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इस्लामाबाद में डील हुई तो पाकिस्तान जाऊंगा: अमेरिका-ईरान वार्ता पर ट्रंप का बड़ा बयान

वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक वार्ताओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच शांति समझौता इस्लामाबाद में होता है, तो वह पाकिस्तान की यात्रा पर जा सकते हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने के लिए बैक-चैनल और औपचारिक बातचीत जारी है।

ट्रंप ने गुरुवार को लास वेगास के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, “अगर इस्लामाबाद में डील साइन होती है, तो मैं पाकिस्तान जा सकता हूं। वे चाहते हैं कि मैं वहां जाऊं।” उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है, खासकर दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के संदर्भ में।

ट्रंप ने इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच संवाद को आसान बनाने में महत्वपूर्ण और रचनात्मक योगदान दिया है। उन्होंने पाकिस्तानी मध्यस्थों को “बहुत अच्छा” बताते हुए कहा कि उनकी भूमिका से बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान इस समय एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पुल के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से विवाद का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा है। दोनों देशों के बीच पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है। ट्रंप ने हालांकि इस बार बातचीत को सकारात्मक बताते हुए उम्मीद जताई कि जल्द ही एक बड़ा समझौता सामने आ सकता है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बातचीत बहुत सफल चल रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही डील की घोषणा हो सकती है, और इसके बड़े आर्थिक प्रभाव देखने को मिलेंगे।”

ट्रंप ने इस संभावित समझौते के आर्थिक फायदे भी गिनाए। उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इससे तेल की कीमतों में कमी आ सकती है और ऊर्जा आपूर्ति अधिक स्थिर हो सकती है। ट्रंप के अनुसार, “अगर यह डील होती है, तो तेल की कीमतें पहले से भी कम हो सकती हैं और वैश्विक बाजार में स्थिरता आएगी।”

ऊर्जा कीमतों को लेकर उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में गैस और ईंधन की कीमतों में गिरावट के संकेत दिखाई देने लगे हैं। उनके मुताबिक, यह गिरावट आंशिक रूप से इन कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तेल कीमतें कई अन्य कारकों जैसे उत्पादन, मांग और भू-राजनीतिक तनावों से भी प्रभावित होती हैं।

महंगाई के मुद्दे पर ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने देश के इतिहास में सबसे ज्यादा महंगाई विरासत में पाई थी। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए गए और आगे भी इसे कम करने की कोशिश जारी रहेगी।

इस बीच, पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ Asim Munir ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया, जहां उन्होंने ईरान के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरे को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित दूसरे दौर की वार्ता की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुनीर ने तेहरान में ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf और अन्य अधिकारियों से बातचीत की। इसके अलावा, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी उनका स्वागत किया। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और बातचीत के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना था।

मीडिया रिपोर्ट्स, खासकर Al Jazeera के अनुसार, पाकिस्तान बैक-चैनल कूटनीति के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच दूरी कम करने की कोशिश कर रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि मुनीर का वॉशिंगटन दौरा भी प्रस्तावित है, जहां वे अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई थी। ऐसे में दूसरे दौर की बातचीत को लेकर उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। यदि यह वार्ता सफल होती है, तो यह न केवल दोनों देशों के संबंधों में सुधार लाएगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता इस्लामाबाद जैसे तीसरे देश में होता है, तो यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत हो सकती है और वह क्षेत्रीय राजनीति में एक अहम खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है।

कुल मिलाकर, ट्रंप का यह बयान केवल एक संभावित यात्रा की बात नहीं है, बल्कि यह अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच बदलते कूटनीतिक समीकरणों का संकेत भी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वास्तव में कोई बड़ा समझौता होता है और क्या ट्रंप पाकिस्तान की यात्रा करते हैं।

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