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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > वसंतोत्सव 2026: देहरादून में फूलों की खुशबू ही नहीं, स्वाद का भी जादू; कंडाली की जैली और भांग के पेड़े बने आकर्षण
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वसंतोत्सव 2026: देहरादून में फूलों की खुशबू ही नहीं, स्वाद का भी जादू; कंडाली की जैली और भांग के पेड़े बने आकर्षण

The Hill India News
Last updated: February 28, 2026 8:06 am
The Hill India News
Published: February 28, 2026
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देहरादून (ब्यूरो): प्रकृति जब अपने पूरे शृंगार में होती है, तो उसे ‘वसंत’ कहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी वसंत को चखा है? उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के लोकभवन में आयोजित वसंतोत्सव 2026 में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहाँ फूलों की केवल प्रदर्शनी ही नहीं लगी है, बल्कि फूलों की मिठास को प्लेटों में सजाकर पेश किया गया है। सरसों के पीले फूलों की बर्फी से लेकर बुरांश की लालिमा वाले हलवे तक, यहाँ का स्वाद पर्यटकों और स्थानीय लोगों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर रहा है।

Contents
फूलों से मिठाई तक का सफर: शेफ देवेंद्र जोशी का कमालकंडाली की जैली और भांग का पेड़ा: औषधीय गुणों का भंडारपहाड़ी अनाजों और फूलों का अनूठा ‘फ्यूजन’‘वोकल फॉर लोकल’ को नई दिशाविशेषज्ञों की राय और जन-प्रतिक्रियाभविष्य की राह

फूलों से मिठाई तक का सफर: शेफ देवेंद्र जोशी का कमाल

वसंतोत्सव 2026 में इस बार सबसे ज्यादा भीड़ उद्यान विभाग के स्टॉल पर उमड़ रही है। यहाँ देहरादून के मशहूर शेफ देवेंद्र जोशी ने अपनी कला और पहाड़ी संसाधनों के मेल से एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जोशी ने पहाड़ी फूलों को मुख्य सामग्री (Main Ingredient) बनाकर 35 से अधिक प्रकार के उत्पाद तैयार किए हैं।

आमतौर पर फूलों का इस्तेमाल केवल सजावट या पूजा के लिए किया जाता है, लेकिन देवेंद्र जोशी ने इन्हें ‘गॉरमेट डेजर्ट’ में तब्दील कर दिया है। उन्होंने बताया कि इन मिठाइयों को तैयार करने के लिए सबसे पहले फूलों को साफ कर उनका अर्क (जूस) निकाला जाता है, फिर उसमें स्थानीय अनाज, घी और सीमित मात्रा में चीनी मिलाकर इसे अंतिम रूप दिया जाता है।

कंडाली की जैली और भांग का पेड़ा: औषधीय गुणों का भंडार

इस प्रदर्शनी में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला उत्पाद है ‘कंडाली की जैली’। कंडाली, जिसे बिच्छू घास भी कहा जाता है, अपनी चुभन के लिए जानी जाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी सब्जी तो मशहूर है ही, लेकिन शेफ जोशी ने इसकी कड़वाहट और चुभन को दूर कर इसे एक मीठी और स्वास्थ्यवर्धक जैली में बदल दिया है। कंडाली आयरन और विटामिन का मुख्य स्रोत मानी जाती है, जो एनीमिया जैसी बीमारियों में रामबाण है।

वहीं, दूसरी ओर ‘भांग के पेड़े’ ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। भांग के बीजों का इस्तेमाल पहाड़ में चटनी के रूप में सदियों से होता आया है, लेकिन इसकी मिठाई एक नया प्रयोग है। यह न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड सेहत के लिए भी लाभकारी है।

पहाड़ी अनाजों और फूलों का अनूठा ‘फ्यूजन’

वसंतोत्सव 2026 केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, यह उत्तराखंड के लुप्त होते अनाजों को पुनर्जीवित करने का एक मंच भी बन गया है। शेफ ने निम्नलिखित खास व्यंजन परोसे हैं:

  1. बुरांश कौंणी का हलवा: पहाड़ी अनाज ‘कौंणी’ और राज्य पुष्प ‘बुरांश’ का अद्भुत संगम।

  2. चिंणा केसर हलवा: पोषक तत्वों से भरपूर चिंणा को केसरिया रंगत के साथ पेश किया गया।

  3. गुलाब ड्राई फ्रूट कतली: पारंपरिक काजू कतली को गुलाब की ताजी पंखुड़ियों के साथ नया ट्विस्ट दिया गया।

  4. माल्टा जैली: पहाड़ के प्रचुर मात्रा में होने वाले माल्टा फल के सही उपयोग का बेहतरीन उदाहरण।

‘वोकल फॉर लोकल’ को नई दिशा

शेफ देवेंद्र जोशी का मानना है कि उत्तराखंड आने वाले पर्यटक यहाँ की यादें अपने साथ ले जाते हैं, लेकिन अगर वे यहाँ की विशिष्ट मिठाइयां भी साथ ले जाएं, तो इससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, “पहाड़ में माल्टा, फ्यूली और मोल जैसे संसाधनों की कमी नहीं है, बस उन्हें सही बाजार देने की जरूरत है। मेरा लक्ष्य है कि लोग जब पहाड़ आएं, तो यहाँ की मिट्टी और फूलों का स्वाद अपने साथ लेकर जाएं।”

विशेषज्ञों की राय और जन-प्रतिक्रिया

उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के प्रयोगों से किसानों को भी फायदा होगा। यदि फूलों और स्थानीय उत्पादों की मांग मिठाई उद्योग में बढ़ती है, तो किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। वसंतोत्सव में आए एक पर्यटक ने बताया, “मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि सरसों के फूल या कंडाली से इतनी स्वादिष्ट जैली बन सकती है। यह वाकई में एक क्रांतिकारी कदम है।”

भविष्य की राह

वसंतोत्सव 2026 में रोजाना नए-नए उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जा रही है। आयोजन समिति का प्रयास है कि इन उत्पादों की रेसिपी और तकनीक को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) तक पहुँचाया जाए, ताकि ग्रामीण महिलाएं भी इसे अपनी आजीविका का जरिया बना सकें।


देहरादून का लोकभवन इस समय केवल फूलों की खुशबू से नहीं, बल्कि नवाचार की महक से भी सराबोर है। वसंतोत्सव 2026 ने यह साबित कर दिया है कि यदि परंपरा को आधुनिक सोच के साथ जोड़ा जाए, तो परिणाम अद्भुत हो सकते हैं। फूलों से बनी ये मिठाइयां न केवल स्वाद में बेमिसाल हैं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध जैव-विविधता का गौरव गान भी कर रही हैं।

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