नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड से लंबे समय तक जुड़ा रहा सुरेंद्र कोली शुक्रवार को हरिद्वार में मृत मिला। भूपतवाला क्षेत्र में लालमाता मंदिर के सामने एक चाय के खोखे में उसका शव मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों और परिस्थितियों की जांच अभी जारी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि निठारी कांड से जुड़े अंतिम लंबित मामले में नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कोली की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था। करीब दो दशक पुराने इस मामले ने एक बार फिर देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
हरिद्वार से शुक्रवार को सामने आई इस खबर ने पुराने निठारी कांड की यादें ताजा कर दी हैं। कभी देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहे निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली का शव उत्तराखंड के हरिद्वार में एक चाय के खोखे के भीतर मिला। पुलिस के मुताबिक, वह पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और हाल में भूपतवाला क्षेत्र में चाय का खोखा चलाने लगा था। शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची तथा जांच शुरू की गई।
भूपतवाला में चाय के खोखे में मिला शव
पुलिस के अनुसार, सुरेंद्र कोली का शव उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में सप्त सरोवर रोड स्थित लालमाता मंदिर के सामने मिले चाय के खोखे में मिला। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उसने कुछ दिन पहले ही वहां चाय की दुकान शुरू की थी।
सूचना मिलने के बाद नगर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस फिलहाल मौत को प्रथम दृष्टया आत्महत्या मानकर जांच कर रही है, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम और अन्य जांच के बाद ही निकाला जाएगा।
रिपोर्टों के मुताबिक घटनास्थल से तत्काल कोई सुसाइड नोट सामने नहीं आया है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ-साथ घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है। मौत से पहले सुरेंद्र कोली किन लोगों के संपर्क में था और पिछले कुछ दिनों में उसकी गतिविधियां कैसी थीं, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।
कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था कोली
प्रारंभिक पुलिस जांच में सामने आया है कि सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था। इससे पहले वह रोशनाबाद क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम कर रहा था। इसके बाद वह भूपतवाला क्षेत्र में आया और यहां चाय का खोखा शुरू किया।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार उसने लालमाता मंदिर के सामने अपनी छोटी सी दुकान शुरू की थी। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि दुकान शुरू किए उसे केवल कुछ ही दिन हुए थे। यही वह जगह थी जहां शुक्रवार को उसका शव मिला।
पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि हरिद्वार में उसके रहने की व्यवस्था कहां थी, उसके परिचित कौन थे और पिछले कुछ दिनों में उसकी दिनचर्या कैसी थी। इसके अलावा परिवार और अन्य करीबी लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
आत्महत्या के कारणों पर अभी कोई स्पष्टता नहीं
पुलिस की प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सुरेंद्र कोली ने यह कदम क्यों उठाया।
कुछ रिपोर्टों में पारिवारिक तनाव की आशंका का उल्लेख किया गया है, लेकिन पुलिस ने इसे अंतिम कारण के रूप में पुष्टि नहीं की है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और परिजनों व परिचितों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।
यानी फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि उसकी मौत के पीछे वास्तविक वजह क्या थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या हाल के दिनों में उसके सामने कोई व्यक्तिगत, पारिवारिक या अन्य परेशानी थी।
निठारी कांड से कैसे जुड़ा था सुरेंद्र कोली?
सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 में सामने आए नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड के बाद देशभर में चर्चा में आया था। मामला नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव में सामने आया था।
निठारी में कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने की शिकायतों के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ी। जांच के दौरान डी-5 कोठी के पीछे नाले और आसपास से मानव अवशेष मिलने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया।
यह मकान कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर का था, जहां सुरेंद्र कोली घरेलू सहायक के रूप में काम करता था। जांच आगे बढ़ने के बाद सीबीआई ने पंढेर और कोली को कई मामलों में आरोपी बनाया। बाद में दोनों के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे चले और लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया जारी रही।
निठारी मामले ने उस समय पूरे देश को झकझोर दिया था। बच्चों और महिलाओं के लापता होने, मानव अवशेष मिलने और जांच के दौरान सामने आए आरोपों ने इसे देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया था।
19 मामलों की जांच और लंबी कानूनी लड़ाई
निठारी कांड की जांच के दौरान कोली और पंढेर के खिलाफ कई अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, कोली के खिलाफ 19 मामलों से जुड़ी कार्यवाही हुई थी। वर्षों तक चली सुनवाई में अलग-अलग अदालतों ने अलग-अलग मामलों में फैसले दिए।
2009 में गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने एक मामले में कोली और पंढेर को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड दिया था। इसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
हालांकि बाद के वर्षों में कई मामलों में कोली को राहत मिली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2023 में 12 मामलों में उसे बरी कर दिया था। इसके बाद राज्य की ओर से इन फैसलों को चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में इन बरी किए जाने के फैसलों को बरकरार रखा।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
सुरेंद्र कोली के खिलाफ निठारी से जुड़ा एक मामला उस समय भी लंबित था। यह मामला रिंपा हलदर से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में 2011 में उसकी दोषसिद्धि और मृत्युदंड को बरकरार रखा गया था। बाद में 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया था।
इसके बाद मामले में क्यूरेटिव याचिका तक कानूनी प्रक्रिया चली। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया। इस फैसले के साथ निठारी से जुड़े उसके खिलाफ लंबित अंतिम मामले में भी उसे दोषमुक्त कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में यह भी दर्ज है कि समान साक्ष्य ढांचे पर अलग-अलग मामलों में अलग परिणाम सामने आए थे और अदालत ने इसी संदर्भ में क्यूरेटिव याचिका पर विचार किया।
करीब 19 साल जेल में रहने के बाद बाहर आया था
न्यायिक प्रक्रिया के लंबे दौर के बाद सुरेंद्र कोली करीब 19 साल जेल में रहा। नवंबर 2025 में अंतिम मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वह जेल से बाहर आया था। इसके बाद उसने हरिद्वार में रहना शुरू किया।
जेल से बाहर आने के बाद उसकी जिंदगी बिल्कुल अलग दिशा में जाती दिखाई दी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उसने अपनी पहचान को ज्यादा सार्वजनिक किए बिना हरिद्वार में रहना शुरू किया और रोजी-रोटी के लिए काम किया। कुछ समय तक उसने सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम किया और बाद में चाय का खोखा चलाने लगा।
लेकिन जेल से बाहर आने के लगभग एक साल के भीतर ही उसकी मौत की खबर सामने आ गई।
मौत ने फिर खड़े कर दिए कई सवाल
सुरेंद्र कोली की मौत ने निठारी कांड से जुड़े पुराने सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि अदालतों में चले लंबे कानूनी विवाद और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसलों को उनके पूरे संदर्भ में देखा जाए।
किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले हुई दोषसिद्धि और बाद में अदालत द्वारा दोषमुक्त किए जाने के बीच कानूनी अंतर होता है। सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले के बाद निठारी से जुड़े अंतिम लंबित मामले में कोली की दोषसिद्धि कायम नहीं रही थी। इसलिए उसकी वर्तमान स्थिति को बताते समय न्यायालय के अंतिम फैसले का उल्लेख करना जरूरी है।
अब उसकी मौत के मामले में भी पुलिस को परिस्थितियों की जांच पूरी करनी होगी। प्रारंभिक तौर पर आत्महत्या की आशंका जताई गई है, लेकिन पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही मौत की परिस्थितियों को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।
पुलिस की जांच किन बिंदुओं पर?
हरिद्वार पुलिस अब कई पहलुओं पर जांच कर रही है। सबसे पहले मौत की परिस्थितियों की पुष्टि की जा रही है। इसके लिए पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण होगी।
इसके अलावा पुलिस यह भी पता कर रही है कि कोली के संपर्क में कौन-कौन लोग थे। वह हरिद्वार में कहां रहता था, रोजाना किन लोगों से मिलता था, चाय के खोखे पर कौन आता-जाता था और मौत से पहले उसके व्यवहार में कोई बदलाव आया था या नहीं—इन सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांच का हिस्सा है। पुलिस घटनास्थल से मिले संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए मामले की परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर रही है।
निठारी की कहानी का एक और दुखद अध्याय
2006 में सामने आया निठारी कांड लगभग दो दशक तक भारतीय न्याय व्यवस्था और आपराधिक जांच के सबसे चर्चित मामलों में रहा। इस मामले में जांच, गिरफ्तारी, आरोप, ट्रायल, सजा, अपील और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया ने इसे लगातार सुर्खियों में बनाए रखा।
अब 2026 में उसी मामले से लंबे समय तक जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत ने इस पुराने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता उसकी मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और पुलिस की विस्तृत पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत किन परिस्थितियों में हुई।
एक ओर निठारी कांड से जुड़ी लंबी कानूनी कहानी है, तो दूसरी ओर नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतिम कानूनी राहत के कुछ महीनों बाद हरिद्वार में हुई यह मौत है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर करीब दो दशक पुराने निठारी कांड को देश की सुर्खियों में ला दिया है।
फिलहाल हरिद्वार पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम तथा अन्य जांच रिपोर्टों के आधार पर ही सामने आएगा।
