उत्तर प्रदेश: अंबेडकर जयंती पर सीतापुर में बवाल, होर्डिंग पर ‘श्रद्धांजलि’ शब्द से भड़के समर्थक, सड़क जाम कर किया प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में अंबेडकर जयंती के अवसर पर उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब एक होर्डिंग पर लिखे गए शब्दों को लेकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के समर्थकों ने आपत्ति जताई। मामला इतना बढ़ गया कि गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि बाद में पुलिस और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की समझाइश के बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।
जानकारी के अनुसार, जिले के रेउसा कस्बे में अटल चौक पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक द्वारा अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक होर्डिंग लगवाई गई थी। इस होर्डिंग में डॉ. अंबेडकर के लिए ‘श्रद्धांजलि’ शब्द का प्रयोग किया गया था, जिसे लेकर उनके अनुयायियों में नाराजगी फैल गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अंबेडकर जयंती एक उत्सव का दिन है, ऐसे में ‘श्रद्धांजलि’ शब्द का इस्तेमाल अनुचित और असम्मानजनक है।
शाम करीब पांच बजे जैसे ही यह बात फैली, बड़ी संख्या में अंबेडकर समर्थक अटल चौक पर जमा हो गए। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और लोगों ने होर्डिंग हटाने की मांग को लेकर सड़क पर जाम लगा दिया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी भी की गई और प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया गया।
मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष हनुमंत तिवारी ने बताया कि दिन में जयंती के सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे थे, लेकिन शाम होते-होते यह विवाद सामने आया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी मांगों को समझने की कोशिश की।
स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। काफी देर तक चली बातचीत और समझाइश के बाद आखिरकार संबंधित होर्डिंग को हटा दिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे प्रदर्शनकारी शांत हुए और जाम समाप्त किया गया।
स्थिति को पूरी तरह सामान्य करने के लिए प्रदर्शनकारियों को पास के कबीर आश्रम ले जाया गया, जहां एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सभी पक्षों ने शांति बनाए रखने पर सहमति जताई और भविष्य में इस तरह के विवादों से बचने की अपील की गई।
इस घटना से पहले दिनभर जिले में अंबेडकर जयंती को लेकर उत्साह का माहौल रहा। विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां लोगों ने बाबा साहेब की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उनके विचारों को याद किया। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक महेंद्र कुमार सिंह ‘झीन बाबू’ ने भी चंद्रसेनी क्षेत्र में अंबेडकर प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर यात्रा निकाली और भंडारे का आयोजन किया।
वहीं, भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी ने भी रेउसा चौराहे पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए डॉ. अंबेडकर के विचारों और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज में समानता और संविधान के महत्व पर जोर दिया।
यह पूरा मामला इस बात को दर्शाता है कि सार्वजनिक आयोजनों में शब्दों और प्रतीकों का चयन कितना संवेदनशील हो सकता है। खासकर जब बात किसी महान व्यक्तित्व की हो, तो लोगों की भावनाएं उससे गहराई से जुड़ी होती हैं। ऐसे में छोटी सी चूक भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है।
फिलहाल प्रशासन की तत्परता और स्थानीय लोगों की समझदारी से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है। लेकिन यह घटना भविष्य के लिए एक सीख भी छोड़ गई है कि इस प्रकार के आयोजनों में सावधानी और संवेदनशीलता बरतना बेहद जरूरी है, ताकि समाज में शांति और सौहार्द बना रहे।



