नई दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई: भारतीय लोकतंत्र के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। देश के दो बड़े राज्यों—पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु—में सत्ता के संघर्ष का निर्णायक अध्याय शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर प्रथम चरण के तहत मतदान हो रहा है, तो वहीं दक्षिण भारत के दुर्ग तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर मतदाता आज नई सरकार के चयन के लिए कतारों में खड़े हैं।
सुबह 7 बजते ही मतदान केंद्रों पर हलचल शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, मतदान शाम 6 बजे तक चलेगा, हालांकि शाम 6 बजे तक लाइन में लगने वाले अंतिम मतदाता को भी अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी जाएगी।
बंगाल में पहले चरण का घमासान: भाजपा और टीएमसी में सीधी टक्कर
पश्चिम बंगाल में सत्ता की लड़ाई इस बार ऐतिहासिक मोड़ पर है। राज्य के 16 जिलों की 152 सीटों पर आज कुल 1,478 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम (EVM) में कैद होने जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए जहां यह चुनाव अपनी सत्ता बचाने की अग्निपरीक्षा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ‘सोनार बांग्ला’ के नारे के साथ पूरी ताकत झोंक दी है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग करेंगे। इनमें 1.84 करोड़ पुरुष, 1.75 करोड़ महिला और 465 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं। प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं ताकि मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हो सके।
तमिलनाडु: स्टालिन की साख और सत्ता की चुनौती
दक्षिण की राजनीति के केंद्र तमिलनाडु में आज एक ही चरण में सभी 234 सीटों पर फैसला होना है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार के लिए सत्ता में वापसी करना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। तमिलनाडु की राजनीति में अक्सर ‘सत्ता परिवर्तन’ का रिवाज रहा है, लेकिन इस बार त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय मुकाबले ने समीकरणों को उलझा दिया है। भाजपा यहां अपनी जड़ों को मजबूत करने की कोशिश में है, जबकि क्षेत्रीय दल अपनी विरासत बचाने की जुगत में हैं।
चुनाव आयोग की सख्त हिदायत: निर्वाचन क्षेत्र नहीं छोड़ सकेंगे उम्मीदवार
चुनाव की शुचिता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने इस बार कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार 23 अप्रैल की सुबह 6 बजे से मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से बाहर नहीं जा सकेंगे।
एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी के अनुसार, “उम्मीदवारों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने क्षेत्र में मौजूद रहकर मतदान को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने में सहयोग दें। किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या ऐसी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो।”
भीषण गर्मी और लू का साया: मतदाताओं के लिए चुनौती
मौसम विभाग की चेतावनी ने राजनीतिक दलों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल सहित पूरे उत्तर और मध्य भारत में भीषण लू (Heatwave) का अलर्ट जारी किया गया है। तापमान के 42-44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान प्रतिशत पर गर्मी का सीधा असर दिख सकता है। जानकारों के अनुसार, अधिकांश मतदाता सुबह 11 बजे से पहले और शाम 4 बजे के बाद ही घरों से निकलेंगे। दोपहर के समय मतदान केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रह सकता है, जिसे देखते हुए चुनाव आयोग ने पेयजल और छाया की विशेष व्यवस्था की है।
सियासी समीकरण: किसके सिर सजेगा ताज?
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की ‘मां, माटी, मानुष’ की राजनीति के सामने भाजपा का ‘परिवर्तन’ का नारा कितना प्रभावी होगा, यह आज के मतदान से तय होना शुरू हो जाएगा। बंगाल के इस चरण में जंगलमहल और ग्रामीण इलाकों की सीटों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
वहीं, तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के दो ध्रुवों के बीच भाजपा की एंट्री ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) अपने विकास कार्यों और क्षेत्रीय गौरव के नाम पर वोट मांग रही है, तो विपक्षी दल सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) का फायदा उठाने की कोशिश में हैं।
आंकड़ों की नजर में चुनाव
| विवरण | पश्चिम बंगाल (प्रथम चरण) | तमिलनाडु (सभी सीटें) |
| कुल सीटें | 152 | 234 |
| कुल उम्मीदवार | 1,478 | 3,500+ (अनुमानित) |
| कुल मतदाता | 3.60 करोड़ | 6.20 करोड़+ |
| मतदान केंद्र | 44,376 | 68,000+ |
लोकतंत्र का भविष्य जनता के हाथ
आज हो रहे मतदान का परिणाम न केवल राज्यों की दिशा तय करेगा, बल्कि आगामी राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक बड़ा संकेत होगा। बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को निर्धारित है, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
आज शाम 6 बजे जब ईवीएम सील होंगी, तो कई दिग्गजों की राजनीतिक किस्मत लॉक हो जाएगी। क्या बंगाल में ‘खेला’ होगा या ‘कमल’ खिलेगा? और क्या तमिलनाडु में ‘उगता सूरज’ अपनी चमक बरकरार रख पाएगा? इन सभी सवालों के जवाब 4 मई को ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल, सभी की निगाहें उन लंबी कतारों पर हैं, जो धूप और गर्मी को मात देकर लोकतंत्र को मजबूत करने निकली हैं।


