
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में आधी रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब झुग्गियों में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास बनी करीब आधा दर्जन झुग्गियां इसकी चपेट में आ गईं। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जिसमें पति-पत्नी और उनकी मासूम दो साल की बच्ची शामिल है। घटना के बाद इलाके में मातम पसरा हुआ है और स्थानीय लोग गहरे सदमे में हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा देर रात करीब 1:25 बजे रोहिणी के बुध विहार इलाके में हुआ। जिस स्थान पर आग लगी, वहां करीब 400 गज के प्लॉट में प्लास्टिक और अन्य कबाड़ का सामान रखा हुआ था। उसी के पास कई झुग्गियां बनी हुई थीं, जहां मजदूर और उनके परिवार रहते थे। अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वहां रहने वाले लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। हालांकि, एक परिवार के तीन सदस्य बाहर नहीं निकल सके और आग में झुलसकर उनकी मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगते ही इलाके में चीख-पुकार मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे काबू में करने में दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई घंटों की कड़ी मेहनत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका।
फायर ऑफिसर अजय शर्मा ने बताया कि आग एक प्लॉट में रखे कबाड़ के कारण तेजी से फैली और पास की झुग्गियों तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि “घटना रात करीब 1:25 बजे की है। मौके पर छह दमकल गाड़ियां भेजी गई थीं। आग अब पूरी तरह नियंत्रण में है। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हुई है और कोई अन्य घायल नहीं हुआ है।”
घटना के बाद मौके पर दमकल विभाग के साथ-साथ स्थानीय पुलिस, केंद्रीकृत दुर्घटना एवं ट्रॉमा सेवा (CATS) और बिजली विभाग की टीम भी पहुंची। सभी एजेंसियों ने मिलकर राहत और बचाव कार्य चलाया। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के बाद मलबे में फंसे लोगों की तलाश की, जहां से तीन शव बरामद किए गए।
मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि आग शॉर्ट सर्किट या कबाड़ में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों के कारण लगी हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
इस हादसे ने एक बार फिर झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन इलाकों में अक्सर ज्वलनशील सामग्री के बीच लोग रहते हैं, जिससे आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम न होने और संकरी गलियों के कारण राहत कार्य में भी दिक्कतें आती हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए जाएं और आग से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। साथ ही पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और सहायता प्रदान करने की भी अपील की गई है।
यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे इलाके के लिए एक गहरा घाव बन गया है। मासूम बच्ची समेत तीन जिंदगियों का यूं चले जाना हर किसी को झकझोर देने वाला है। प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी भी है कि समय रहते सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।



