रुड़की (हरिद्वार): उत्तराखंड की हरिद्वार पुलिस ने ‘ऑपरेशन प्रहार‘ के अंतर्गत एक अत्यंत संवेदनशील मामले का खुलासा करते हुए मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क की साजिश को नाकाम कर दिया है। पिरान कलियर थाना पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और त्वरित कार्रवाई के बल पर 14 वर्षीय एक नाबालिग लड़की को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से सकुशल बरामद किया है। इस दौरान पुलिस ने एक महिला आरोपी को भी गिरफ्तार किया है, जो मासूम को बहला-फुसलाकर देह व्यापार और भिक्षावृत्ति के काले दलदल में धकेलने की योजना बना रही थी।
नए कपड़ों का लालच और अपहरण की साजिश
मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपी महिला ने मासूम के साथ विश्वासघात की सारी हदें पार कर दी थीं। घटना का क्रम 9 अप्रैल को शुरू हुआ, जब आरोपी महिला ने पड़ोस में रहने वाली इस नाबालिग लड़की को नए कपड़े दिलाने का झांसा दिया। गरीबी और अभाव में जी रही मासूम महिला की बातों में आ गई। आरोपी महिला उसे रुड़की ले गई, जहाँ से उसे सहारनपुर और फिर दिल्ली ले जाया गया। मासूम को भनक तक नहीं लगी कि उसे सात समंदर पार नहीं तो कम से कम हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण भारत के एक अनजान शहर में बेचा जा रहा है।
एसएसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम
10 अप्रैल को पीड़िता की मां, जो मूल रूप से लखनऊ की निवासी है और कलियर में अत्यंत दयनीय स्थिति में रहकर भिक्षावृत्ति के जरिए अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता की मां की लाचारी और मामले की गंभीरता को देखते हुए हरिद्वार एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने तत्काल कड़े निर्देश जारी किए। ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत पुलिस की एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने रुड़की और कलियर क्षेत्र के सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
डिजिटल पदचिह्नों ने खोला बेंगलुरु का रास्ता
जांच के दौरान पुलिस को संदिग्ध महिला और बच्ची के मोबाइल नंबर प्राप्त हुए। सर्विलांस टीम ने जब इन नंबरों को ट्रेस करना शुरू किया, तो उनकी लोकेशन सीधे कर्नाटक के बेंगलुरु में मिली। पुलिस की टीम ने बिना समय गंवाए 16 अप्रैल को बेंगलुरु में छापेमारी की। वहां एक गुप्त स्थान से संदिग्ध महिला को हिरासत में लिया गया और 14 साल की बच्ची को उसके चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
पूछताछ में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
गिरफ्तार आरोपी महिला, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद की रहने वाली है, ने पुलिस की पूछताछ में जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि उसका मुख्य उद्देश्य बच्ची को दिल्ली के रास्ते कर्नाटक ले जाकर वहां उससे भिक्षावृत्ति करवाना और बाद में उसे देह व्यापार (गलत धंधे) में धकेलना था। आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बच्ची का फोन स्विच ऑफ करवा दिया था और उसे परिवार से संपर्क न करने की सख्त हिदायत दी थी।
मानवीय संवेदना और पुलिस की सतर्कता
पीड़िता का परिवार सामाजिक और आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। पिता के छोड़ जाने के बाद बीमार मां ही बच्चों का सहारा थी। ऐसे में पुलिस की इस तत्परता ने न केवल एक मासूम की जिंदगी बर्बाद होने से बचाई, बल्कि समाज के सबसे निचले तबके के प्रति पुलिस की जवाबदेही को भी सिद्ध किया है।
पुलिस टीम की सराहना: हरिद्वार पुलिस की इस सफलता पर स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खुशी व्यक्त की है। एसएसपी ने टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन प्रहार’ का उद्देश्य ऐसे ही अपराधियों की कमर तोड़ना है जो मासूमों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं।
यह मामला एक बार फिर चेतावनी देता है कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर सक्रिय मानव तस्कर गिरोह मासूमों को सॉफ्ट टारगेट बना रहे हैं। पिरान कलियर पुलिस की यह कार्रवाई उत्तराखंड पुलिस के संकल्प और पेशेवर दक्षता का प्रमाण है। फिलहाल पुलिस आरोपी महिला के अन्य संपर्कों और इस तस्करी के नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।



