
हल्द्वानी (नैनीताल): उत्तराखंड के हल्द्वानी में उस समय हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल के बेहद करीब एक संदिग्ध परिस्थितियों में खड़ी कार से एक युवक का शव बरामद हुआ। घटना सुशीला तिवारी अस्पताल के समीप की है, जहाँ शनिवार को 32 वर्षीय एक व्यक्ति मृत अवस्था में पाया गया। मृतक की पहचान शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी और बरेली रोड स्थित ‘घूंघट बैंकेट हॉल’ के स्वामी अरुण बिष्ट के रूप में हुई है।
कैसे हुआ घटना का खुलासा?
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुशीला तिवारी अस्पताल के पास सड़क किनारे एक कार पिछले काफी समय से संदिग्ध स्थिति में खड़ी थी। राहगीरों ने जब कार के भीतर झांका, तो उन्हें चालक की सीट पर एक युवक अचेत अवस्था में दिखाई दिया। बार-बार शीशा खटखटाने और आवाज देने के बावजूद जब युवक ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, तो लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। स्थानीय नागरिकों ने बिना देरी किए इसकी सूचना पुलिस को दी।
भारी पुलिस बल मौके पर, जांच शुरू
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम के कारण क्षेत्र में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी, लेकिन इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अमित कुमार और शहर कोतवाल भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने कार का दरवाजा खोलकर देखा तो युवक की सांसें थम चुकी थीं।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को शरीर पर किसी भी तरह के बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं, जिससे गुत्थी और उलझ गई है। पुलिस ने शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
कौन थे अरुण बिष्ट?
मृतक की पहचान 32 वर्षीय अरुण बिष्ट के रूप में हुई है। अरुण हल्द्वानी के बरेली रोड पर स्थित ‘घूंघट बैंकेट हॉल’ का संचालन करते थे। वह शहर के व्यावसायिक हलकों में एक परिचित चेहरा थे। जैसे ही उनकी मृत्यु की खबर परिजनों तक पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। परिजन और परिचित सुशीला तिवारी अस्पताल और मोर्चरी के बाहर जुटने लगे। हर कोई इस बात से हैरान है कि आखिर एक हंसता-खेलता नौजवान संदिग्ध परिस्थितियों में कार के भीतर मृत कैसे पाया गया।
सीसीटीवी फुटेज और टेक्निकल साक्ष्यों पर टिकी जांच
हल्द्वानी पुलिस अब इस मामले की हर कोण से जांच कर रही है। सीओ अमित कुमार ने मीडिया को बताया, “प्रथम दृष्टया यह मामला संदिग्ध लग रहा है, लेकिन मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। हम क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि कार वहां कब आकर खड़ी हुई थी और उस दौरान वहां कौन-कौन मौजूद था।”
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस विसरा रिपोर्ट की भी मांग कर सकती है यदि पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट नहीं होती है। साथ ही, पुलिस मृतक के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड (CDR) की भी जांच कर रही है ताकि अंतिम समय में उनकी किससे बातचीत हुई थी, इसका पता लगाया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी मूवमेंट के बीच चुनौती
यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि जिस स्थान पर शव मिला, वह मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल के बिल्कुल नजदीक है। वीआईपी मूवमेंट से पहले इस तरह की घटना होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह आत्महत्या का मामला है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
अरुण बिष्ट की असामयिक मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। परिजनों का कहना है कि अरुण मानसिक रूप से स्वस्थ थे और व्यापार भी अच्छा चल रहा था। ऐसे में उनकी मौत की खबर ने कई अनुत्तरित सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष होगी और जल्द ही सच सामने लाया जाएगा।
हल्द्वानी में हुई इस घटना ने शहर की कानून व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल तो खड़े किए ही हैं, साथ ही एक उभरते हुए कारोबारी के जाने से समाज में शोक की लहर है। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस रहस्यमयी मौत के ऊपर से पर्दा उठाएगी।



