
देहरादून/अल्मोड़ा: नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को लेकर देश की सियासत में उबाल आ गया है। जहाँ केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी इस बिल के पारित न हो पाने के लिए विपक्ष को कटघरे में खड़ा कर रही है, वहीं उत्तराखंड में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने एक संयुक्त हमले में भाजपा पर “झूठ परोसने” और महिलाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है।
गोदियाल का बड़ा सवाल: ‘पहले से तैयार तख्तियां क्या साबित करती हैं?’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा के उस नैरेटिव को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें विपक्ष को महिला विरोधी बताया जा रहा है। देहरादून में पत्रकारों से वार्ता करते हुए गोदियाल ने एक चौंकाने वाला तर्क सामने रखा। उन्होंने कहा, “सदन में बिल गिरने के तुरंत बाद भाजपा की महिला सांसदों के हाथों में विरोध प्रदर्शन वाली तख्तियां और बैनर दिखाई दिए। सवाल यह है कि यदि भाजपा इस बिल को पास कराने के प्रति गंभीर थी, तो हार की स्थिति में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पहले से तैयार कैसे थी?”
गोदियाल ने तंज कसते हुए कहा कि यह सब एक पूर्व-नियोजित नाटक था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा दरअसल इस बिल को पारित नहीं करना चाहती थी, बल्कि वह केवल विपक्ष के खिलाफ एक माहौल बनाना चाहती थी। उन्होंने भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह बिल किसी बड़े उद्योगपति के फायदे का होता, तो भाजपा साम-दाम-दंड-भेद लगाकर इसे पास करवा लेती, लेकिन महिलाओं के अधिकार के मामले में उन्होंने केवल राजनीति की।
‘अब भाजपा के बीज के लिए जमीन तैयार नहीं’
गणेश गोदियाल ने कृषि का उदाहरण देते हुए भाजपा की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कोई भी नैरेटिव या ‘फसल’ तभी उगती है जब जमीन उपजाऊ हो और बीज सक्षम हो। गोदियाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भाजपा ने देश की जनता को गुमराह करने का जो बीज बोया है, उसके लिए अब देश की जमीन तैयार नहीं है। लोग अब भाजपा की चाल और चरित्र को गहराई से समझ चुके हैं।”
उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्ष पर हमला करने की परंपरा की भी आलोचना की। गोदियाल के अनुसार, गरिमामयी मंचों का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग करना देश के लोकतांत्रिक संसाधनों का अपमान है।
कुंजवाल का प्रहार: ‘जनगणना और परिसीमन का जाल’
इधर, अल्मोड़ा में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने केंद्र सरकार की मंशा पर तकनीकी सवाल उठाए। कुंजवाल ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक रही है और 2023 में जब संसद में इसे पेश किया गया था, तब विपक्ष ने सकारात्मक भूमिका निभाई थी।
उन्होंने केंद्र सरकार पर ‘अधिसूचना की राजनीति’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 16 अप्रैल 2026 को जारी की गई अधिसूचना केवल चुनावी लाभ लेने की एक कोशिश है। कुंजवाल ने सवाल किया कि 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस महत्वपूर्ण कानून को जनगणना और परिसीमन की जटिलताओं में क्यों उलझाया गया? उनके अनुसार, यह बिल को अनिश्चितकाल के लिए टालने की एक सोची-समझी रणनीति थी।
राज्यों की सीटों में फेरबदल की आशंका
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने एक और गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार परिसीमन के जरिए राज्यों की सीटों के समीकरण बदलना चाहती थी ताकि भविष्य में राजनीतिक लाभ लिया जा सके। कुंजवाल ने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने इस खतरनाक योजना को समय रहते पहचान लिया और इसका विरोध किया। उन्होंने देश की महिलाओं से अपील की कि वे भाजपा के भ्रामक प्रचार में न आएं और तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय लें।
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक विधायी मुद्दा न रहकर 2026 के राजनीतिक परिदृश्य का सबसे बड़ा हथियार बनता जा रहा है। जहाँ भाजपा इसे अपनी उपलब्धि और विपक्ष की ‘रुकावट’ के तौर पर पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे भाजपा का ‘छलावा’ करार देकर काउंटर-अटैक शुरू कर दिया है। उत्तराखंड के इन दो बड़े नेताओं के बयानों ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह विवाद थमने वाला नहीं है।



