देहरादून में अंकिता भंडारी हत्याकांड के चार साल पूरे होने पर एक बार फिर न्याय की आवाज बुलंद हुई। गांधी पार्क में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकारों से जुड़े संगठनों ने श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर अंकिता को याद किया। इसके बाद गांधी पार्क से घंटाघर तक मानव श्रृंखला बनाकर मामले से जुड़े लंबित सवालों के जवाब सार्वजनिक करने और कथित VIP एंगल की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई। प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने कहा कि अंकिता के परिवार और प्रदेश की जनता के मन में अभी भी कई सवाल हैं, जिनका स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।
चार साल बाद भी सड़कों पर न्याय की मांग
18 सितंबर 2022 को सामने आए अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। चार साल पूरे होने के मौके पर देहरादून में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अंकिता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने की मांग आज भी समाज के एक हिस्से के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में संगठनों ने सरकार से मामले से जुड़े उन सवालों का जवाब सार्वजनिक करने की मांग की, जिन्हें लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। कार्यक्रम के बाद बनाई गई मानव श्रृंखला के जरिए लोगों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता प्रदर्शित की।
‘VIP’ एंगल को लेकर फिर उठी आवाज
कार्यक्रम में शामिल पूर्व सैनिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मामले में कथित VIP से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। पूर्व सैनिक अर्धसैनिक संयुक्त संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रकाश थपलियाल ने कहा कि उत्तराखंड की जनता अंकिता को भूली नहीं है और परिवार को न्याय मिलने की मांग लगातार उठती रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और कथित तौर पर एक VIP को विशेष सेवाएं देने के दबाव की बात सामने आई थी। वक्ताओं ने मांग की कि ऐसे सभी आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष तरीके से जांच हो तथा यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
हालांकि, इस मुद्दे पर सरकारी और पुलिस पक्ष का रुख अलग रहा है। जनवरी 2026 में उत्तराखंड पुलिस ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उसकी जांच और अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर किसी VIP की संलिप्तता सामने नहीं आई है। पुलिस ने यह भी कहा था कि मामले में तीन आरोपियों को अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है।
अंतिम संस्कार को लेकर भी उठे सवाल
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने अंकिता के अंतिम संस्कार से जुड़े घटनाक्रम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अंतिम संस्कार के समय और परिस्थितियों को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं और कहा कि इन सवालों का तथ्यात्मक और पारदर्शी जवाब दिया जाना चाहिए।
वक्ताओं का कहना था कि अंकिता के माता-पिता लंबे समय से अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करते रहे हैं। ऐसे में मामले से जुड़े प्रत्येक पहलू को स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम की स्थिति न बनी रहे।
CBI जांच और पारदर्शिता पर भी सवाल
कार्यक्रम के दौरान सीबीआई जांच को लेकर भी वक्ताओं ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मामले के किसी पहलू को लेकर जांच चल रही है तो उसकी प्रगति और निष्कर्षों को कानून और जांच प्रक्रिया के अनुरूप पारदर्शी तरीके से सामने लाया जाना चाहिए।
मामले के मूल आपराधिक मुकदमे में तीन आरोपियों को दोषी ठहराया जा चुका है, लेकिन कथित VIP एंगल को लेकर सार्वजनिक बहस और राजनीतिक-सामाजिक मांगें अब भी जारी हैं। फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट में भी यह उल्लेख किया गया था कि तीन दोषियों की सजा के बावजूद VIP से जुड़े दावों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
महिला मंच ने भी उठाए कई सवाल
कार्यक्रम में उत्तराखंड महिला मंच से जुड़ी निर्मला बिष्ट ने भी अंकिता भंडारी मामले से संबंधित कई सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मामले को केवल एक आपराधिक घटना के तौर पर देखने के बजाय उन सभी सवालों का जवाब सामने आना चाहिए, जिनको लेकर परिवार और समाज के विभिन्न वर्गों की ओर से लगातार आवाज उठाई जाती रही है।
महिला संगठनों की ओर से यह भी कहा गया कि उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान का सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। पहाड़ी क्षेत्रों से रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाली युवतियों की सुरक्षा को लेकर भी समाज में चिंता रहती है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और कानून का प्रभावी पालन लोगों के विश्वास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
श्रद्धांजलि सभा में शामिल संगठनों ने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने की नहीं, बल्कि मामले से जुड़े सभी सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने लाने की है। वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार की ओर से पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा।
मानव श्रृंखला के दौरान लोगों ने अंकिता की तस्वीर और न्याय की मांग से जुड़े पोस्टर-बैनर के साथ अपनी आवाज उठाई। गांधी पार्क से घंटाघर तक लोगों की मौजूदगी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि चार साल बाद भी यह मामला सामाजिक स्मृति से बाहर नहीं हुआ है।
अदालत से सजा, लेकिन सार्वजनिक बहस जारी
अंकिता भंडारी हत्याकांड में अदालत द्वारा तीन आरोपियों को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा दिए जाने के बाद मामले का आपराधिक मुकदमा एक महत्वपूर्ण कानूनी चरण तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद कथित VIP एंगल और जांच की पारदर्शिता को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर मामले से जुड़े विभिन्न दावों को लेकर भी कानूनी विवाद सामने आए हैं। जून 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक मामले में सोशल मीडिया के जरिए किसी व्यक्ति को अंकिता हत्याकांड से जोड़कर प्रस्तुत करने को गंभीर विषय माना और कहा कि बिना आधार किसी व्यक्ति की छवि को गंभीर अपराध से जोड़ना उचित नहीं है।
ऐसे में अंकिता भंडारी की चौथी बरसी पर देहरादून में हुई श्रद्धांजलि सभा और मानव श्रृंखला ने एक बार फिर इस मामले को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कार्यक्रम में उठी मांगों का मुख्य केंद्र निष्पक्ष जांच, लंबित सवालों के जवाब और कथित VIP एंगल की स्थिति स्पष्ट करना रहा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में जांच एजेंसियों और संबंधित संस्थाओं की ओर से इन सवालों को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है।
