
इस्लामाबाद/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया के अशांत गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दशकों पुराने गतिरोध को खत्म करने की दिशा में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता का दूसरा चरण सोमवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित हो सकता है। सीएनएन की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताहांत तक पाकिस्तान पहुँचने की तैयारी में है। हालांकि, वाशिंगटन की ओर से इस कूटनीतिक हलचल पर अभी तक कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है, लेकिन पर्दे के पीछे की सरगर्मियां एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रही हैं।
ट्रंप का विश्वास बनाम तेहरान का संदेह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को वैश्विक मीडिया से बातचीत के दौरान एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों चिर-प्रतिद्वंद्वी पक्ष एक ऐतिहासिक ईरान अमेरिका शांति समझौता के बेहद करीब हैं। ट्रंप ने संकेत दिए कि तेहरान कुछ महत्वपूर्ण रियायतें देने के लिए तैयार है, जो क्षेत्र में शांति की नींव रख सकती हैं।
हालांकि, ट्रंप के इस उत्साहपूर्ण दावे पर तेहरान ने तत्काल सावधानी बरतने को कहा है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ट्रंप के ‘रियायत’ वाले दावों पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक अमेरिका प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी। ईरान का रुख स्पष्ट है कि वह अपनी संप्रभुता और परमाणु अधिकारों के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: कूटनीति के केंद्र में तेल का रास्ता
विश्व की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति धमनी, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में तनाव की स्थिति अभी भी जस की तस बनी हुई है। शुक्रवार को इस जलडमरूमध्य से केवल गिने-चुने जहाज ही गुजरते देखे गए। ईरान के विदेश मंत्री ने हालांकि यह दावा किया था कि यह मार्ग वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
ईरानी संसद के स्पीकर ने कड़े लहजे में अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि इस क्षेत्र से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई गई, तो होर्मुज को फिर से बंद कर दिया जाएगा। इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। ट्रंप का कहना है कि जब तक ईरान अमेरिका शांति समझौता 100 फीसदी सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी नौसेना इस इलाके में अपनी प्रभावी मौजूदगी और नाकाबंदी जारी रखेगी।
‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप का पोस्ट: शी जिनपिंग और चीन का जिक्र
अपने चिर-परिचित अंदाज में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट साझा किया, जिसने वैश्विक बाजार में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की संभावनाओं से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बेहद खुश हैं।
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा:
“होर्मुज खुलने से राष्ट्रपति शी जिनपिंग बहुत खुश हैं। चीन में हमारी एक बहुत अच्छी बैठक होने जा रही है और मैं उनसे मिलने को उत्सुक हूं। हम मिलकर भविष्य में बहुत कुछ बड़ा करने वाले हैं।”
ट्रंप का यह बयान केवल ईरान के संदर्भ में नहीं है, बल्कि यह इशारा है कि अमेरिका अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों को साधने के लिए चीन जैसे देशों के साथ मिलकर एक नया रोडमैप तैयार कर रहा है।
इस्लामाबाद वार्ता: क्या निकलेगा कोई समाधान?
सोमवार को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता को ‘अंतिम दौर की कोशिश’ के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान, जो दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, के लिए भी यह एक बड़ी राजनयिक उपलब्धि हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस बैठक में तेल निर्यात और प्रतिबंधों में ढील पर सहमति बन जाती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।
लेकिन राह इतनी आसान नहीं है। अमेरिका के भीतर भी ट्रंप की इस ‘डील’ को लेकर विरोध के स्वर उठ रहे हैं, वहीं ईरान के भीतर भी कट्टरपंथी धड़ा किसी भी प्रकार के समझौते का विरोध कर रहा है। ईरान अमेरिका शांति समझौता केवल दो देशों के बीच की संधि नहीं होगी, बल्कि यह पूरे मध्य पूर्व (Middle East) के भविष्य को तय करने वाली दस्तावेज होगी।
वैश्विक नजरें कूटनीतिक बिसात पर
जैसे-जैसे सोमवार की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सांसें थमी हुई हैं। क्या डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी नेतृत्व दशकों पुरानी दुश्मनी को दफन कर एक नए युग की शुरुआत कर पाएंगे? या फिर होर्मुज की नाकाबंदी एक बार फिर दुनिया को ऊर्जा संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर देगी?
फिलहाल, इस्लामाबाद कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है और दुनिया की नजरें उस मेज पर टिकी हैं जहाँ दो महाशक्तियां अपने अहंकार को पीछे छोड़ शांति की संभावनाओं को तलाशने की कोशिश करेंगी।



