मराठी सिनेमा के लिए बड़ी खबर सामने आई है। साल 2025 में रिलीज हुई मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को लेकर दावा किया जा रहा है कि उसे ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया है। यदि यह चयन आधिकारिक रूप से पुष्ट होता है, तो यह मराठी सिनेमा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी और फिल्म को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार मंचों में से एक तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
‘गोंधल’ का निर्देशन संतोष दवाखर ने किया है और फिल्म की कहानी तथा पटकथा से भी उनका जुड़ाव है। फिल्म महाराष्ट्र की ग्रामीण सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और पारंपरिक ‘गोंधल’ लोक-अनुष्ठान को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक मानी जाती है। फिल्म केवल मनोरंजन की कहानी नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से महाराष्ट्र की लोक परंपरा, संस्कृति, रिश्तों, संघर्ष और मानवीय भावनाओं को सिनेमाई अंदाज में सामने लाने की कोशिश की गई है।
IFFI में भी मिली बड़ी पहचान
‘गोंधल’ को 2025 में 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल किया गया था। आधिकारिक IFFI सामग्री के अनुसार फिल्म ग्रामीण महाराष्ट्र में होने वाले मध्यरात्रि के पारंपरिक गोंधल अनुष्ठान की पृष्ठभूमि में एक महिला की कहानी प्रस्तुत करती है।
फिल्म की इसी सांस्कृतिक और सिनेमाई प्रस्तुति को IFFI में भी सराहना मिली। संतोष दवाखर को ‘गोंधल’ के निर्देशन के लिए सिल्वर पीकॉक फॉर बेस्ट डायरेक्टर से सम्मानित किया गया। भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार, जूरी ने फिल्म की परंपरा, प्रस्तुति और कथानक को लेकर इसकी सराहना की थी।
यह सम्मान फिल्म की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया। IFFI में मिली इस उपलब्धि के बाद ‘गोंधल’ को लेकर दर्शकों और फिल्म जगत में चर्चा और बढ़ी।
क्या है ‘गोंधल’ की कहानी?
फिल्म की कहानी महाराष्ट्र की ग्रामीण पृष्ठभूमि में रची गई है। आधिकारिक विवरण के अनुसार, फिल्म की मुख्य पात्र सुमन एक ऐसे विवाह में फंसी हुई है, जिसमें उसे भावनात्मक स्वतंत्रता नहीं मिलती। इसी दौरान उसका संबंध साहेबा, एक गोंधली कलाकार, से जुड़ता है। कहानी इसके बाद प्रेम, इच्छा, छल, विश्वास, परंपरा और आजादी की जटिल परिस्थितियों से गुजरती है।
फिल्म में पारंपरिक गोंधल अनुष्ठान को केवल पृष्ठभूमि के रूप में इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि उसे कहानी कहने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। निर्देशक संतोष दवाखर ने IFFI के दौरान बताया था कि उनका जुड़ाव गोंधल परंपरा से बचपन से रहा है और उन्होंने इसी सांस्कृतिक अनुभव के आधार पर फिल्म की कहानी विकसित की।
महाराष्ट्र की लोक संस्कृति को वैश्विक मंच तक ले जाने की कोशिश
‘गोंधल’ की खासियत यह है कि इसमें महाराष्ट्र की एक पारंपरिक लोक कला को आधुनिक सिनेमाई भाषा के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। गोंधल महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण धार्मिक और लोक परंपराओं में से एक है, जिसमें संगीत, अनुष्ठान और सामुदायिक भागीदारी का महत्वपूर्ण स्थान है।
निर्देशक संतोष दवाखर ने IFFI में कहा था कि यह परंपरा धीरे-धीरे लोगों की नजरों से दूर होती जा रही है और फिल्म के माध्यम से इसे संरक्षित करने की कोशिश की गई है।
यही वजह है कि फिल्म को केवल एक कहानी के तौर पर नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को बड़े पर्दे पर दर्ज करने वाली कोशिश के रूप में भी देखा गया।
कलाकारों और तकनीकी टीम की भी चर्चा
फिल्म में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहनी और निशाद भोईर सहित कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के रिकॉर्ड में ‘गोंधल’ को मराठी भाषा की फिल्म के रूप में दर्ज किया गया है और निर्देशन, कहानी तथा पटकथा का श्रेय संतोष दवाखर को दिया गया है।
फिल्म के संगीत से जुड़े नामों में दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा का नाम भी दर्ज है। आधिकारिक CBFC रिकॉर्ड में फिल्म की लंबाई 120 मिनट और निर्माता के रूप में Davakhar Films का उल्लेख है।
ऑस्कर की खबर ने बढ़ाई उम्मीद
अब ‘गोंधल’ के ऑस्कर 2027 की आधिकारिक एंट्री होने की खबर सामने आने के बाद मराठी फिल्म इंडस्ट्री में उत्साह का माहौल बनने की बात कही जा रही है। हालांकि, ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि से जुड़ी अंतिम पुष्टि के लिए संबंधित चयन संस्था या आधिकारिक घोषणा को आधार बनाना जरूरी होगा।
यदि ‘गोंधल’ का भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चयन पुष्ट होता है, तो फिल्म के लिए यह एक नया अंतरराष्ट्रीय अध्याय होगा। इससे महाराष्ट्र की लोक संस्कृति, मराठी भाषा और क्षेत्रीय सिनेमा को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।
मराठी फिल्मों का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहुंचना नया नहीं है। इससे पहले भी मराठी सिनेमा की कई फिल्मों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। ऐसे में ‘गोंधल’ की यात्रा भी क्षेत्रीय सिनेमा से आगे बढ़कर भारतीय कहानी और संस्कृति को वैश्विक दर्शकों के सामने रखने वाली यात्रा बन सकती है।
फिलहाल फिल्म को मिल चुकी IFFI की अंतरराष्ट्रीय पहचान और संतोष दवाखर का सिल्वर पीकॉक सम्मान ‘गोंधल’ की उपलब्धियों में महत्वपूर्ण अध्याय हैं। अब ऑस्कर 2027 से जुड़ी आधिकारिक पुष्टि पर फिल्म प्रेमियों की नजर बनी हुई है।
