
कभी भूलने की बीमारी को उम्र के साथ जोड़कर देखा जाता था, लेकिन बदलती जीवनशैली और डिजिटल युग ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। अब यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़ी संख्या में युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी में याददाश्त कमजोर होने का एक बड़ा कारण अत्यधिक मोबाइल उपयोग और खराब लाइफस्टाइल है।
डॉक्टरों के अनुसार, पहले अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियां आमतौर पर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थीं, लेकिन अब 30 से 40 वर्ष के युवाओं में भी इसके शुरुआती लक्षण सामने आने लगे हैं। यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है, क्योंकि यह सीधे मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
क्या है भूलने की बीमारी?
भूलने की बीमारी को मेडिकल भाषा में डिमेंशिया या अल्जाइमर कहा जाता है। इसमें व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता, याद रखने की शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो व्यक्ति अपनी पहचान तक भूल सकता है।
युवाओं में क्यों बढ़ रही है समस्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है डिजिटल डिवाइस पर अत्यधिक निर्भरता। आज का युवा दिन का अधिकांश समय मोबाइल, लैपटॉप या अन्य स्क्रीन पर बिताता है। इससे दिमाग को लगातार सूचना मिलती रहती है, लेकिन उसे प्रोसेस करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता।
इसके अलावा नींद की कमी भी एक प्रमुख कारण है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। लेकिन मोबाइल और सोशल मीडिया के कारण युवाओं की नींद प्रभावित हो रही है। देर रात तक स्क्रीन देखने से न केवल नींद कम होती है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी खराब हो जाती है।
लाइफस्टाइल और खानपान का असर
खराब खानपान भी इस समस्या को बढ़ा रहा है। आज के युवा जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन कर रहे हैं, जिससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। विटामिन, आयरन और कैल्शियम की कमी सीधे दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
इसके साथ ही तनाव, धूम्रपान और शराब जैसी आदतें भी याददाश्त कमजोर करने में अहम भूमिका निभाती हैं। लगातार तनाव में रहने से दिमाग पर दबाव बढ़ता है, जिससे ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है और चीजें याद नहीं रहतीं।
मोबाइल का ‘ट्रैप’ कैसे बन रहा है खतरा?
आज का युवा हर छोटे-बड़े काम के लिए मोबाइल पर निर्भर हो गया है। नंबर याद रखने से लेकर रास्ता ढूंढने तक, हर काम मोबाइल के जरिए किया जा रहा है। इससे दिमाग की प्राकृतिक एक्सरसाइज कम हो रही है।
रील्स और सोशल मीडिया की लत भी एक बड़ी समस्या है। लोग घंटों तक स्क्रॉल करते रहते हैं, जिससे उनका ध्यान एक जगह केंद्रित नहीं हो पाता। यह आदत धीरे-धीरे दिमाग की याद रखने की क्षमता को कमजोर कर देती है।
नींद के दौरान होता है दिमाग का ‘रीसेट’
विशेषज्ञ बताते हैं कि नींद के दौरान शरीर और दिमाग खुद को रीजनरेट करता है। इस समय दिमाग दिनभर की जानकारी को व्यवस्थित करता है और अनावश्यक चीजों को हटाता है। यदि नींद पूरी न हो तो यह प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे याददाश्त कमजोर हो जाती है।
क्या कहते हैं युवा?
कई युवाओं का कहना है कि वे अक्सर छोटी-छोटी चीजें भूल जाते हैं, जैसे चाबी कहां रखी, कौन सा काम करना था या किसी को फोन करना था। कुछ लोगों को तो यह भी याद नहीं रहता कि उन्होंने पैसे लिए या नहीं। यह संकेत है कि समस्या धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रही है।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान उपाय अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है:
- रोजाना योग और व्यायाम करें
- संतुलित और पौष्टिक आहार लें
- 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें
- मोबाइल और स्क्रीन टाइम सीमित करें
- नियमित रूप से दिमागी गतिविधियां जैसे पढ़ना, पहेलियां हल करना आदि करें
- तनाव कम करने के लिए ध्यान और मेडिटेशन करें
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
- दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं



