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नैनीताल में ‘महंगाई की मार’: गैस संकट ने बिगाड़ा जायका, रेस्टोरेंट्स में 20% तक बढ़े दाम, पर्यटकों की होगी जेब खाली

The Hill India News
Last updated: April 14, 2026 2:20 pm
The Hill India News
Published: April 14, 2026
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Nainital File Photo
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नैनीताल। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध सरोवर नगरी नैनीताल इन दिनों दोहरी मार झेल रही है। एक ओर पर्यटन सीजन परवान चढ़ रहा है, तो दूसरी ओर व्यावसायिक (कमर्शियल) गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने स्थानीय कारोबारियों और पर्यटकों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि शहर के अधिकांश होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने खाने-पीने के मेन्यू कार्ड में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है। गैस आपूर्ति में आई इस बाधा ने न केवल नैनीताल के जायके को कड़वा कर दिया है, बल्कि पर्यटन व्यवसाय पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

Contents
आपूर्ति में बाधा और बढ़ती लागत: कारोबारियों का दर्दविकल्पों की तलाश और बढ़ता आर्थिक बोझपर्यटकों का बिगड़ा बजट: “पहाड़ की सैर अब महंगी”स्थानीय निवासियों में भी भारी आक्रोशपर्यटन कारोबार पर संकट की आशंका: विशेषज्ञों की रायप्रशासन का आश्वासन और भविष्य की राह

आपूर्ति में बाधा और बढ़ती लागत: कारोबारियों का दर्द

नैनीताल के मॉल रोड से लेकर तल्लीताल और मल्लीताल के बाजारों में स्थित रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पिछले कुछ समय से बेहद अनियमित हो गई है। कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे ने पहले ही लाभ के अंतर (Profit Margin) को कम कर दिया था, और अब सिलेंडर की कमी ने संचालन को और मुश्किल बना दिया है।

प्रसिद्ध रेस्टोरेंट संचालक रुचिर के मुताबिक, केवल गैस ही नहीं बल्कि पैकेजिंग मटेरियल और अन्य कच्ची सामग्रियों के दाम भी बढ़ गए हैं। लागत और बिक्री के बीच संतुलन बनाने के लिए दामों में बढ़ोतरी करना अब उनकी मजबूरी बन गई है। वहीं, रेस्टोरेंट व्यवसायी विश्वजीत टंडन ने आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया, “पहले हमारे यहाँ रोजाना एक सिलेंडर की खपत होती थी, लेकिन अब गैस एजेंसियां महीने में मात्र दो सिलेंडर देने की बात कह रही हैं। हाल ही में हमें बड़ी मुश्किल से एक ही सिलेंडर मिल पाया है। ऐसी स्थिति में किचन चलाना और ग्राहकों को सेवा देना लगभग असंभव होता जा रहा है।”

विकल्पों की तलाश और बढ़ता आर्थिक बोझ

गैस संकट के चलते रेस्टोरेंट संचालक अब वैकल्पिक ईंधनों की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन यह विकल्प भी उनके लिए राहत भरे नहीं हैं। बिजली के उपकरणों या अन्य महंगे ईंधनों का उपयोग करने से प्रति डिश लागत और अधिक बढ़ रही है। संचालकों का स्पष्ट कहना है कि यदि गैस आपूर्ति व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ और कीमतों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में एक और उछाल देखने को मिल सकता है।

पर्यटकों का बिगड़ा बजट: “पहाड़ की सैर अब महंगी”

नैनीताल आने वाले पर्यटकों के लिए यह महंगाई किसी झटके से कम नहीं है। दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश से भारी संख्या में पहुँच रहे सैलानी बढ़े हुए दामों को देखकर हैरान हैं। दिल्ली से घूमने आईं पर्यटक प्रियंका ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, “नैनीताल आना हमेशा से सुकून भरा रहा है, लेकिन इस बार खाने-पीने के दाम सुनकर बजट बिगड़ गया है। पहले से ही ठहरने और टैक्सी का खर्च काफी ज्यादा है, ऊपर से रेस्टोरेंट में 15-20 फीसदी की बढ़ोतरी मध्यम वर्गीय परिवार के लिए भारी पड़ रही है।”

पर्यटकों का मानना है कि यदि भोजन जैसी बुनियादी सुविधा इतनी महंगी हो जाएगी, तो भविष्य में लोग अन्य पर्यटन स्थलों की ओर रुख कर सकते हैं, जो नैनीताल की अर्थव्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत नहीं है।

स्थानीय निवासियों में भी भारी आक्रोश

यह समस्या केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं है। नैनीताल के स्थानीय निवासी, जो अक्सर बाहर खाना पसंद करते हैं या टिफिन सेवाओं पर निर्भर हैं, वे भी इस महंगाई से त्रस्त हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम पहले ही बढ़े हुए हैं, और अब रेस्टोरेंट में भोजन महंगा होने से बाहर खाना एक ‘लक्जरी’ बनता जा रहा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कमर्शियल गैस की कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए और सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

पर्यटन कारोबार पर संकट की आशंका: विशेषज्ञों की राय

आर्थिक मामलों के जानकारों और पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि नैनीताल गैस संकट और महंगाई का यह दौर यदि लंबा चला, तो इसका सीधा असर नैनीताल के ‘ब्रांड’ पर पड़ेगा। नैनीताल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन पर टिकी है। यदि यहाँ सेवाएं महंगी और दुर्लभ होती गईं, तो इसका नकारात्मक संदेश देश-दुनिया में जाएगा। होटल एसोसिएशन और व्यापार मंडल ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है और शासन-प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है।

प्रशासन का आश्वासन और भविष्य की राह

बढ़ते विवाद और संचालकों के विरोध के बीच संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सूत्रों के अनुसार, गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि होटल-रेस्टोरेंट जैसी व्यावसायिक इकाइयों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जाए। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि आपूर्ति श्रृंखला में आ रही तकनीकी दिक्कतों को जल्द दूर कर लिया जाएगा।

फिलहाल, नैनीताल के होटल और रेस्टोरेंट संचालक इस उम्मीद में हैं कि विभाग का यह आश्वासन धरातल पर उतरेगा। तब तक के लिए, सरोवर नगरी आने वाले पर्यटकों को अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार रहना होगा। नैनीताल गैस संकट और महंगाई के इस दौर में अब देखना यह होगा कि सरकार इस संकट से उबरने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

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