By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: बंगाल उपचुनाव से पहले TMC में बड़ा सियासी संकट! चुनाव आयोग ने ‘तृणमूल कांग्रेस’ का नाम और ‘जोड़ाफूल’ सिंबल किया फ्रीज
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > बंगाल उपचुनाव से पहले TMC में बड़ा सियासी संकट! चुनाव आयोग ने ‘तृणमूल कांग्रेस’ का नाम और ‘जोड़ाफूल’ सिंबल किया फ्रीज
देशफीचर्ड

बंगाल उपचुनाव से पहले TMC में बड़ा सियासी संकट! चुनाव आयोग ने ‘तृणमूल कांग्रेस’ का नाम और ‘जोड़ाफूल’ सिंबल किया फ्रीज

The Hill India News
Last updated: September 18, 2026 7:48 am
The Hill India News
Published: September 18, 2026
Share
SHARE

ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट को बड़ा झटका, दोनों पक्षों को अलग नाम और चुनाव चिह्न चुनने का निर्देश; 6 अक्टूबर के नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव में नहीं इस्तेमाल कर सकेंगे TMC का आधिकारिक नाम-सिंबल

Contents
क्यों लिया गया चुनाव आयोग ने यह फैसला?दोनों गुटों को चुनना होगा नया नाम और सिंबल6 अक्टूबर को होने हैं उपचुनाव‘जोड़ाफूल’ सिंबल पर क्यों है इतनी अहमियत?विवाद पर आगे क्या होगा?बंगाल की राजनीति में बढ़ा असमंजस

पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। निर्वाचन आयोग ने 17 सितंबर 2026 को अंतरिम आदेश जारी करते हुए फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। यह रोक दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों पर लागू होगी। आयोग के इस फैसले के बाद आगामी उपचुनाव में दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना होगा।

क्यों लिया गया चुनाव आयोग ने यह फैसला?

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। एक पक्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, जबकि दूसरे पक्ष का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। दोनों ही पक्ष पार्टी पर अपना दावा पेश कर रहे हैं और खुद को वैध प्रतिनिधि बताते हुए चुनाव आयोग के समक्ष अपनी-अपनी दलीलें और दस्तावेज रख चुके हैं।

चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फिलहाल किसी एक गुट को पार्टी के मूल नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न का अधिकार देने के बजाय अंतरिम व्यवस्था लागू की है। आयोग के मुताबिक यह कदम दोनों प्रतिद्वंद्वी समूहों को समान स्थिति में रखने और आगामी उपचुनावों में मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।

दोनों गुटों को चुनना होगा नया नाम और सिंबल

आयोग के अंतरिम आदेश के मुताबिक दोनों गुट अब अपनी पसंद के तीन-तीन वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न प्रस्तावित कर सकते हैं। चुनाव चिह्न के लिए उन्हें आयोग की ओर से अधिसूचित ‘फ्री सिंबल’ की सूची में से विकल्प चुनना होगा।

दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिह्न दिए जाएंगे। इसके अलावा वे ऐसे नाम भी प्रस्तावित कर सकते हैं जिनमें मूल पार्टी यानी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ से किसी प्रकार का संबंध दर्शाया गया हो। हालांकि अंतिम नाम और चुनाव चिह्न का आवंटन चुनाव आयोग द्वारा किया जाएगा।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प आयोग को भेज दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यह विकल्प आयोग को ‘कड़े विरोध’ के साथ भेजे गए।

6 अक्टूबर को होने हैं उपचुनाव

चुनाव आयोग का यह आदेश ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। दोनों गुटों ने इन चुनावों को लेकर अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर रखी हैं।

ऐसे में पार्टी का पारंपरिक नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल न कर पाना दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनावी परिस्थिति है। अब मतदाताओं के सामने दोनों गुट नए नाम और अलग-अलग प्रतीकों के साथ पहुंचेंगे।

‘जोड़ाफूल’ सिंबल पर क्यों है इतनी अहमियत?

तृणमूल कांग्रेस का ‘जोड़ाफूल’ यानी फूल और घास वाला चुनाव चिह्न पार्टी की चुनावी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। चुनाव के दौरान मतदाता इसी प्रतीक के माध्यम से पार्टी के उम्मीदवारों की पहचान करते हैं।

लेकिन मौजूदा विवाद के चलते आगामी उपचुनाव में EVM पर दोनों गुटों के उम्मीदवारों के सामने यह पारंपरिक प्रतीक उपलब्ध नहीं होगा। चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों को अलग-अलग प्रतीक दिए जाएंगे।

इसका अर्थ यह नहीं है कि आयोग ने स्थायी रूप से TMC का नाम या चुनाव चिह्न किसी एक गुट से छीन लिया है। फिलहाल यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम प्रकृति की है। पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय आगे की प्रक्रिया के बाद लिया जाएगा।

विवाद पर आगे क्या होगा?

