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उत्तराखंडफीचर्ड

पहाड़ में ‘देवदूत’ बनी हेली एम्बुलेंस: रुद्रप्रयाग में मौत को मात देकर एम्स पहुँचा हृदय रोगी, प्रशासन की तत्परता ने बचाई जान

The Hill India News
Last updated: April 16, 2026 2:10 am
The Hill India News
Published: April 16, 2026
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रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियां किसी से छिपी नहीं हैं, लेकिन जब सिस्टम और संवेदनाएं एक साथ काम करें, तो नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अभूतपूर्व तत्परता से एक बार फिर एक अनमोल जिंदगी को बचाने में सफलता प्राप्त हुई है। हार्ट अटैक से जूझ रहे एक 41 वर्षीय व्यक्ति को समय की बर्बादी किए बिना एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश पहुँचाया गया, जहाँ समय पर मिले उपचार ने उसकी जान बचा ली।

Contents
संकट के वे चंद मिनट: जब थमी थीं कुंदीलाल की सांसेंप्रशासन और यूकाडा का ‘लाइफ-सेविंग’ तालमेलएम्स ऋषिकेश में सफल लैंडिंग और उपचारजनवरी 2026: जब एक प्रवक्ता के लिए भी ‘वरदान’ बनी थी यह सेवा‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व और बदलती स्वास्थ्य व्यवस्थाक्षेत्रीय जनता ने सराहा प्रयास

संकट के वे चंद मिनट: जब थमी थीं कुंदीलाल की सांसें

मामला रुद्रप्रयाग के जखोली क्षेत्र का है। यहाँ के निवासी कुंदीलाल (41 वर्ष) को अचानक सीने में तेज दर्द और घबराहट की शिकायत हुई। परिजनों द्वारा उन्हें तत्काल जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग लाया गया। अस्पताल पहुँचते ही चिकित्सकों ने जांच की और पाया कि मामला ‘मेजर हार्ट अटैक’ का है। मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ रही थी और हर बीतता सेकंड उनके जीवन पर भारी पड़ रहा था।

जिला चिकित्सालय के हृदय रोग विशेषज्ञों और इमरजेंसी टीम ने बिना देर किए प्राथमिक उपचार शुरू किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने तुरंत थ्रोम्बोलिसिस (clot-busting medication) और इंट्यूबेशन जैसी जटिल प्रक्रियाएं पूरी कीं। हालांकि, पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच मरीज को वेंटिलेटर और कार्डियक केयर की तत्काल आवश्यकता थी, जो केवल उच्च संस्थानों में ही संभव थी।

प्रशासन और यूकाडा का ‘लाइफ-सेविंग’ तालमेल

जैसे ही डॉक्टरों ने मरीज को रेफर करने की सलाह दी, रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) से संपर्क साधा। सड़क मार्ग से ऋषिकेश की दूरी तय करने में लगने वाले 5 से 6 घंटे मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकते थे, इसलिए रुद्रप्रयाग हेली एम्बुलेंस सेवा को तैनात करने का निर्णय लिया गया।

कुछ ही समय के भीतर गुलाबराय हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर लैंड हुआ। मरीज को एम्बुलेंस से हेलीपैड तक लाया गया और वहां से उन्हें एयरलिफ्ट कर सीधे एम्स ऋषिकेश के लिए रवाना किया गया। उड़ान के दौरान भी हेली एम्बुलेंस की मेडिकल टीम ने कुंदीलाल के वाइटल्स पर लगातार नजर रखी और आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं जारी रखीं।

एम्स ऋषिकेश में सफल लैंडिंग और उपचार

एम्स ऋषिकेश की इमरजेंसी यूनिट को पहले ही अलर्ट कर दिया गया था। जैसे ही हेलीकॉप्टर पहुँचा, मरीज को तुरंत कार्डियक आईसीयू में शिफ्ट किया गया। एम्स के चिकित्सकों के अनुसार, थ्रोम्बोलिसिस की प्रक्रिया जिला चिकित्सालय में ही हो जाने के कारण मरीज के हृदय की मांसपेशियों को होने वाला नुकसान कम हुआ। वर्तमान में कुंदीलाल की हालत स्थिर बताई जा रही है और वे विशेषज्ञों की देखरेख में उपचाराधीन हैं।

जनवरी 2026: जब एक प्रवक्ता के लिए भी ‘वरदान’ बनी थी यह सेवा

रुद्रप्रयाग में जीवन बचाने का यह पहला मामला नहीं है। इसी साल जनवरी 2026 में भी प्रशासन ने इसी तरह की मुस्तैदी दिखाई थी। अगस्त्यमुनि विकासखंड के राजकीय इंटर कॉलेज बीना में कार्यरत एक प्रवक्ता की तबीयत अचानक स्कूल में ही खराब हो गई थी। प्रारंभिक जांच में पता चला कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) हुआ है। उस समय भी विद्यालय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से उन्हें समय रहते एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश भेजा गया था, जिससे उनकी जान बच सकी थी।

‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व और बदलती स्वास्थ्य व्यवस्था

चिकित्सा विज्ञान में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक जैसी स्थितियों में पहले एक घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। यदि इस समय के भीतर उचित उपचार मिल जाए, तो जान बचने की संभावना 90% तक बढ़ जाती है। उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में, जहाँ ऊबड़-खाबड़ रास्ते और लंबी दूरियां उपचार में बाधा बनती हैं, वहाँ रुद्रप्रयाग हेली एम्बुलेंस सेवा एक गेम-चेंजर साबित हो रही है।

जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग ने इस सफल रेस्क्यू पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि:

“हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूरी की वजह से किसी की जान न जाए। यूकाडा और स्वास्थ्य विभाग के बीच का यह समन्वय भविष्य में और भी सशक्त किया जाएगा ताकि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी त्वरित चिकित्सा सहायता मिल सके।”

क्षेत्रीय जनता ने सराहा प्रयास

कुंदीलाल के परिजनों और स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग का आभार जताया है। लोगों का कहना है कि जिस तरह से सरकारी मशीनरी ने एक आम नागरिक की जान बचाने के लिए हेली सेवा का प्रबंध किया, उसने जनता का भरोसा स्वास्थ्य प्रणाली पर और मजबूत किया है।

यह घटना दर्शाती है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो हिमालयी राज्यों की कठिन चुनौतियों के बावजूद भी आधुनिक तकनीक और तत्परता के बल पर मौत के मुंह से जिंदगी को खींचकर वापस लाया जा सकता है।

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