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The Hill India > Blog > फीचर्ड > सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख: UNSC में गुहार लगाता पाकिस्तान, बढ़ा कूटनीतिक तनाव
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सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख: UNSC में गुहार लगाता पाकिस्तान, बढ़ा कूटनीतिक तनाव

The Hill India News
Last updated: April 24, 2026 6:58 am
The Hill India News
Published: April 24, 2026
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भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही जल कूटनीति एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गई है। सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) को लेकर भारत के हालिया सख्त रुख से पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ गई हैं। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि पाकिस्तान ने अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और संयुक्त राष्ट्र महासभा का दरवाजा खटखटाते हुए भारत पर संधि को पूरी तरह बहाल करने का दबाव बनाने की अपील की है।

पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के जरिए जानकारी दी कि उन्होंने अपने देश के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री की ओर से संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र सौंपा है। इस पत्र में भारत द्वारा सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से निलंबित करने के फैसले को ‘क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा’ बताया गया है। पाकिस्तान ने यह भी दावा किया है कि भारत के इस कदम से उसके देश में मानवीय संकट उत्पन्न हो सकता है।

भारत के इस फैसले से पाकिस्तान में बेचैनी साफ तौर पर देखी जा रही है। उसने UNSC से अपील की है कि वह भारत से संधि को फिर से पूरी तरह लागू करने का आग्रह करे। इसके साथ ही पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश की है और भारत पर ‘प्रचार अभियान’ चलाने का आरोप लगाया है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने पहली बार पानी को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का संकेत दिया है। यूरोपावायर में प्रकाशित एक विश्लेषण में ग्रीक विशेषज्ञ दिमित्रा स्टाइकौ ने लिखा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।” यह बयान भारत की बदली हुई नीति को दर्शाता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे को जल संसाधनों से जोड़ा जा रहा है।

गौरतलब है कि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। यह संधि दोनों देशों के बीच तीन बड़े युद्धों (1965, 1971 और कारगिल संघर्ष), संसद हमले, 26/11 मुंबई हमले, उरी और पुलवामा जैसे गंभीर आतंकी घटनाओं के बावजूद भी कायम रही। लेकिन पिछले 65 वर्षों में पहली बार भारत ने इस संधि के क्रियान्वयन को अस्थायी रूप से रोकने का कदम उठाया है।

भारत ने 23 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद यह फैसला लिया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी और इसके पीछे पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों का हाथ बताया गया। भारत सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से होने वाले आतंकवाद पर प्रभावी और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक इस तरह की संधियों को जारी रखना देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ होगा।

इस बीच, पाकिस्तान की ओर से आ रही प्रतिक्रियाएं भी काफी आक्रामक रही हैं। कुछ पाकिस्तानी नेताओं और विश्लेषकों ने परमाणु धमकियों और भारत के बांधों पर हमले जैसे बयान दिए हैं। हालांकि भारत ने इन धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उसकी नीतियां अब किसी भी तरह के दबाव या धमकी से प्रभावित नहीं होंगी।

अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का मानना है कि भारत का कदम पूरी तरह से अवैध नहीं है, क्योंकि बदलती परिस्थितियों और लगातार हो रहे आतंकी हमलों के मद्देनजर किसी भी देश को अपनी नीतियों की समीक्षा करने का अधिकार होता है। हालांकि यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर बहस का विषय जरूर बन गया है, क्योंकि जल संसाधन दोनों देशों के लिए जीवनरेखा के समान हैं।

कुल मिलाकर, सिंधु जल संधि को लेकर उत्पन्न यह नया विवाद दक्षिण एशिया में कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है। पाकिस्तान जहां खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत ने साफ संदेश दिया है कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या दोनों देश किसी समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं या नहीं।

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