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उत्तराखंड: गौमुख ट्रैक फिलहाल बंद, भारी बर्फबारी बनी बड़ी वजह, यात्रियों को करना होगा इंतजार

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध गौमुख ट्रैक पर फिलहाल आम यात्रियों की आवाजाही बंद कर दी गई है। इसकी मुख्य वजह ऊंचाई वाले इलाकों में हुई भारी बर्फबारी है, जिसके चलते ट्रैक पर कई फीट तक बर्फ जमा हो गई है और रास्ता पूरी तरह से बाधित हो गया है। प्रशासन और वन विभाग की टीमों द्वारा लगातार स्थिति का जायजा लिया जा रहा है, लेकिन अभी हालात ऐसे नहीं हैं कि आम पर्यटकों और श्रद्धालुओं को वहां जाने की अनुमति दी जा सके।

गंगोत्री नेशनल पार्क के गेट भले ही 1 अप्रैल से खोल दिए गए हों, लेकिन गौमुख तक जाने वाला ट्रैक अभी भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। यही कारण है कि ट्रैक खुलने के लगभग दो हफ्ते बाद भी यहां यात्रियों के प्रवेश पर रोक जारी है। हाल ही में पार्क अधिकारियों और गढ़वाल हिमालय ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन की संयुक्त टीम ने ट्रैक का निरीक्षण किया। इस टीम ने कनखू बैरियर से भोजगढ़ी तक करीब 11 किलोमीटर पैदल मार्ग का निरीक्षण किया, लेकिन भोजगढ़ी नाले के पास अत्यधिक बर्फ होने के कारण उन्हें बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा।

निरीक्षण दल में शामिल अधिकारियों का कहना है कि इस समय ट्रैक पर कई जगहों पर बर्फ की मोटी परत जमी हुई है, जिससे रास्ता न सिर्फ फिसलन भरा हो गया है बल्कि कई जगहों पर पूरी तरह से ढंका हुआ है। ऐसे में आम यात्रियों के लिए यह ट्रैक बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है। हालांकि अनुभवी पर्वतारोहियों के लिए स्थिति थोड़ी अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षित और अनुभवी पर्वतारोहियों के लिए ट्रैकिंग संभव हो सकती है, लेकिन इसके लिए भी विशेष अनुमति और सुरक्षा उपाय जरूरी होंगे।

गढ़वाल हिमालय ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि पर्वतारोहण गतिविधियों के लिए मार्ग में कोई बड़ी तकनीकी बाधा नहीं है। इसलिए प्रशासन को पर्वतारोहियों के लिए ट्रैक खोलने पर विचार करना चाहिए। वहीं गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक हरीश नेगी ने कहा कि यदि आने वाले दिनों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी नहीं होती है, तो संभव है कि एक सप्ताह के भीतर पर्वतारोहियों के लिए ट्रैक खोल दिया जाए।

हालांकि आम पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि ट्रैक पर स्थित आश्रम और जीएमवीएन (गढ़वाल मंडल विकास निगम) के गेस्ट हाउस अभी तक पूरी तरह से संचालित नहीं हो पाए हैं। ये सुविधाएं यात्रियों के ठहरने और सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं। जब तक ये व्यवस्थाएं पूरी तरह से बहाल नहीं हो जातीं, तब तक आम लोगों के लिए ट्रैक खोलना संभव नहीं है।

गौमुख ट्रैक धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह ट्रैक गंगोत्री से शुरू होकर लगभग 18 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए गौमुख तक पहुंचता है, जो भागीरथी नदी (गंगा) का उद्गम स्थल है। आमतौर पर इस ट्रैक को दो दिनों में पूरा किया जाता है। पहले दिन यात्री गंगोत्री से भोजबासा तक करीब 14 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं, जिसमें लगभग 6 से 7 घंटे का समय लगता है। इसके बाद दूसरे दिन भोजबासा से गौमुख तक करीब 4 किलोमीटर की दूरी तय कर दर्शन किए जाते हैं और फिर वापसी की जाती है।

यह ट्रैक हिमालय की अद्भुत सुंदरता, बर्फ से ढकी चोटियों, भागीरथी शृंखला के शानदार दृश्य और तपोवन की शांति के लिए जाना जाता है। हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु, प्रकृति प्रेमी और ट्रैकर्स यहां पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मौसम की मार ने इस खूबसूरत यात्रा को फिलहाल रोक दिया है।

स्थानीय प्रशासन और वन विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही मौसम अनुकूल होगा और ट्रैक पूरी तरह से सुरक्षित घोषित किया जाएगा, वैसे ही इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। तब तक यात्रियों को धैर्य रखने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

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