
नासिक | विशेष संवाददाता महाराष्ट्र के नासिक जिले के लासलगांव क्षेत्र से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने आध्यात्मिकता की आड़ में चल रहे काले कारनामों को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है। खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले महेशगिरी उर्फ महेश दिलीप काकडे के खिलाफ पुलिस ने बलात्कार और महाराष्ट्र जादू-टोना विरोधी अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने ‘दैवीय शक्ति’ और ‘भूत-प्रेत बाधा’ का डर दिखाकर एक महिला का शारीरिक और मानसिक शोषण किया।
‘गाणगापुर मठ’ की तर्ज पर बनाया था मायाजाल
आरोपी महेशगिरी ने निफाड तालुका के धरणगांव (खड़क) गांव में अपनी गतिविधियां संचालित करने के लिए एक ठिकाना बना रखा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, उसने इस जगह को प्रसिद्ध गाणगापुर मठ की तर्ज पर विकसित किया था ताकि लोगों की धार्मिक भावनाओं का लाभ उठाया जा सके। वह भोले-भाले ग्रामीणों और पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अपना शिकार बनाता था।
ढोंगी बाबा महेशगिरी मामला तब प्रकाश में आया जब एक साहसी पीड़िता ने अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) के माध्यम से पुलिस का दरवाजा खटखटाया। जांच में पता चला कि आरोपी लोगों को यह विश्वास दिलाता था कि उनकी समस्याओं की जड़ ‘भूत-प्रेत’ और ‘नकारात्मक ऊर्जा’ है। इससे मुक्ति के लिए वह उन्हें ‘पापनाशक कुंड’ में स्नान करने और औदुंबर के पेड़ के चक्कर लगाने जैसी अजीबोगरीब सजाएं देता था।
‘दैवीय विधि’ के नाम पर होटल में ले जाकर किया दुष्कर्म
पीड़ित महिला द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी ने सबसे पहले उसकी जन्मतिथि और कुंडली की जानकारी लेने के बहाने उससे संपर्क बढ़ाया। धीरे-धीरे उसने विश्वास जीता और फिर अश्लील संदेश (Obscene messages) भेजना शुरू कर दिया। जब महिला ने इसका विरोध किया, तो उसे ‘दैवीय प्रकोप’ का डर दिखाया गया।
महिला का आरोप है कि आरोपी उसे नासिक-त्र्यंबक रोड स्थित एक लॉज में ‘विशेष दैवीय विधि’ संपन्न करने के बहाने ले गया। वहां उसने महिला का यौन शोषण किया और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें भी खींच लीं। इन तस्वीरों और वीडियो के आधार पर वह महिला को ब्लैकमेल करने लगा। पीड़िता ने बताया कि गले में भारी-भरकम रुद्राक्ष धारण करने वाला यह ढोंगी बाबा खुद को साक्षात ईश्वरीय अवतार बताता था ताकि कोई उसके खिलाफ आवाज न उठा सके।
साल 2024 में भी शोषण का सिलसिला रहा जारी
प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी का दुस्साहस इतना बढ़ गया था कि उसने साल 2024 में भी महिला को अपनी हवस का शिकार बनाया। वह लगातार ‘दैवीय डर’ और सामाजिक बदनामी की धमकी देता रहा। हार मानकर पीड़िता ने अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) के पदाधिकारियों से संपर्क किया। समिति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक के ग्रामीण पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद, लासलगांव पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और महाराष्ट्र नरबलि एवं अन्य अमानवीय, अनिष्टकारी व अघोरी प्रथा और जादू-टोना विरोधी अधिनियम (2013) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कई अन्य महिलाओं के शिकार होने की आशंका
इस मामले के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में आशंका जताई है कि वह अकेली नहीं है, बल्कि आरोपी ने इसी तरह का डर दिखाकर और ‘दैवीय विधि’ का झांसा देकर कई अन्य महिलाओं का भी यौन शोषण किया होगा। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी के किसी गिरोह या अन्य सहयोगियों का भी इसमें हाथ है।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के पदाधिकारियों ने जनता से अपील की है कि यदि कोई अन्य व्यक्ति भी इस ढोंगी बाबा का शिकार हुआ है, तो वे बिना किसी डर के सामने आएं। समिति का कहना है कि धर्म और अध्यात्म के नाम पर इस तरह का शोषण समाज के लिए कलंक है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा
लासलगांव पुलिस ने आरोपी के धरणगांव स्थित ठिकाने पर छापा मारकर कुछ दस्तावेज और सामग्री बरामद की है। पुलिस आरोपी महेशगिरी की तलाश में जुटी है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है। जांच अधिकारी ने बताया, “हमने पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया है और लॉज के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। तकनीकी साक्ष्यों (मोबाइल चैट और कॉल रिकॉर्ड) के आधार पर आरोपी के खिलाफ शिकंजा कसा जा रहा है।”
ढोंगी बाबा महेशगिरी मामला ने एक बार फिर महाराष्ट्र के उस कानून की प्रासंगिकता को सिद्ध कर दिया है जिसे अंधश्रद्धा के खिलाफ डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने लंबी लड़ाई के बाद बनवाया था। नासिक पुलिस ने लोगों से आग्रह किया है कि वे किसी भी तरह के ‘चमत्कार’ या ‘भूत-प्रेत’ के झांसे में न आएं और अपनी समस्याओं के लिए वैज्ञानिक या कानूनी रास्ता अपनाएं।
आध्यात्मिकता के आवरण में छिपे ऐसे ‘भेड़ियों’ से समाज को सतर्क रहने की आवश्यकता है। महेशगिरी जैसे लोग न केवल कानून का उल्लंघन करते हैं, बल्कि वास्तविक संतों और धार्मिक मान्यताओं की छवि को भी धूमिल करते हैं। अब देखना यह होगा कि नासिक पुलिस कितनी जल्दी इस भगोड़े बाबा को सलाखों के पीछे भेजती है।



