उत्तर प्रदेश ATS की बड़ी कार्रवाई: नोएडा में ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, टारगेट किलिंग और धमाकों की साजिश नाकाम

नोएडा/लखनऊ | विशेष संवाददाता उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने गुरुवार को एक बेहद संवेदनशील और बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और सीमा पार बैठे गैंगस्टर्स के खतरनाक मंसूबों को मिट्टी में मिला दिया है। एटीएस ने नोएडा के पास से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है, जो पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे। पकड़े गए आरोपियों के पास से हथियार, गोला-बारूद और आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ रची जा रही एक गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।
डिजिटल जाल: इंस्टाग्राम से स्लीपर सेल तक का सफर
यूपी एटीएस आतंकी गिरफ्तारी के इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि दुश्मन अब सोशल मीडिया को अपना सबसे बड़ा हथियार बना रहा है। जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट जैसे हैंडलर्स, कुछ पाकिस्तानी यूट्यूबर्स के साथ मिलकर भारतीय युवाओं को अपना शिकार बना रहे थे।
एटीएस की रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को पहले धार्मिक रूप से कट्टर (रेडिकलाइज) किया जाता था और फिर उन्हें आर्थिक लालच देकर देश विरोधी गतिविधियों के लिए उकसाया जाता था। नोएडा से गिरफ्तार हुए तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला अली खान और समीर खान इसी डिजिटल रेडिकलाइजेशन का शिकार हुए और देखते ही देखते आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बन गए।
23 अप्रैल: नोएडा में बिछाया गया एटीएस का जाल
खुफिया सूचनाओं की पुष्टि होने के बाद, एटीएस की टीम ने 23 अप्रैल 2026 को नोएडा में घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों की शिनाख्त इस प्रकार हुई है:
-
तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला अली खान (20 वर्ष): निवासी बागपत, हाल पता मेरठ।
-
समीर खान (20 वर्ष): निवासी पुरानी सीमापुरी, दिल्ली।
तलाशी के दौरान इनके कब्जे से एक 32 बोर की पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस, एक घातक चाकू और दो मोबाइल फोन मिले हैं। इन मोबाइल फोन की प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच में पाकिस्तानी नंबरों से हुई बातचीत और वॉइस नोट्स बरामद हुए हैं, जो उनकी आतंकी संलिप्तता की पुष्टि करते हैं।
टारगेट किलिंग और ग्रेनेड अटैक की थी तैयारी
पूछताछ के दौरान तुषार उर्फ हिजबुल्ला ने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं। उसने कबूल किया कि वह पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी के लगातार संपर्क में था। भट्टी ने उसे दिल्ली-NCR के कुछ संवेदनशील इलाकों और विशिष्ट व्यक्तियों के घरों पर ग्रेनेड फेंकने का टास्क दिया था।
इतना ही नहीं, इस काम के लिए उसे 50 हजार रुपये की पेशगी (एडवांस) दी गई थी और काम पूरा होने के बाद 2.5 लाख रुपये और देने का वादा किया गया था। इस साजिश का सबसे डरावना हिस्सा यह था कि आरोपियों को काम पूरा करने के बाद पासपोर्ट बनवाकर दुबई के रास्ते पाकिस्तान ले जाने की भी योजना थी, ताकि वे कानून की पकड़ से दूर रह सकें।
‘TTH’ का उदय और दीवारों पर धमकियां
गिरफ्तार समीर खान को एक अलग तरह का काम सौंपा गया था। उसे भारत में ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH) नामक एक नए कट्टरपंथी समूह का प्रचार करने और सार्वजनिक दीवारों पर TTH लिखने का जिम्मा मिला था। इसका उद्देश्य युवाओं को इस नए आतंकी ब्रांड के साथ जोड़ना और दहशत फैलाना था। समीर और तुषार मिलकर टारगेटेड हत्याओं के लिए रेकी कर रहे थे। जांच में यह भी पता चला है कि वे कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स को लाइव अपडेट्स देते थे और विरोधियों को धमकियां दिलाते थे।
पुलिस कस्टडी रिमांड और आगे की जांच
एटीएस ने इस पूरे मामले में थाना-एटीएस, लखनऊ में मुकदमा संख्या 03/2026 पंजीकृत किया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और कठोर आतंकवाद विरोधी कानून ‘यूएपीए’ (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी केवल एक शुरुआत है। यूपी एटीएस आतंकी गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) की तैयारी कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं। एजेंसी को संदेह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कुछ अन्य युवा भी इस मॉड्यूल से जुड़े हो सकते हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गैंगस्टर-टेरर’ नेक्सस भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरा है। पाकिस्तान अब खालिस्तानी और कश्मीरी अलगाववाद के साथ-साथ स्थानीय गैंगस्टर्स का इस्तेमाल कर भारत के छोटे शहरों में स्लीपर सेल तैयार कर रहा है। यूपी एटीएस की इस त्वरित कार्रवाई ने निश्चित रूप से एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया है।
नोएडा से हुई यह गिरफ्तारी देश विरोधी ताकतों को एक कड़ा संदेश है। एटीएस का कहना है कि वे डिजिटल स्पेस पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं और आने वाले दिनों में कुछ और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां संभव हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें ताकि उन्हें रेडिकलाइजेशन के इस खतरनाक जाल से बचाया जा सके।



