
नैनीताल: देवभूमि उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और गतिशील बनाने के उद्देश्य से नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य की निचली अदालतों में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, जिला जज, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) और सिविल जज (सीनियर डिवीजन) स्तर के दर्जनों अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है।
इस स्थानांतरण प्रक्रिया में देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे महत्वपूर्ण जिलों के न्यायिक ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिले हैं।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव
न्यायिक सेवाओं में शीर्ष स्तर पर हुए बदलावों के तहत, मजहर सुल्तान, जो वर्तमान में कमर्शियल टैक्स ट्रिब्यूनल (देहरादून) के चेयरमैन थे, उन्हें अब उत्तरकाशी का जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वहीं, अल्मोड़ा फैमिली कोर्ट की जज नीना अग्रवाल को पदोन्नत करते हुए रुद्रप्रयाग का जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से एक और बड़ा फैसला लेते हुए सहदेव सिंह को रुद्रप्रयाग के जिला जज पद से हटाकर शासन में प्रमुख सचिव (विधायी एवं संसदीय कार्य) के महत्वपूर्ण पद के लिए अनुशंसित किया गया है। इसी प्रकार, उत्तरकाशी के जिला जज गुरुबख्श सिंह अब देहरादून में वाणिज्यिक कर न्यायाधिकरण के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे।
देहरादून और हरिद्वार में एडीजे स्तर पर फेरबदल
राजधानी देहरादून और रुड़की-हरिद्वार बेल्ट में न्यायिक कार्यों की अधिकता को देखते हुए कई अनुभवी अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है:
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मोनिका मित्तल: काशीपुर फैमिली कोर्ट से स्थानांतरित होकर अब देहरादून में प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कमान संभालेंगी।
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महेश चंद्र कौशिवा: इन्हें प्रथम एडीजे से द्वितीय एडीजे (देहरादून) के पद पर तैनात किया गया है।
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अंबिका पंत: रुड़की से स्थानांतरित कर इन्हें उधम सिंह नगर में एफटीसी/एडीजे (पॉक्सो) की जिम्मेदारी दी गई है।
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रीना नेगी: कोटद्वार से रुड़की में प्रथम एडीजे के रूप में स्थानांतरित हुई हैं।
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आशुतोष कुमार मिश्रा: इन्हें उधम सिंह नगर से द्वितीय एडीजे रुड़की बनाया गया है।
पॉक्सो (POCSO) अदालतों में भी संवेदनशीलता को देखते हुए बदलाव किए गए हैं। रजनी शुक्ला को देहरादून पॉक्सो कोर्ट से कोटद्वार भेजा गया है, जबकि मंजू सिंह मुंडे खटीमा से आकर अब देहरादून में पॉक्सो मामलों की सुनवाई करेंगी।
रजिस्ट्रार (न्यायिक) और शासन में नियुक्तियां
हाईकोर्ट के प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव की झलक दिखी है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) धर्मेंद्र सिंह अधिकारी को अब हल्द्वानी में द्वितीय एडीजे नियुक्त किया गया है। उनकी जगह रुड़की फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रधान जज धीरेंद्र भट्ट को हाईकोर्ट का नया रजिस्ट्रार (न्यायिक) नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, अश्विनी गौड़ को उत्तराखंड शासन में अपर सचिव (विधि) के पद के लिए अनुशंसित किया गया है।
सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और CJM स्तर पर सर्जरी
निचली अदालतों की कार्यप्रणाली में ‘चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट’ (CJM) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस स्तर पर भी व्यापक फेरबदल किया गया है:
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रवि प्रकाश: नैनीताल से स्थानांतरित होकर अब राजधानी देहरादून के नए CJM होंगे।
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रिंकी साहनी: देहरादून से हटाकर इन्हें टिहरी का CJM बनाया गया है।
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रवि शंकर मिश्रा: विकासनगर से अब नैनीताल के CJM पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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मोहम्मद याकूब: टिहरी से अल्मोड़ा के CJM नियुक्त किए गए हैं।
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सुमन: रुद्रप्रयाग से पिथौरागढ़ की नई CJM होंगी।
न्याय वितरण प्रणाली को गति देने का प्रयास
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड न्यायिक अधिकारी स्थानांतरण 2026 की यह सूची केवल नियमित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि लंबित मामलों के निस्तारण और नई ऊर्जा के साथ न्यायिक कार्यों को गति देने का एक प्रयास है। देहरादून जैसे जिलों में एसीजेएम (ACJM) स्तर पर भी क्रमवार बदलाव किए गए हैं, जहाँ संजीव कुमार, संदीप सिंह भंडारी और रमेश चंद्र जैसे अधिकारियों को नई भूमिकाएं दी गई हैं।
हल्द्वानी और काशीपुर जैसे व्यापारिक केंद्रों में भी एनआई एक्ट (NI Act) और वाणिज्यिक मामलों की सुनवाई के लिए अनुभवी जजों जैसे शाची शर्मा और आरती सरोहा की तैनाती की गई है।
जनहित और प्रशासनिक सुगमता
नैनीताल हाईकोर्ट के इस आदेश से स्पष्ट है कि दूरस्थ क्षेत्रों जैसे पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग में अनुभवी न्यायाधीशों को भेजकर वहां की न्याय प्रणाली को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, पारिवारिक न्यायालयों (Family Courts) और पॉक्सो अदालतों में भी अधिकारियों की अदला-बदली कर कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपना नया कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बड़े फेरबदल के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश की विभिन्न अदालतों में मुकदमों की सुनवाई की प्रक्रिया में तेजी आएगी और आम जनता को सुलभ न्याय मिल सकेगा।



