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उत्तराखंड: टिहरी में कांग्रेस की जन आक्रोश रैली, शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में सरकार पर तीखा हमला, 2027 में बदलाव का दावा

टिहरी गढ़वाल में आज कांग्रेस ने अपनी ताकत का बड़ा प्रदर्शन करते हुए जन आक्रोश रैली निकाली। यह रैली प्रतापनगर विधानसभा क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं और राज्यभर के ज्वलंत मुद्दों को लेकर आयोजित की गई थी, जिसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, वरिष्ठ नेता यशपाल आर्या, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए। इस प्रदर्शन ने जिले की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि इसमें न केवल स्थानीय मुद्दों को जोर-शोर से उठाया गया बल्कि राज्य सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए।

रैली की शुरुआत हनुमान चौक से हुई और यह जिला मुख्यालय तक निकाली गई। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, स्थानीय ग्रामीण और समर्थक इस रैली में शामिल हुए, जिससे पूरा इलाका राजनीतिक नारों और विरोध प्रदर्शनों से गूंज उठा। रैली का मुख्य उद्देश्य प्रतापनगर क्षेत्र में लंबे समय से लंबित विकास कार्यों, पुनर्वास समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करना था। इसके साथ ही उत्तराखंड सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए गए।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मौके पर कहा कि प्रतापनगर-उत्तरकाशी क्षेत्र की जीवनरेखा माने जाने वाले डोबरा-चांटी पुल से मोटना तक मोटर मार्ग को हॉट मिक्स किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग की खराब स्थिति से स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और सरकार इस ओर ध्यान देने में विफल रही है। गोदियाल ने यह भी दावा किया कि क्षेत्र के विकास कार्यों में लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे जनता में आक्रोश बढ़ रहा है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता यशपाल आर्या ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय समुदायों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मांग की कि प्रतापनगर को पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल किया जाए और गांगड़ी समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में स्थान दिया जाए। इसके अलावा उन्होंने जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों का मुद्दा भी उठाया और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग लगातार खतरे में जी रहे हैं। आर्या ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह ग्रामीण सुरक्षा और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर गंभीर नहीं है।

कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने भी रैली में तीखा रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने सेम नागराजा मंदिर मुखेम धाम के पैदल मार्ग पर कैनोपी निर्माण की मांग की, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने राजीव गांधी नवोदय विद्यालय की तत्काल स्वीकृति देने की मांग भी उठाई। रावत ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पहाड़ी जिलों की स्थिति चिंताजनक है और सरकार इस दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है।

प्रतापनगर के विधायक विक्रम सिंह नेगी ने भी क्षेत्र की समस्याओं को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है और इन क्षेत्रों में तुरंत सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने टिहरी झील रिंग रोड पर व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के मुआवजे को व्यवसायिक दरों के अनुसार देने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने शादी-विवाह और घरेलू गैस आपूर्ति की समस्या को भी गंभीर बताते हुए शीघ्र समाधान की मांग की।

रैली के दौरान सभी नेताओं ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और प्रशासनिक तंत्र में माफिया का प्रभाव गहराता जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “डबल इंजन” सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाई है और विकास कार्यों में पूरी तरह विफल रही है।

कार्यक्रम के अंत में कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि जनता में बढ़ता असंतोष इस बात का संकेत है कि वर्ष 2027 में राज्य में सत्ता परिवर्तन तय है। उन्होंने कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है और कांग्रेस इस आंदोलन को और तेज करेगी। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने विधायक विक्रम सिंह नेगी की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं जगाई हैं।

इस जन आक्रोश रैली ने टिहरी की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी है और आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

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