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उत्तराखंड: कर्णप्रयाग हिंसा के बाद हेमकुंड साहिब ट्रस्ट की बड़ी अपील, धर्म रक्षा के लिए हैं शस्त्र, दुरुपयोग से बचें श्रद्धालु

The Hill India News
Last updated: June 17, 2026 4:57 am
The Hill India News
Published: June 17, 2026
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चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हेमकुंड साहिब यात्रा पर आए कुछ निहंगों द्वारा किए गए उत्पात के बाद गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट, गोविंदघाट ने सिख श्रद्धालुओं से शांति, अनुशासन और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। ट्रस्ट ने स्पष्ट कहा है कि सिख धर्म में शस्त्रों का विशेष महत्व है, लेकिन उनका उद्देश्य धर्म और मानवता की रक्षा करना है, न कि उनका दुरुपयोग कर हिंसा फैलाना।

मंगलवार को कर्णप्रयाग में एक मामूली विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के दौरान कुछ निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद स्थिति बेकाबू हो गई। आरोप है कि कुछ लोगों ने तलवारें निकालकर हमला कर दिया, जिससे कई लोग घायल हो गए। घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद पूरे देश में इसकी आलोचना शुरू हो गई।

घटना के बाद गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट, गोविंदघाट ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए हिंसा की निंदा की और श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान संयम बरतने का आग्रह किया। ट्रस्ट के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने कहा कि हेमकुंड साहिब की यात्रा श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है। ऐसे में किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि या विवाद धार्मिक मर्यादाओं के विपरीत है।

श्रद्धालुओं से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील

ट्रस्ट द्वारा जारी आधिकारिक अपील में कहा गया है कि 23 मई से शुरू हुई श्री हेमकुंड साहिब यात्रा में अब तक हजारों श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं और प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र धाम पहुंच रहे हैं। ऐसे में सभी यात्रियों की जिम्मेदारी है कि वे यात्रा की गरिमा बनाए रखें और ऐसा कोई कार्य न करें जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे या कानून-व्यवस्था प्रभावित हो।

अपील में कहा गया कि श्रद्धालु यात्रा के दौरान अनावश्यक विवाद, बहस या टकराव से बचें। यदि किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है तो उसे शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास करें और जरूरत पड़ने पर प्रशासन या संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें।

धर्म रक्षा के लिए हैं शस्त्र, प्रदर्शन या दुरुपयोग के लिए नहीं

ट्रस्ट ने अपने संदेश में विशेष रूप से शस्त्रों के विषय को उठाया। कहा गया कि सिख धर्म में शस्त्र केवल आत्मरक्षा, धर्म की रक्षा और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक हैं। उनका उद्देश्य कभी भी भय पैदा करना, हिंसा फैलाना या निजी विवादों में इस्तेमाल करना नहीं रहा है।

ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे यात्रा के दौरान अनावश्यक रूप से शस्त्र साथ लेकर न चलें। विशेष रूप से छोटे बच्चों को किसी भी प्रकार के शस्त्र या धारदार हथियार साथ रखने से रोका जाए। ट्रस्ट का मानना है कि इससे यात्रा के दौरान सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

देवभूमि की पहचान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी

गुरुद्वारा प्रबंधन ने अपने संदेश में उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का भी उल्लेख किया। कहा गया कि उत्तराखंड को देवभूमि के रूप में जाना जाता है और यहां देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति की तलाश में आते हैं।

राज्य में बदरीनाथ धाम, केदारनाथ धाम, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे पवित्र तीर्थस्थल स्थित हैं। इन्हीं महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में श्री हेमकुंड साहिब का भी विशेष स्थान है। ऐसे में यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का कर्तव्य है कि वह राज्य की शांति, सद्भाव और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करे।

कानून हाथ में न लेने की सलाह

ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में न लें। यदि यात्रा के दौरान कोई विवाद या समस्या सामने आती है तो उसका समाधान हिंसा के बजाय प्रशासनिक माध्यमों से किया जाना चाहिए।

प्रबंधन ने कहा कि सरकार और प्रशासन द्वारा तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और यात्रा प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इसलिए किसी भी शिकायत या परेशानी की स्थिति में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना ही उचित रास्ता है।

इंद्रेश मैखुरी ने की सख्त कार्रवाई की मांग

कर्णप्रयाग की घटना को लेकर राज्य आंदोलनकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सिख तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच हुआ विवाद बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

मैखुरी ने कहा कि धार्मिक प्रतीक के रूप में रखे जाने वाले हथियारों का उपयोग मामूली विवादों में लोगों को डराने या उन पर हमला करने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने धारदार हथियार से हमला किया है तो यह गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि जिन लोगों ने तलवारों या अन्य धारदार हथियारों से हमला किया है, उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया जाए। उनका कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति को धार्मिक पहचान के आधार पर हिंसा की छूट नहीं दी जा सकती।

घटना ने खड़े किए कई सवाल

कर्णप्रयाग की यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि धार्मिक यात्राओं के दौरान अनुशासन और जिम्मेदारी को लेकर भी कई सवाल खड़े करती है। हेमकुंड साहिब जैसी पवित्र यात्रा में देशभर से श्रद्धालु शामिल होते हैं और ऐसी घटनाएं यात्रा की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।

यही कारण है कि गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट ने समय रहते हस्तक्षेप करते हुए श्रद्धालुओं को संयम, शांति और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करने का संदेश दिया है। ट्रस्ट का मानना है कि श्रद्धा और सेवा की भावना के साथ की गई यात्रा ही वास्तव में सफल और सार्थक होती है।

कर्णप्रयाग की घटना के बाद अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी यात्रा प्रबंधन पर टिकी हुई हैं। वहीं धार्मिक संगठनों और स्थानीय समाज की ओर से भी यह उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और हेमकुंड साहिब यात्रा अपनी पवित्रता, शांति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ आगे बढ़ती रहे।

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