नई दिल्ली: संसद के पटल पर महिला आरक्षण से जुड़ा ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक‘ गिरने के बाद उपजे राजनीतिक गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम राष्ट्र को संबोधित किया। प्रधानमंत्री का यह संबोधन केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि विपक्ष के खिलाफ एक ‘आरोप पत्र’ की तरह था। पीएम ने कांग्रेस समेत विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A.) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्ष ने अपनी संकीर्ण राजनीति के लिए देश की आधी आबादी के हक पर डकैती डाली है।
स्वाभिमान पर चोट: “मेजें थपथपाना नारी शक्ति का अपमान”
अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने संसद के भीतर हुए घटनाक्रम पर गहरी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब यह ऐतिहासिक बिल विपक्ष के अड़ंगे के कारण गिर रहा था, तब कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसी पार्टियों के नेता खुशी से मेजें थपथपा रहे थे।
प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा, “संसद में जो हुआ, वह केवल टेबल पर थाप नहीं थी, बल्कि वह भारत की नारी के स्वाभिमान और उसके आत्मसम्मान पर किया गया प्रहार था। महिलाओं से उनके अधिकार छीनकर ये परिवारवादी दल जिस तरह जश्न मना रहे थे, उसे देश की हर बेटी और माता ने देखा है।” पीएम ने चेतावनी देते हुए कहा कि नारी सब कुछ भूल सकती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती।
विपक्ष की मंशा पर सवाल: “परिवार से बाहर की महिला स्वीकार्य नहीं”
प्रधानमंत्री मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन 2026 इस मायने में महत्वपूर्ण रहा कि उन्होंने सीधे तौर पर क्षेत्रीय और परिवारवादी दलों के चरित्र पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल नहीं चाहते कि उनके ‘परिवार’ के घेरे से बाहर की कोई सामान्य पृष्ठभूमि वाली महिला राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे।
पीएम ने कहा, “ये पार्टियां नारी शक्ति को ‘फॉर ग्रांटेड’ ले रही हैं। वे भूल रहे हैं कि 21वीं सदी की जागरूक नारी अब उनकी मंशा भांप चुकी है। जो पाप इन दलों ने महिलाओं का अधिकार रोककर किया है, उसकी सजा उन्हें आने वाले समय में जरूर मिलेगी।“ उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष ने न केवल महिलाओं का, बल्कि हमारे संविधान निर्माताओं की पवित्र भावनाओं का भी अनादर किया है।
#WATCH प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा, "नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन सभी राज्यों की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। सब राज्यों की समान अनुपात में… pic.twitter.com/jJuc0vbdBC
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 18, 2026
परेशानी की जड़: परिसीमन और झूठ की राजनीति
विपक्ष द्वारा बिल के विरोध के पीछे दिए गए तर्कों, विशेषकर परिसीमन (De-limitation) के मुद्दे पर पीएम ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि विपक्ष राज्यों के बीच दरार पैदा करने के लिए झूठ फैला रहा है कि परिसीमन से कुछ राज्यों की सीटों की भागीदारी कम हो जाएगी।
प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया, “सरकार ने पहले दिन से स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व (Representation) कम नहीं होगा, बल्कि सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ेंगी। लेकिन कांग्रेस, जो विभाजनकारी राजनीति की विरासत अंग्रेजों से लेकर आई है, आज भी उसी ‘बांटो और राज करो’ के फार्मूले पर चल रही है।”
कांग्रेस पर प्रहार: “एंटी-रिफॉर्म और अटकाने वाली पार्टी”
पीएम मोदी ने कांग्रेस के कार्यबल (Work Culture) की आलोचना करते हुए उसे ‘एंटी-रिफॉर्म’ करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 40 वर्षों से लटके हुए इस हक को हम 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने का संकल्प लेकर आए थे, लेकिन कांग्रेस ने इसे ‘लटकाना, भटकाना और अटकाना’ अपनी नियति बना लिया है।
प्रधानमंत्री ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा, “मैंने संसद में भी प्रस्ताव दिया था कि आप आधी आबादी को उनका हक मिल जाने दीजिए, मैं इस ऐतिहासिक सुधार का पूरा क्रेडिट विज्ञापनों के जरिए विपक्ष को दे दूंगा। लेकिन महिलाओं के प्रति दकियानूसी सोच रखने वाले ये लोग अपने अहंकार और झूठ पर अड़े रहे।”
संकल्प अभी खत्म नहीं हुआ: “हमारा आत्मबल अजेय है”
संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी भावुक नजर आए, लेकिन उनका संकल्प और भी दृढ़ दिखा। उन्होंने देश की महिलाओं को विश्वास दिलाया कि यह पड़ाव अंतिम नहीं है।
“आज मेरे देश की माताएं, बहनें और बेटियां दुखी हैं, और मैं भी आपके इस दुख में शामिल हूँ। लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि हमारा प्रयास रुकेगा नहीं। हमारा आत्मबल अजेय है। महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाली हर बाधा को हम खत्म करेंगे। ये पार्टियां नारी शक्ति को संसद और विधानसभाओं तक पहुंचने से ज्यादा देर तक नहीं रोक पाएंगी। हमारे पास आगे भी मौके आएंगे और हम इस महायज्ञ को पूरा करेंगे।”
राजनीतिक गलियारों में हलचल
प्रधानमंत्री के इस आक्रामक संबोधन के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम ने इस मुद्दे को सीधे तौर पर ‘जनता की अदालत’ में ले जाकर 2029 के चुनावों और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक बड़ा मुद्दा तैयार कर दिया है। जहाँ बीजेपी अब इसे ‘नारी शक्ति के अपमान’ के रूप में प्रचारित करेगी, वहीं विपक्ष के लिए इस ‘महिला विरोधी’ छवि के ठप्पे से बचना एक बड़ी चुनौती होगी।
महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का गिरना भारतीय संसदीय इतिहास की एक दुखद घटना हो सकती है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इसे एक नई राजनीतिक लड़ाई का आधार बना दिया है। उनके संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘नारी शक्ति वंदन’ का यह संकल्प अब केवल एक विधायी मुद्दा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप लेगा।



