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और अधिक गहराता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की कूटनीतिक वार्ता को लेकर बना संशय अब युद्ध के बादलों में तब्दील होता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक रुख का परिचय देते हुए ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वे बातचीत की मेज पर नहीं आते, तो अमेरिका उन्हें “सैन्य रूप से खत्म” करने में संकोच नहीं करेगा। दूसरी ओर, इजरायल ने भी अपनी तलवारें पैनी कर ली हैं और ईरान पर एक और भीषण हमले के लिए सिर्फ व्हाइट हाउस के इशारे का इंतजार कर रहा है।
“ईरान अंदरूनी उथल-पुथल में फंसा”: डोनाल्ड ट्रंप
ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से रूबरू होते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की वर्तमान स्थिति पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि ईरान का नेतृत्व इस समय “अंदरूनी उथल-पुथल” और प्रशासनिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। ट्रंप ने उन कयासों को सिरे से खारिज कर दिया कि यह संघर्ष उनकी तय समयसीमा से बाहर जा रहा है।
ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा, “मैं खुद को किसी जल्दबाजी में नहीं डालना चाहता। मैंने शुरुआती चार हफ्तों में ही ईरान को सैन्य रूप से पूरी तरह पस्त कर दिया था। हमने उन्हें युद्ध के मैदान से बाहर धकेल दिया है। अब हम बस पीछे बैठकर देख रहे हैं कि क्या कोई सम्मानजनक डील होती है। लेकिन याद रहे, अगर वे डील नहीं करना चाहते, तो मेरे पास उन्हें सैन्य रूप से पूरी तरह समाप्त करने का विकल्प खुला है।”
VIDEO | Washington: US Vice President JD Vance says, "This is a major, historic moment, we're going to extend the ceasefire for three weeks, that’s already in place between Israel and Lebanon."
(Source: AFP/PTI)
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— Press Trust of India (@PTI_News) April 24, 2026
इजरायल का ‘ग्रीन सिग्नल’ वाला दांव
अमेरिका के इस सख्त रुख के बीच इजरायल के नवनियुक्त रक्षामंत्री इजराइल कार्ट्ज ने आग में घी डालने वाला बयान दिया है। कार्ट्ज ने सेना के शीर्ष कमांडरों के साथ बैठक के बाद कहा कि इजरायली रक्षा बल (IDF) ईरान के परमाणु और रणनीतिक ठिकानों पर दोबारा हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रक्षामंत्री ने दोटूक कहा, “हमारी तैयारी पूरी है, हमारी मिसाइलें टारगेट पर टिकी हैं। हमें बस अमेरिका से ‘ग्रीन सिग्नल’ मिलने का इंतजार है। जैसे ही वॉशिंगटन से हरी झंडी मिलेगी, ईरान को अपनी हिमाकत का अंजाम भुगतना होगा।” जानकारों का मानना है कि इजरायल इस बार ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की फिराक में है, जिससे तेहरान की कमर पूरी तरह टूट जाए।
लेबनान सीमा पर राहत: जेडी वेंस ने किया सीजफायर का ऐलान
जहाँ एक ओर ईरान के साथ युद्ध की आहट है, वहीं लेबनान मोर्चे से शांति की एक किरण दिखाई दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए बताया कि इजरायल और लेबनान के बीच जारी युद्धविराम (Ceasefire) को आगामी तीन सप्ताह के लिए और बढ़ा दिया गया है।
जेडी वेंस ने इस क्षण को “बड़ा और ऐतिहासिक” करार देते हुए कहा कि यह कदम क्षेत्र में मानवीय सहायता पहुंचाने और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध को टालने की दिशा में अहम साबित होगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी राहत है, क्योंकि ईरान के साथ तनाव सुलझे बिना लेबनान में स्थायी शांति संभव नहीं दिखती।
कूटनीति बनाम युद्ध: क्या है भविष्य?
ईरान-अमेरिका के बीच ईरान-अमेरिका युद्ध अपडेट को करीब से देखने वाले रणनीतिकारों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन इस समय ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (Maximum Pressure) की नीति पर काम कर रहा है। ट्रंप की धमकी के पीछे का असल मकसद ईरान को एक ऐसी संधि के लिए मजबूर करना है जिसमें उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय हस्तक्षेप पर पूरी तरह रोक लग सके।
ईरान के भीतर भी दो धड़े बने हुए हैं। एक धड़ा प्रतिबंधों से चरमराती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए वार्ता का समर्थन कर रहा है, जबकि कट्टरपंथी धड़ा अमेरिका के आगे झुकने को तैयार नहीं है। ट्रंप इसी “अंदरूनी उथल-पुथल” का फायदा उठाकर तेहरान को बिना युद्ध किए घुटनों पर लाना चाहते हैं।
ईरान की घेराबंदी और वैश्विक बाजार पर असर
यदि ईरान वार्ता की मेज पर नहीं लौटता और अमेरिका सैन्य विकल्प चुनता है, तो इसके वैश्विक परिणाम बेहद घातक होंगे। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। फिलहाल, अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत फारस की खाड़ी में तैनात हैं और किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए ‘हाई अलर्ट’ पर हैं।
मध्य पूर्व का घटनाक्रम इस समय एक दोराहे पर खड़ा है। एक तरफ जेडी वेंस की कोशिशों से लेबनान में शांति की उम्मीद जगी है, तो दूसरी तरफ ट्रंप और इजराइल कार्ट्ज के बयानों ने ईरान के ऊपर अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि दुनिया एक और बड़े युद्ध की गवाह बनेगी या कूटनीति के जरिए इस बारूदी ढेर को ठंडा कर दिया जाएगा।



