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Reading: राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता और ‘इंडियन स्टेट’ बयान विवाद: क्या है पूरा मामला और अब तक क्या हुआ?
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The Hill India > Blog > देश > राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता और ‘इंडियन स्टेट’ बयान विवाद: क्या है पूरा मामला और अब तक क्या हुआ?
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राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता और ‘इंडियन स्टेट’ बयान विवाद: क्या है पूरा मामला और अब तक क्या हुआ?

The Hill India News
Last updated: April 17, 2026 7:06 am
The Hill India News
Published: April 17, 2026
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कांग्रेस नेता Rahul Gandhi इस समय दो अलग-अलग कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में हैं, जिनकी सुनवाई Allahabad High Court में हो रही है। पहला मामला कथित दोहरी नागरिकता से जुड़ा है, जबकि दूसरा उनके ‘इंडियन स्टेट’ वाले बयान को लेकर है। दोनों ही मामलों में निचली अदालतों के फैसलों को चुनौती दी गई है और अब हाईकोर्ट के फैसले पर सबकी नजर है।

Contents
दोहरी नागरिकता का मामला क्या है?‘इंडियन स्टेट’ बयान विवाद क्या है?दोनों मामलों में समानताएंकानूनी रूप से क्यों अहम हैं ये मामले?आगे क्या हो सकता है?

दोहरी नागरिकता का मामला क्या है?

इस विवाद की शुरुआत कर्नाटक के बीजेपी नेता Vignesh Shishir की याचिका से हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता है। भारत का कानून दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता, इसलिए यह आरोप गंभीर माना जा रहा है।

याचिका में यह भी दावा किया गया कि राहुल गांधी के पास दो पासपोर्ट हो सकते हैं, जो Indian Passport Act, Foreigners Act और Official Secrets Act जैसे कानूनों के तहत उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।

सबसे पहले यह मामला रायबरेली की ट्रायल कोर्ट में पहुंचा, जहां याचिकाकर्ता ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। हालांकि, अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न होने का हवाला देते हुए याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

यह समझना जरूरी है कि अभी तक किसी अदालत ने यह नहीं कहा है कि राहुल गांधी दोषी हैं। मामला सिर्फ इस बात पर है कि क्या आरोप इतने ठोस हैं कि एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जाए।

‘इंडियन स्टेट’ बयान विवाद क्या है?

दूसरा मामला राहुल गांधी के एक राजनीतिक बयान से जुड़ा है। 15 जनवरी 2025 को कांग्रेस के नए मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई सिर्फ बीजेपी और आरएसएस से नहीं, बल्कि “इंडियन स्टेट” से भी है।

इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। आलोचकों ने इसे देश की संस्थाओं पर सवाल उठाने वाला बयान बताया। इस मामले में याचिका Simran Gupta ने दाखिल की।

यह मामला पहले चंदौसी की अदालत में गया, जहां एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। निचली अदालत ने याचिका को कमजोर बताते हुए खारिज कर दिया। इसके बाद इस फैसले को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

दोनों मामलों में समानताएं

इन दोनों मामलों में कुछ अहम समानताएं हैं:

  • दोनों में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई।
  • दोनों मामलों में निचली अदालतों ने याचिकाएं खारिज कर दीं।
  • दोनों फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
  • अंतिम निर्णय अब हाईकोर्ट को करना है।

कानूनी रूप से क्यों अहम हैं ये मामले?

दोहरी नागरिकता का मामला सीधे संवैधानिक और कानूनी प्रश्न उठाता है। अगर यह आरोप सही साबित होता है, तो यह किसी सांसद की पात्रता पर असर डाल सकता है। भारत में जनप्रतिनिधियों के लिए नागरिकता से जुड़े नियम बेहद सख्त हैं।

वहीं ‘इंडियन स्टेट’ बयान का मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं से जुड़ा है। यह तय करेगा कि एक राजनीतिक नेता अपने विरोध या आलोचना को किस हद तक व्यक्त कर सकता है। क्या ऐसे बयान को राजनीतिक आलोचना माना जाएगा या कानूनन आपत्तिजनक—यह अदालत के फैसले से स्पष्ट होगा।

आगे क्या हो सकता है?

अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखता है, तो राहुल गांधी को दोनों मामलों में राहत मिल सकती है और एफआईआर दर्ज नहीं होगी। लेकिन यदि हाईकोर्ट इन फैसलों को पलटता है, तो पुलिस जांच का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल स्थिति यह है कि राहुल गांधी के खिलाफ कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। पूरा मामला इस बात पर टिका है कि क्या अदालत इन आरोपों को जांच योग्य मानती है या इन्हें पर्याप्त आधारहीन समझकर खारिज कर देती है।

कुल मिलाकर, ये दोनों मामले न केवल राहुल गांधी बल्कि भारतीय राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके जरिए नागरिकता, अभिव्यक्ति की आजादी और न्यायपालिका की भूमिका जैसे बड़े सवालों पर स्पष्टता सामने आएगी।

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