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नासिक यूनिट विवाद के बीच TCS का बड़ा बयान: आंतरिक शिकायत नहीं मिली, ओवरसाइट कमेटी गठित

नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की यूनिट इन दिनों कथित धार्मिक रूपांतरण और यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोपों को लेकर जांच के दायरे में है। पुलिस स्तर पर मामले की जांच जारी है, वहीं कंपनी ने अब इस पूरे विवाद पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसके आंतरिक शिकायत तंत्र में इस तरह की कोई शिकायत दर्ज ही नहीं की गई थी। कंपनी ने साथ ही यह भी बताया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय ओवरसाइट कमेटी का गठन कर दिया गया है और बाहरी एजेंसियों को भी जांच में शामिल किया गया है।

TCS ने अपने बयान में कहा है कि नासिक यूनिट से जुड़े रिकॉर्ड और आंतरिक प्रणालियों की शुरुआती समीक्षा में यह तथ्य सामने आया है कि न तो एथिक्स चैनल और न ही पॉश (POSH – यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून के तहत बनी आंतरिक समिति) के पास इस तरह की कोई औपचारिक शिकायत दर्ज की गई थी, जैसा कि मीडिया रिपोर्ट्स और आरोपों में बताया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि यदि वास्तव में ऐसा कोई मामला होता, तो उसके आंतरिक शिकायत प्रणाली में उसकी प्रविष्टि अवश्य होती।

कंपनी ने बनाई ओवरसाइट कमेटी

स्थिति को गंभीर मानते हुए TCS ने एक स्वतंत्र ओवरसाइट कमेटी के गठन की घोषणा की है। इस कमेटी की अध्यक्षता वरिष्ठ वित्तीय विशेषज्ञ और बोर्ड के स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री करेंगे। कंपनी के अनुसार, यह समिति पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी करेगी ताकि किसी भी प्रकार की पारदर्शिता या निष्पक्षता पर सवाल न उठे।

इसके अलावा आंतरिक जांच का नेतृत्व कंपनी की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर आर्थी सुब्रमण्यम को सौंपा गया है। वे पूरी जांच रिपोर्ट तैयार करेंगी और उसे ओवरसाइट कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के हर चरण में आवश्यकतानुसार बाहरी स्वतंत्र एजेंसियों की मदद ली जाएगी, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।

पुलिस जांच और आरोपों का संदर्भ

नासिक यूनिट से जुड़े इन आरोपों को लेकर स्थानीय पुलिस भी जांच कर रही है। आरोपों में धार्मिक रूपांतरण और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दों का उल्लेख किया गया है, जिसके बाद यह मामला सार्वजनिक चर्चा में आ गया। हालांकि अभी तक पुलिस की ओर से किसी भी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

इसी बीच कंपनी का यह बयान सामने आया है कि उसे किसी भी आंतरिक चैनल पर इस तरह की शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी, जिससे मामला और अधिक जटिल और विवादास्पद हो गया है। कंपनी का दावा है कि वह पूरी तरह से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग कर रही है और जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं डाल रही।

HR मैनेजर को लेकर भी स्पष्टता

मामले से जुड़े एक अन्य पहलू में मीडिया रिपोर्ट्स में एक व्यक्ति को एचआर मैनेजर बताया गया था, जिस पर कंपनी ने स्पष्टीकरण दिया है। TCS ने स्पष्ट किया है कि आरोपी के रूप में नामित निदा खान एचआर मैनेजर नहीं हैं, बल्कि वह एक प्रोसेस एसोसिएट के रूप में कार्यरत थीं। कंपनी के अनुसार, उन्होंने कभी भी किसी नेतृत्वकारी पद पर काम नहीं किया है।

इस स्पष्टीकरण का उद्देश्य गलत सूचना को रोकना और तथ्यों को स्पष्ट करना बताया गया है, क्योंकि इस तरह की रिपोर्ट्स से कंपनी की छवि और कर्मचारियों की स्थिति पर असर पड़ सकता है।

नासिक यूनिट को लेकर अफवाहों का खंडन

इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि TCS की नासिक यूनिट को बंद कर दिया गया है। कंपनी ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। TCS ने कहा है कि नासिक यूनिट पूरी तरह से सामान्य रूप से संचालित हो रही है और ग्राहकों को सेवाएं निर्बाध रूप से दी जा रही हैं।

कंपनी ने यह भी कहा कि संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं है और सभी प्रोजेक्ट्स पूर्व की तरह जारी हैं।

TCS का आधिकारिक रुख

अपने विस्तृत बयान में TCS ने दोहराया है कि कर्मचारियों की सुरक्षा, गरिमा और कल्याण उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी ने कहा है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, दबाव, जबरदस्ती या कदाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस नीति” अपनाती है।

TCS ने यह भी कहा कि उसका उद्देश्य केवल निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी प्रकार की गलतफहमी या आरोपों का समाधान किया जा सके।

आगे की स्थिति

फिलहाल मामला पुलिस जांच और कंपनी की आंतरिक जांच दोनों स्तरों पर चल रहा है। ओवरसाइट कमेटी की भूमिका इस पूरे मामले में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में कॉरपोरेट संस्थानों के लिए पारदर्शिता और समय पर आंतरिक शिकायत प्रणाली की सक्रियता बेहद जरूरी होती है, ताकि विवाद बढ़ने से पहले ही समाधान निकल सके।

नासिक यूनिट से जुड़ा यह मामला अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों पर ही स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी।

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