चुनाव आयोग ने संकेत दिया है कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय के लिए संबंधित नियमों के तहत विस्तृत प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। दोनों गुटों के दस्तावेज, संगठनात्मक समर्थन और उनके दावों की जांच के बाद आयोग इस विवाद पर अंतिम निर्णय लेगा।

फिलहाल दोनों पक्षों के सामने तत्काल चुनौती आगामी उपचुनावों में अपने उम्मीदवारों की पहचान स्पष्ट रखने की है। नए नाम और नए चुनाव चिह्न के साथ प्रचार करना होगा और मतदाताओं को यह बताना होगा कि उनका उम्मीदवार किस गुट से संबंधित है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ा असमंजस

चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का संगठनात्मक विवाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। एक तरफ पार्टी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच दावा जारी है, वहीं दूसरी तरफ उपचुनाव की तारीख नजदीक होने के कारण दोनों पक्षों को तत्काल नई चुनावी पहचान के साथ मैदान में उतरना पड़ रहा है।

अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग दोनों गुटों द्वारा दिए गए नाम और चुनाव चिह्नों में से किन विकल्पों को मंजूरी देता है और आगे चलकर पार्टी के मूल नाम तथा ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला किस प्रक्रिया से सामने आता है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 6 अक्टूबर के उपचुनावों में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसका पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न दोनों गुटों के लिए उपलब्ध नहीं होगा। अंतिम अधिकार को लेकर विवाद अभी चुनाव आयोग की प्रक्रिया में है।

You Might Also Like

बदायूं मर्डर केस: दो बच्चों की निर्मम हत्या करने वाले, साजिद के एनकाउंटर की होगी मजिस्ट्रियल जांच
उत्तराखंड पुलिस: DGP दीपम सेठ ने 3 दरोगाओं को किया सस्पेंड, लापरवाह अफसरों और भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार
ओडिशा: ढेंकानाल में उत्सव के बीच पसरा मातम; ‘दंड यात्रा’ की तैयारियों के दौरान करंट लगने से 3 की मौत, 2 घायल
उत्तरकाशी आपदा राहत के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने मुख्यमंत्री को सौंपा ₹1 करोड़ का योगदान
राजस्थान :देश, समाज के हर उस वर्ग को सशक्त करने का प्रयास कर रहा है, जो उपेक्षित रहा है, वंचित रहा है – प्रधानमंत्री मोदी
TAGGED:Election CommissionMamata BanerjeeTMCWest Bengal
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

‘अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं’, देहरादून में प्रशासन का बड़ा एक्शन! औचक निरीक्षण में 4 जन सेवा केंद्र सील, कंप्यूटर-लैपटॉप भी अभिरक्षा में

The Hill India News
The Hill India News
September 18, 2026
बंगाल उपचुनाव से पहले TMC में बड़ा सियासी संकट! चुनाव आयोग ने ‘तृणमूल कांग्रेस’ का नाम और ‘जोड़ाफूल’ सिंबल किया फ्रीज
अमृतसर में ASI की हत्या के बाद ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ का नाम सुर्खियों में! कौन है TTH और शहजाद भट्टी से क्या है कनेक्शन?
गंगा किनारे दो नवजात बच्चियों के शव मिलने से ऋषिकेश में हड़कंप! नाव घाट और साई घाट पर मिले शव, जांच में जुटी पुलिस
अब पहाड़ों में ट्रैकिंग होगी और भी सुरक्षित! उत्तराखंड के 100 ट्रेक रूट्स की GPS/GIS मैपिंग शुरू, बनेगा ऑफलाइन नेविगेशन ऐप
उत्तराखंड में 2027 का चुनावी बिगुल तेज! सहसपुर पर हरक सिंह रावत का बड़ा दावा—कहा, कांग्रेस को 20 हजार से ज्यादा वोटों से जिताऊंगा
देहरादून में म्यूल अकाउंट का बड़ा खेल! 6 बैंकों के ATM से निकले 5.61 लाख रुपये, साइबर ठगों ने ऐसे दिया वारदात को अंजाम
लैंसडाउन में जुटेंगे देश के दो बड़े सुरक्षा रणनीतिकार! NSA अजीत डोभाल और CDS जनरल सुब्रमणि गढ़वाल राइफल्स के कार्यक्रम में होंगे शामिल
अंकिता भंडारी और मोहम्मद दीपक केस के अधिवक्ता को जान से मारने की धमकी! तीन भाषाओं में आया पत्र, हाईकोर्ट में मचा हड़कंप
UPI चार्ज पर सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला! ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट पेमेंट पर MDR को चुनौती, सरकार के फैसले पर उठे सवाल
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?